Bahattar (seventy two) hooron ki haqeeqat

Bahattar (seventy two) hooron ki haqeeqat


बहत्तर (72) हूरों की हक़ीक़त

आज कल एक गलत फहमी लोगों के दिलों में घर कर गई है कि हर मुसलमान को जन्नत में 72 हूरें मिलेंगी जिसको हासिल करने के लिए वह हर काम कर गुजरने के लिए तैयार हो जाते है यहां तक कि 72 हूरों की लालच में वह अपनी जान तक भी दे देते है कुछ नादान लोगों की तरफ से ये ऐतराज भी किया जाता है कि इस्लाम मुसलमानों को लालच देकर आतंकवादी बनाता है। और इन्ही चीज़ों को लेकर इस्लामोफोब्स इस्लाम के खिलाफ फिल्में बना रहे है जिसकी वजह से समाज में एक खास समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाई जा रही है। इसलिए आप सब से गुज़ारिश है कि आर्टिकल को पूरा पढ़ें ताकि आप इस्लामोफोब्स के द्वारा चलाए जा रहे प्रोपेगेंडा का शिकार न हो और जिससे आपकी, जन्नत और उसमे मौजूद हूरों से मुतल्लिक गलतफहमी दूर हो सके।


लोगों के ऐतराज का जवाब देने से पहले हम जन्नत के तसव्वुर पर इस्लाम का नुक्ता ए नजर समझने की कोशिश करते है।

अल्लाह ने दुनिया और जो कुछ इसमें मौजूद है सब इंसानों के लिए बनाया है और इस दुनिया में इंसान को पूरी आजादी के साथ बसाया है ताकि वह इंसान का इम्तिहान ले सकें और देखे कि कौन कौन इंसान ऐसे है जो अपनी मर्जी से अल्लाह के बताए हुए रास्ते पर चलते है और इसके लिए अल्लाह ने इंसान को पूरी आजादी दी है कि वह चाहे तो नेकी का रास्ता चुने या बुराई का। और अल्लाह ने इंसान तक अपना संदेश पहुंचाने के लिए अपने पैगम्बर इंसानों में से ही चुने जिनके जरिए वो सारे इंसानों तक अपना पैगाम पहुंचाता है। और अल्लाह के जितने भी पैगम्बर इस दुनिया में आए है सबकी तालिमात एक ही थी कि सिर्फ अल्लाह की इबादत करो और नेक आमाल (कर्म) करों और बुरे कामों से बचों। और अल्लाह ने पैगंबरों के जरिए ही इंसानों को नेक काम करने की तरगीब दी है और बुरे कामों से रोका भी है।

दुनिया में जो इंसान भी पैगंबरों की दावत पर ईमान (यकीन) लाते है और उनके बताए हुए रास्ते पर चलते है उनके लिए अल्लाह ने जन्नत का वादा किया है और जिन लोगों ने पैगंबरों की दावत को झुटलाया उनके लिए उसने दर्द नाक अज़ाब जहन्नुम के रूप में तैयार कर रखा है। अल्लाह ने इंसानों को अच्छे कामों पर उभारने के लिए जन्नत की नेमतों का जिक्र किया है और बुरे कामों से रोकने के लिए जहन्नुम की तफसीलात बताई है ताकि इंसान अच्छे काम करने पर और बुरे कामों से बचने के लिए हमेशा प्रेरित (motivate) रहे।

उदाहरण: हम कॉलेज जाते है और वहां जाकर अच्छे से मेहनत करते है ताकि हमारी आगे की जिंदगी बेहतर हो जाए लेकिन अगर हमे ये पता लग जाए की कॉलेज से डिग्री लेने के बाद सबको रोजगार के रूप में पकोड़े बेचने है तो क्या हम कॉलेज में मेहनत करेंगे?

