Valentine's Day (14 Febrauary) Ka Surprise

Valentine's Day (14 Febrauary) Ka Surprise


और फिर उस रात! वो मुँह छुपा कर रोती रही

रबाब आज बेहद खुश थी। आने वाले कुछ दिन उसके लिए बहुत खुशी लाने वाले थें।

फौज़िया: "हेल्लो यार! क्या कर रही हो? 

रबाब: आज मैं बहुत खुश हूँ और बहुत एक्साइटेड भी....  

रबाब ने अपनी दोस्त फौज़िया को एक सांस मे सब कह डाला जैसे वो खुशी से पागल हो जाएगी!!

फौज़िया: ओ हो रबाब! सलाम तो कर लेती! वैसे बहुत खुश लग रही हो क्या बात है भाई किस बात की एक्साइटमेंट हो रही है? फौज़िया ने बड़े ही मुताजस अंदाज मे पूछा था...

रबाब: वो....वो...यार...बात ही ऐसी है। यूनिवर्सिटी मे फैज़ को और मुझे मिले पूरा एक साल हो चुका है। और अब वैलेंटाइन डे आने वाला है....मोहब्बत करने वालो का दिन..... आह फौज़िया.......मैं बहुत एक्साइटेड हूँ कि फैज़ इस मौके पर क्या करने वाला है?

फौज़िया कुछ चुप सी हुई थी। वो हमेशा रबाब को समझाती रहती थी कि ये गलत है और अल्लाह ने इस काम को हराम किया है और क्या पता तुम्हारे घर वाले मानेंगे भी नहीं और वो फैज़ तुम से शादी करेगा भी कि नहीं!!

लेकिन रबाब इब्लीस की चाल मे इस कदर फस चुकी थी कि वो फौज़िया की बातों को हवा मे उड़ा देती। 

कुछ देर की खामोशी के बाद फौज़िया ने कहा: तुम जिना करने वाले दिन वैलेंटाइन.... एक फहशी दिन की मुन्तज़िर हो... अल्लाह तुम पर रहम करे और हिदायत दे।

रबाब: आमीन, आमीन और तुम्हे भी कोई अच्छा सा फैज़ जैसा बॉय फ्रेंड दे। रबाब ने जोर से हँसते हुए कहा, अच्छा छोड़ो ये सब और बताओ मुझे, मैं कैसा बुर्खा ख़रीदूँ जिस मे मैं बहुत अच्छी लगूँ?

फौज़िया: क्या करेगी बुर्खा पहन कर? हया तो आँखों मे होती है वही सब खो गई तो रस्मी हिजाब की क्या जरूरत? फौज़िया ने जबरदस्त वार किया था...

रबाब: ओ हो! बस करो यार, क्या हमेशा लेकर बैठ जाती हो। वैसे भी सिर्फ फैज़ के लिए ज़ीनत करती हूँ और जल्द ही हम एक दूसरे के महरम हो जाएंगे। अभी कल ही मैने प्लाज़ो और टॉप वाली फोटो उसे भेजी थी देखते ही माशा अल्लाह का अलाप लगाने लगा और कह रहा था कि तुम मेरी बीवी बनोगी मेरी जीनत!

फौज़िया: करने वाला होता तो कब का तुम से निकाह लर लेता। मर्द मजबूर नहीं होता रबाब... एक दूसरे को जानने के लिए साल नहीं लग जाता....वो बस तुम्हे उम्मीदें दिला रहा है जैसा कि अल्लाह ने अल-क़ुरान मे कहा है-

"वो शैतान लोगो से वादे करता है और उन्हे उम्मीदें दिलाता है, मगर शैतान के सारे वादे फरेब के सिवा कुछ नहीं है।" [सूरह निसा: 120]

शैतान तुम्हे फंसा रहा है। वो फैज़ महज वक़्त गुज़ारी के लिए तुम्हारा इस्तेमाल कर रहा है। 

रबाब: ओ हो शट अप!! बस करो अब..! मुझे कुछ नहीं सुनना उस के बारे मे... रबाब ने गुस्से मे कहा...

