Khulasa e Qur'an - surah 8 | surah anfaal

Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir

खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (008) अल अनफ़ाल


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ 


सूरह (008) अल अनफ़ाल


(i) माले ग़नीमत का हुक्म

गज़वा ए बद्र में जो माले ग़नीमत हाथ आया था उसकी तक़सीम को लेकर मुसलमानों में कुछ इख़्तेलाफ़ हो गया था चुनाँचे उसके बारे में फ़रमाया गया

قُلِ ٱلۡأَنفَالُ لِلَّهِ وَٱلرَّسُولِۖ فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَصۡلِحُواْذَاتَ بَيۡنِكُمۡۖ وَأَطِيعُواْ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥٓ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ 

कह दो माले ग़नीमत अल्लाह और उसके रसूल का हक़ है अल्लाह से डरो, और अपने आपसी तअल्लुक़ात की इस्लाह (सुधार) करो और अल्लाह और उसके रसुल की इताअत करो। (1)


(ii) मोमिन की पांच सिफ़ात (ख़ूबियाँ)

1, अल्लाह के ज़िक्र से उनके दिल चमक उठते हैं।. 
2, क़ुरआन की तिलावत (समझ कर पढ़ने) से उनका ईमान बढ़ता है।. 
3, तवक्कुल (अल्लाह पर ही भरोसा). 
4, नमाज़ क़ायम करना. 
5, सख़ावत (जिसमें दिखावा न हो) 

(2, 3)


(iii) ग़ज़वा ए बदर में अल्लाह की मदद 

हज़ार फ़रिश्तों से, मोमिनीन के दिल से एक ऊंघ के जरिए ख़ौफ़ निकाल दिया गया, बारिश से मुसलमानों को फ़ायदा हुआ और काफ़िरों को नुक़सान, काफ़िरों के दिलों में ख़ौफ़ डाल दिया गया। (9 से 12)


(iv) मोमेनीन को छह नसीहतें

1, अल्लाह और उसके रसुल की इताअत. 
2, मैदाने जंग में पीठ न दिखाना. 
3, जब अल्लाह और रसूल किसी काम के लिए बुलाएं तो ख़ुशी ख़ुशी दौड़ पड़ो. 
4, अल्लाह और रसूल से ख़यानत न करो उन्हें अपनी अमानत समझो. 
5, अल्लाह से ही डरो, अल्लाह तुम्हें मुमताज़ कर देगा और तुम्हारे गुनाहों को बख़्श देगा. 
6, जब अल्लाह के दुश्मनों से मुकाबला हो तो साबित क़दम (जमे) रहो। 

(20, 24, 27, 30)


(v) कुछ अहम बातें

◆ ईमान लाने से पिछले तमाम गुनाह माफ़ हो जाते हैं। (29)

◆ माल और औलाद इंसान के लिए एक इम्तेहान हैं उनके आराम और ख़ुशहाली के लिए अपनी आख़िरत हरगिज़ ख़राब न करे। (28)

◆ अल्लाह और उसके रसूल की बात न सुनने वाले अल्लाह के नज़दीक बदतरीन जानवर हैं। (23)


(vi) माले ग़नीमत का हुक्म

माले ग़नीमत का 5वां (1/5) हिस्सा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम, आप के क़रीबी, यतीमों, मिस्कीनों और मुसाफ़िरों के लिए है (यह हिस्सा नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद बैतुल माल में जाता था और उन लोगों में तक़सीम होता था) बाक़ी 4 हिस्से मुजाहिदीन के लिये है। (41)


(vii) ग़ज़वा ए बद्र में किए गए एहसानात

◆ कुफ़्फ़ार को मुसलमान और मुसलमानों को काफ़िर तादाद में कम दिखाए गए। (43, 44)

◆ शैतान मुशरिकीन के सामने उनके आमाल को सजा संवार कर पेश करता रहा। दूसरी तरफ़ मुसलमानों की मदद के लिए आसमान से फ़रिश्ते नाज़िल हुए। (48)

◆ ग़ज़वा ए बद्र में क़ुरैश ज़लील व रुसवा हुए। (50)


(viii) अल्लाह तआला की नुसरत (मदद) के 6 असबाब (कारण)

◆ मैदाने जंग में सबित क़दमी।
◆ ज़्यादा से ज़्यादा अल्लाह का ज़िक्र।
◆ अल्लाह और रसूल की इताअत 
◆ आपसी इख़्तेलाफ़ और लड़ाई से बच कर रहना।
◆ मुक़ाबले में ना मुवाफ़िक़ हालात पर सब्र।
◆ दिखावा और घमंड से दूर रहना 

(45 से 47)


(ix) जंग के मुतअल्लिक़ हिदायात

◆ दुश्मनों के मुक़ाबले में साज़ व सामान, आर्थिक और रुहानी तीनों लिहाज़ से तैयारी मुकम्मल रखी जाय।
◆ अगर काफ़िर सुलह (समझौता) के लिए हाथ बढ़ाएं तो सुलह कर ली जाय।
◆ भरोसा सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह पर हो 

(60, 61)


(x) मोमेनीन की तीन अक़्साम

मुहाजिरीन= ईमान, हिजरत, जान व माल की क़ुर्बानी 

अंसार= ईमान, मुहाजिरीन को पनाह दी, क्षमता से ज़्यादा मदद की 

पीछे रह जाने वाले= ईमान लाए लेकिन हिजरत नहीं की। (72)


(xi) कुछ अहम बातें

◆ अल्लाह ने सहाबा के दिलों को जोड़ दिया जिसको दुनिया की तमाम दौलत ख़र्च कर के भी नहीं जोड़ा जा सकता था। (43)
◆ अल्लाह किसी को नेअमत दे कर उसे तब्दील नहीं करता जबतक कि क़ौम ख़ुद न तब्दील कर दे। (53)
◆ अगर अहले ईमान बीस हों तो वह अपने दो गुने दुश्मन पर भारी होंगे। (66) 


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

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