Khulasa e Qur'an - surah 72 | surah al jinn

Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir

खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (072) अल जिन्न 

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ


सूरह (072) अल जिन्न 


(i) जिन्नों का ईमान लाना

तायफ़ से वापसी में नबी करीम अलैहिस्सलाम नख़ला की वादी में क़ुरआन मजीद की तिलावत कर रहे थे कि जिन्नों के एक समूह का गुज़र हुआ तो उन्होंने क़ुरआन सुना और ईमान लाए और अहद किया कि अपने रब के साथ कभी किसी को साझी नहीं बनायेंगे। (1 से 3)


(ii) आख़िरी नबी होने की निशानी

नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के नबी बनाये जाने से पहले जिन्नात सुन गन लेने के लिए आसमान में घात लगाया करते थे लेकिन जब से आप नबी बनाये गए अब अगर कोई जिन्न सुन गुन लेने की कोशिश करता है तो एक चमकता हुआ सितारा (शहाबे साकिब) उसका पीछा करता है। (8 से 10)


(iii) मस्जिदें अल्लाह का घर हैं

मस्जिदें अल्लाह की इबादत के लिए हैं उनमें किसी और को न पुकारा जाय। (18)


(iv) ग़ैब का जानने वाला केवल अल्लाह है

कुछ इंसान जिन्नों की पनाह मांगते थे और उन्हें आलिमुल ग़ैब समझते थे तो यह मालूम होना चाहिए कि अल्लाह ही आलिमुल ग़ैब है वह अपने ग़ैब का इल्म अपने रसूलों के इलावा किसी को नहीं देता। उन्हें भी जितना चाहता है देता है। (6, 26, 27)


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

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