फौज़िया: ओके सॉरी... कल मिलेंगे इन शा अल्लाह..... अभी रखती हूँ। 

फ़सुर्दा से लहजे मे कह कर फौज़िया ने फोन रख दिया था।

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14 फ़रवरी वैलेंटाइन डे की शाम...

रबाब हिजाब पहने चोरी छिपे उस गार्डन मे पहुंची थी जहा फैज़ ने उसे बुलाया था। वो खुशी से फूली नहीं समा रही थी। फैज़ के सरप्राइज के लिए बेचैन थी। 

"हेल्लो रबाब तुम आ गयी?"......फैज़ की आवाज़ पर रबाब ने पलट कर देखा

इस से पहले वो कुछ कहती फैज़ के दोस्त इरशाद ने कहा: तुम तो बहुत खूबसूरत हो इतना अच्छा फिगर है तुम्हारा..... फिर इस हिजाब की क्या जरूरत थी?

इरशाद की बात सुन कर रबाब सकते मे आ गयी थी....  

रबाब: क्या... क्या कहना चाहते हो तुम?...

इरशाद: यही कि बहुत हसीन हो तुम... फैज़ ने भेजी थी तुम्हारी तस्वीर...

इरशाद ने रबाब के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा...

रबाब के पैरों तले जमीन खिसक गयी थी उस का दिल चाहा कि वो जेर ज़मीन दफ़न हो जाये। 

रबाब: क्या?......क्या मतलब?

फैज़: अरे बाबा..... जस्ट चिल्ल.....

वैसे भी देखो अब एक साल हो गया हमे.....सब जान चुके एक दूसरे के बारे मे..... अब बोरियत हो रही है इसलिए अब यही ख़त्म करते है सब........अब तुम मन बहलाने के लिए इरशाद से बात कर लेना इस के पास कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है। 

रबाब: गर्ल फ्रेंड!!

रबाब का दिल गोया फटने को था। 

शट अप फैज़! एक झन्नाटे दार थप्पड़ के साथ रबाब ने कहा: तुम ने मुझ से निकाह की बात की थी इस लिए मैंने इस रिश्ते को आगे बढ़ाया था..... वो रोए जा रही थी......

अब तुम......तुम मुझे......

फैज़: यू शट अप! करैक्टर लेस लड़की....मैं और तुम से शादी......

हा हा हा....तुम अपने खुदा की ना हो सकी इस बुरखे मे रहकर हुदूद को पार किया....अपने घर वालो को धोखे मे रखा.....फिर तुम मेरे साथ कैसे मुखलिस हो सकती हो....और मैं तुम जैसी लड़की से शादी करूंगा? जो निकाह से पहले ही गैर मर्द से बातें कर सकती है उस के लिए सब कुछ कर सकती है। जो अपनी हया को नीलाम कर सकती हो उसकी पाकी का क्या ऐतबार?...... अब अपना मनहूस वजूद लेकर दफा हो जाओ यहाँ से......

गेट लॉस्ट बिकाऊ लड़की......

अपनी सारी खबिसात को पार करके फैज़ ने रबाब को नापाकी का फतवा लगा कर रिजेक्ट किया था। 

रबाब की तस्वीरें वायरल कर दी गयी थी और उसे खबर भी न थी। 

वो अंदर से चूर चूर हो चुकी थी वो रोती गिड़गिड़ाती रही, वहा से भाग कर अपने घर आयी..... वाक़ई फैज़ ने उसे बहुत बड़ा सरप्राइज दिया था.....वैलेंटाइन डे का सरप्राइज......!

"वो तुम्हे धोखा देगा रबाब......करने वाला होता तो कब का कर लेता तुमसे निकाह.....फौज़िया के अल्फाज उसके कानो मे गूँज रहे थे.....

अल्लाह फ़रमाता है: "वो इन लोगो से वादा करता है और उन्हे उम्मीदें दिलाता है, मगर शैतान के सारे वादे फरेब के सिवा कुछ नहीं है।" [सूरह निसा: 120]

फौज़िया की क़ुरानी नसीहत की याद से उस का सर जोर से घूमने लगा.....वो....वो शैतान फैज़ ही था जिसने मुझे उम्मीदें दिलाई थी...वादे किये थे....अल्लाह ने मुझे खबरदार किया था...लेकिन....