आप सबका जवाब नहीं में ही होगा क्योंकि हमारी मेहनत करने के पीछे जो मोटिवेशन था वह खतम हो गया है। ऐसे ही अल्लाह तआला इंसान को मोटिवेट रखने के लिए जन्नत की नेमतों का जिक्र करता है ताकि इंसान मोटिवेट रहकर नेक काम करें।


इस्लाम के कुछ उसूल

आइए अब इस्लाम के कुछ उसूल को समझते है:

• अल्लाह के अहकाम में मर्द और औरत के दरमियान कोई फर्क नहीं। जैसे मर्द पर नमाज़ फर्ज़ है तो औरत पर भी फर्ज़ है, मर्द के लिए शराब पीना हराम है तो औरत के लिए भी हराम है, मर्द का चोरी करना जुर्म है तो औरत का भी चोरी करना जुर्म है। ऐसे ही अल्लाह के बहुत अहकाम है जो मर्द और औरत दोनो के लिए ही है।

• मर्द और औरत के दरमियान अजर (ईनाम) में भी कोई फर्क नहीं है। जैसे अच्छे काम के बदले में मर्द को जन्नत मिलेगी तो औरत को भी जन्नत ही मिलेगी।

• अल्लाह जन्नत में जाने वाले इंसानों को जो ईनाम के तौर पर नेमतें देगा उन सबका जिक्र कुरान में मौजूद नहीं है बस कुछ नेमतों के बारे में अल्लाह ने इंसानों को बता दिया है।

• जन्नत का उसूल है कि वहां इंसान जो चाहेगा वो उसको मिलेगा।

• अल्लाह ने इंसान को जन्नत और जहन्नुम के बारे में जितनी भी चीज़ें बताई है वो सब लिटरल मीनिंग (शाब्दिक अर्थ) में नहीं है बस उन चीजों का एक कॉन्सेप्ट इंसान को दिया गया है जिन चीजों को इंसान जानता है ताकि इंसान उसको सामने रखने के बाद जन्नत और जहन्नुम के बारे में कुछ अपना तसव्वुर बना लें।

उदाहरण: जिसने कभी केला नहीं खाया तो उसे आप केले का टेस्ट नहीं समझा सकते है उसे तो बस वह खाकर ही समझ सकता है जिसे मारिफत (किसी चीज़ के बारे में सब कुछ जानना) कहते है यानि उसके बारे में सब कुछ जान लिया।

अब अगर कोई ये कहे की मै केला खाऊंगा नहीं लेकिन मुझे समझा दो कि उसका टेस्ट कैसा होता है तो समझाने वाला यह करता है कि जिन चीजों को वह जानता है उसी के आस पास की सामान चीज़ों के उदाहरण देकर समझाने की कोशिश करता है यानि वह उस चीज के सबसे करीब की चीज का उदाहरण देकर बात समझाता है।

इसी तरह अल्लाह ने जन्नत की नेमतें गिनाई और आखिर में कह दिया की तुम नहीं जानते उन चीजों को इसलिए हम बस तुम्हे उन चीजों के नाम लेकर बता रहे है जिन्हे तुम जानते हो। जैसे अल्लाह ने जन्नत के फलों, दूध और शहद का जिक्र करके कह दिया की ये तुम्हारे दुनिया के फलों से कही बेहतर है। और जैसे जन्नत के एक सिरे से लेकर दूसरे सिरे तक का सफर 500 साल का बताया है तो वह किस हिसाब से होगा? 

  • पैदल होगा या बाइक या कार की रफ्तार से होगा? 
  • या फिर रॉकेट की रफ्तार से होगा? 
  • या फिर इन सबसे भी ज्यादा रफ्तार से होगा? 

ऐसे ही जहन्नुम की आग को दुनिया की आग से 70 गुना ज्यादा बताया है तो किस हिसाब से बताया है? 

  • क्या मोमबत्ती की आग से 70 गुना कहा है? 
  • या एलपीजी गैस या लकड़ी की आग से 70 गुना? 
  • या ज्वालामुखी से 70 गुना? 
  • या दुनिया के सबसे ज्यादा तापमान वाली आग से 70 गुना बताया गया है? 

