चांद देखने के मुतालिक मसाईल
इस्लामी महीनों का आग़ाज़ और अख्तेताम चांद के दिखने पर मुंहासिर है, लेकिन ये बात भी वाजेह है कि इस्लामी महीने सिर्फ़ 29/30 दिनों के ही होते हैं अंग्रेज़ी महीनों की तरह इन में 28, 29, 30 & 31 दिनों के नहीं होते हैं।
नबी करीम ने फ़रमाया: चांद ही देख कर रोजे शूरू करो और चांद ही देख कर रोज़ा मोकूफ करो और अगर बादल हो जाय तो तीस दिन पूरे कर लो। (सहीह बुखारी:1909)
बादल होने की सुरत में 30 पूरे करने है यानि चांद ना नज़र आने पर।
नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया: जब भी आप नया चांद (रमज़ान के महीने) का देखें तो रोज़ा रखें। और जब तुम उसे देखो (शावाल के चांद को) तो रोज़ा तोड़ दो, और अगर अगर आसमान अब्र आलूद है तो फिर तीस दिन रोज़ा रखो। (सहीह मुस्लिम:1081A)
नबी करीम ﷺ ने अपनी उंगलियां बताते हुए फ़रमाया: महीना इस तरह और इस तरह और यूं हैं, यानि तीस दिन। फिर (अपनी दस उंगलियों को दो बार और फिर नौ उंगलियों को थामे) उन्होंने कहा, "ये इस तरह और इस तरह और इस तरह हो सकता है," यानि उनत्तीस दिन (इसका मतलब था) एक बार तीस दिन एक बार उनत्तीस दिन।(सहीह बुखारी:5302)
कितने गवाह होने चाहिए चांद होने की तस्दीक के लिए:
माहे रमज़ान आग़ाज़ के लिए चांद देखे जाने की तस्दीक के लिए अलग अलग सूरत में अलग अलग तादाद में गवाहों का ज़िक्र मिलता है, लेकिन सही तादाद क्या है आईए हदीस की रौशनी में जानने की कोशिश करते हैं;
इब्ने उमर (रज़ी०) से रिवायत है,
लोगों ने चांद की तलाश की तो मैंने नबी करीम को ख़बर की मैंने चांद देखा। "नबी करीम ने रोज़ा रखा और लोगों को भी रोज़ा रखने का हुक्म दिया।" (अल्बानी= अबु दाऊद:205)
▪️ इमाम अहमद, इब्ने मुबारक और शाफी (रहमतुल्लाह अलैह) की एक रिवायत के मुताबिक़ एक गवाह क़ुबूल है। (ये बात हदीस की रौशनी में ज़्यादा सहीह है।)
▪️ इमाम मालिक, अबु अम्र अब्द अर रहमान इब्न अम्र अल अवज़इ, सुफ़ियान इब्न सईद अल सउरी (रहमतुल्लाह अलैह) के मुताबिक़ दो गवाह होने चाहिए (महीने के शूरू और खत्म दोनों पे)।
▪️ इमाम अहनाफ के नज़दीक अगर आसमान साफ़ है तो बड़ी तादाद में उसे देखना चाहिए अगर आसमान पर गुबार हों तो एक गवाह भी काफ़ी है।
चांद में इज्तेमाईयत
नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया: “रोज़ा तब रखो जब लोग रोज़ा रखते हैं, ईद तब मनाओ जब लोग मानते हैं। और ईद उल अदहा तब मनाओ जब लोग ईद उल अदहा मानते हैं।” [जामे तिरमिज़ी:697(अलबानी)]
International (بین الاقوام) चांद की हैसियत:
कुरैब बयां करते है, उम्म फदल बिनत हरिस ने उन्हें (यानी कुरैब) को मु,आवाइयां के पास शाम (सीरिया) भेजा वो कहते है, “मैं शाम पहुंचा और उनका काम खत्म किया। शाम (सीरिया) में ही रमज़ान का महीना शुरू हो गया। मैंने जुमा को नया चांद (रमज़ान का) देखा इसके बाद मैं महीने के आखिर में वापस मदीना आया।
अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ी०)ने मुझ से (रमज़ान के नए चांद के बारे में) पूछा और कहा, “तुमने चांद कब देखा?”
मैंने कहा, हमने चांद जुमा (Friday) की रात देखा था। उन्होंने कहा, (क्या) तुमने चांद खुद देखा?
मैंने कहा हां, “और लोगों ने भी उसे देखा और उन्होंने रोज़ा रखा और मैंने ने भी रोज़ा रखा”
इसके बाद उन्होंने कहा, “ लेकिन हमने उसे हफ्ते की रात (saturday) देखा। लिहाज़ा हम इस वक्त तक रोज़ा रखना जारी रखेंगे जब तक के हम तीस मुकम्मल न हो जाए या हम उसे (शवाल का चांद) न देख ले। मैंने कहा , “क्या आपके लिए मुआविया की रूयत काफी नहीं ”
उन्होंने कहा,“ नहीं. रसूल अल्लाह ने हमें इसी तरह हुकुम दिया है.”
सहीह मुस्लिम 1087
By अहमद बज़्मी
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