मैं....मैं समझ ही न सकी..... अब वो चीख-चीख कर रोने लगी उसे फैज़ के साथ गुज़ारे सब लम्हे, सब बाते याद आ रही थी....उस की रूह अंदर तक कांप गयी....मैने अपनी दुनिया और आख़िरत दोनो बर्बाद कर ली.....अल्लाह मुझे नहीं बख्शेगा.....वो मुँह छुपा के रोती रही.....उसने डिप्रेशन मे आकर अपने हाथ की नब्ज़ काट ली थी एक गहरा धुंध उस के सामने छाने लगा.....वो बेहोश हो गई थी.....

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घबराओं मत रबाब!

सब ठीक हो जायेगा फौज़िया ने बहुत हमदर्दी से कहा.....फौज़िया को देख कर उसके आंसु बहने लगे......वो हॉस्पिटल में बेड पर लेटी रही....सालाइन की बूँद धीरे धीरे काम कर रही थी और आँखों का पानी सैलाब की तरह बह रहा था......

फौज़िया: मैं तुम से मालूमात नहीं करूंगी रबाब.... तुम अल्लाह से मायूस मत होना.......उस से तौबा करो अल्लाह तुम्हे बख्श देगा। 

लेकिन.....लेकिन फौज़िया.....रबाब के हक़लाते अल्फाज उसकी मायूसी की तर्जुमानी कर रहे थे.....

फौज़िया: नहीं रबाब मायूस मत हो अल्लाह कहता है,

"ऐ मेरे बन्दे, जिन्होंने अपनी जानो पर जुल्म किया है वो अल्लाह की रहमत से मायूस न हो अल्लाह तुम्हारे सब गुनाह बख्श देगा।" [अल जुमर: 53]

रबाब के आंसु सैलाब की तरह बहने लगे थे...... वो दिल ही दिल मे पछताये जा रही थी लेकिन पछतावे कहा हालात को बदल सकते है!!

एक गहरी ठोकर के बाद उस ने रब से रुज़ू कर लिया था.....

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फौज़िया: अस्सलामु अलैकुम.....कैसी हो रबाब!!

रबाब: अल्हम्दु लिल्लाह तुम बताओ कैसी हो.....मैने हया डे का प्रोग्राम बना लिया है। 

[रबाब पूरे दो साल बाद रबाब डिप्रेशन से निकली थी। अब वैलेंटाइन डे की मुखाल्फत मे हया डे को प्रमोट करने का काम करती थी।] 

फौज़िया: ओ हो! माशा अल्लाह 

अच्छा सुनो... वो जो फैज़ है न खुदा ने उस से तुम्हारा बदला ले लिया... उस की बहन किसी के साथ भाग गई.......!

अब वो मुँह छुपाये घूम रही है और फैज़ को तो कोई लड़की भी नहीं देता निकाह के लिए। 

"बहुत अफ़सोस हुआ सुन कर.....अल्लाह सभी नौजवानों को हिदायत दे.... रबाब ने बिल्कुल थमे हुए लहजे मे कहा था....

मक़ाफ़त ए अमल अटल है.... कुछ मामलात की सजा इसी दुनिया मे दे दी जाती है जो तौबा करता है वही राह पाता है और जो तकब्बुर से मुँह मोड़ता है वो गुमराह कर दिया जाता है....खैर अल्लाह रहम करे उम्मत के हाल पर..... चलो मैं निकलती हूँ, मुझे लेक्चर लेना है हया डे पर....फी अमानल्लाह

रबाब ने एक गहरी सांस ली और तिलावत ए क़ुरान मे मशगूल हो गई   

.....لا تقربوالزنى......... ان كان فاحشه و ساء سبيلا.....

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लेखिका: आलिया खान 
(जी. आई. ओ. मेमबर अर्धापुर)

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10 टिप्पणियाँ

  1. Allah sabhi nojawano ko hidayat de, or Shetan k waswaso s bachaye

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  2. Hamare momin behno ko Allah achchi thofiq atta kare

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