खुलासा ए कलाम यह है कि जन्नत और जहन्नुम की चीज़ों के बारे में इंसान नहीं समझ सकता है क्योंकि उसने उसको कभी देखा नहीं इसलिए अल्लाह तआला ने इंसान को समझाने के लिए दुनिया की चीज़ों से उदाहरण दिए है। जैसा कि अल्लाह ने कुरआन में बताया है;

فَلَا تَعۡلَمُ نَفۡسٌ مَّاۤ اُخۡفِیَ لَہُمۡ مِّنۡ قُرَّۃِ اَعۡیُنٍ ۚ جَزَآءًۢ بِمَا کَانُوۡا یَعۡمَلُوۡنَ
"फिर जैसा कुछ आँखों की ठण्डक का सामान उनके आमाल के बदले में उनके लिये छिपाकर रखा गया है, उसकी किसी को ख़बर नहीं है।" 
[कुरआन 32:17]

अल्लाह ने अपने आखिरी पैगम्बर मुहम्मद ﷺ के जरिए भी यही बताया है कि वहां की चीज़ों का इंसान गुमान भी नहीं कर सकता है।

नबी करीम (ﷺ) ने फ़रमाया:

“अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है कि मैंने अपने नेकोंकार बन्दों के लिये वो चीज़ें तैयार रखी हैं जिन्हें किसी आँख ने न देखा और किसी कान ने न सुना और न किसी इन्सान के दिल में उन का कभी गुमान और ख़याल पैदा हुआ। अल्लाह की उन नेमतों से जानकारी और आगाही तो अलग रही (उन का किसी को गुमान और ख़याल भी पैदा नहीं हुआ)। फिर नबी करीम (ﷺ) ने इस आयत की तिलावत की فلا تعلم نفس ما أخفي لهم من قرة أعين جزا ء بما كانوا يعملون‏ कि "इसलिये किसी मोमिन को मालूम नहीं जो जो सामान आँखों की ठंडक का (जन्नत में) उन के लिये छिपा कर रखा गया है ये बदला है उन के नेक अमलों का जो दुनिया में करते रहे।'' [सहीह बुखारी : 4780]

• अल्लाह ने जन्नत की नेमतों की तशरीह (interpretation) इंसान की फितरत को सामने रखकर की है।

इस्लाम के ये कुछ उसूल है जिन्हे समझना बहुत जरूरी था वरना तो आपको उस ऐतराज का जवाब नहीं समझ आ सकता था जिसे कुछ नादान लोग इस्लाम के नाम की उठा रहे है।


अल्लाह ने हूर का जिक्र किस माना में किया?

अब बात करते है कि अल्लाह ने हूर का जिक्र किस माना में किया है। जब अल्लाह ने इंसान को जन्नत कि कुछ नेमतों के बारे में बताया और आखिर में ये कह दिया कि इंसान जन्नत में जिस चीज की ख्वाहिश करेगा वो उसे दी जाएगी। तो इंसान के दिल में खुद बा खुद एक सवाल आना लाज़िम है कि जन्नत में मुझे हर वो चीज मिलेगी जिसकी मैं इच्छा करूंगा तो क्या जन्नत में मुझे परिवार भी मिलेगा? 

आखिर जन्नत में मेरे परिवार कैसा होगा?

अल्लाह ने इंसान की इसी फितरत को सामने रखते हुए उसके परिवार के बारे में भी बताया है;

 وَ لَہُمۡ فِیۡہَاۤ اَزۡوَاجٌ مُّطَہَّرَۃٌ ٭ۙ وَّ ہُمۡ فِیۡہَا خٰلِدُوۡنَ 
"उनके लिये (जन्नतियों के लिए) वहाँ पाकीज़ा बीवियाँ होंगी और वो वहाँ हमेशा रहेंगे।"
[कुरआन 2:25]

यहां अरबी इबारत (वाक्य) में "अज़वाज" का लफ़्ज़ इस्तेमाल हुआ है। ये "ज़ौज" लफ़्ज़ की जमा (बहुवचन) है, जिसका मतलब है "जोड़ा"। और ये लफ़्ज़ शौहर और बीवी दोनों के लिये इस्तेमाल होता है। शौहर के लिये बीवी ज़ौज है और बीवी के लिये शौहर ज़ौज है। यानि हर जन्नती को अल्लाह उसका जोड़ा भी देगा। और जन्नती औरतों के बारे में अल्लाह ने बताया;

فِیۡہِنَّ قٰصِرٰتُ الطَّرۡفِ ۙ لَمۡ یَطۡمِثۡہُنَّ اِنۡسٌ قَبۡلَہُمۡ وَ لَا جَآنٌّ
"इन (जन्नत की) नेमतों के बीच शर्मीली निगाहों वालियाँ होंगी जिन्हें इन जन्नतियों से पहले किसी इन्सान या जिन्न ने छुआ न होगा।"
[कुरआन 55:56]

کَاَنَّہُنَّ الۡیَاقُوۡتُ وَ الۡمَرۡجَانُ
"ऐसी ख़ूबसूरत जैसे हीरे और मोती।"
[कुरआन 55:58]

औरत की असल ख़ूबी ये है कि वो बेशर्म और बेबाक न हो, बल्कि नज़र में हया और शर्म रखती हो। इसीलिये अल्लाह ने जन्नत के बीच औरतों का ज़िक्र करते हुए सबसे पहले उनके हुस्न और जमाल की नहीं, बल्कि उनके हयादार होने और पाकबाज़ी की तारीफ़ की है। ख़ूबसूरत औरतें तो मर्दों और औरतों के मिले-जुले कलबों और फ़िल्मी स्टूडियो में भी जमा हो जाती है, और ख़ूबसूरती के मुक़ाबलों में छाँट-छाँटकर एक से एक हसीन औरत लाई जाती है, मगर सिर्फ़ एक गन्दे ज़ौक़ और मिज़ाजवाला और बदकिरदार आदमी ही उनसे दिलचस्पी ले सकता है। किसी शरीफ़ आदमी को वो हुस्न अपनी तरफ़ नहीं खींच सकता जो हर बद-नज़र को देखने की दावत दे और हर किसी की बाँहों में समाने के लिये तैयार हो। 


हूर

अब आइए हम बात करते है हूर के बारे में, हूर के माना खूबसूरत औरत के है। जन्नती मर्दो का अल्लाह हूरों से निकाह कर देगा और वह एक परिवार की तरह रहेंगे न कि खुली बदकारी (adultary) करेंगे। जैसा कुरआन में आया है कि:

مُتَّکِئِیۡنَ عَلٰی سُرُرٍ مَّصۡفُوۡفَۃٍ ۚ وَ زَوَّجۡنٰہُمۡ بِحُوۡرٍ عِیۡنٍ 
"वो आमने-सामने बिछे हुए तख़्तों पर तकिये लगाए बैठे होंगे और हम ख़ूबसूरत आँखों वाली हूरें उनसे बियाह देंगे।"
[कुरआन 52:20]

کَذٰلِکَ ۟ وَ زَوَّجۡنٰہُمۡ بِحُوۡرٍ عِیۡنٍ 
"ये होगी उनकी शान और हम हिरनी जैसी आँखोंवाली गोरी-गोरी औरतें उनसे ब्याह देंगे।"
[कुरआन 44:54]

असल अरबी अलफ़ाज़ हैं हूरुन ईनहूर जमा (बहुवचन) है हौरा की और हौरा अरबी ज़बान में गोरी औरत को कहते हैं और ईन जमा है ऐना की और ये लफ़्ज़ बड़ी-बड़ी आँखोंवाली औरत के लिये बोला जाता है। यहां भी यह बात ध्यान में रहे कि हम हूर की असल कैफियत को नहीं समझ सकते है।


1. सवाल: क्या हर जन्नती को 72 हूरें मिलेंगी?

जवाब: ये एक गलतफहमी है कि हर जन्नती को 72 हूरें मिलेंगी। 

कुरआन में कही भी आपको ये नहीं मिलेगा अल्लाह 72 हूरें देगा। और न ही किसी सहीह हदीस में आपको ये मिलेगा की अल्लाह हर जन्नती को 72 हूरें ही देगा। सच्चाई सिर्फ इतनी है कि अल्लाह जन्नतियों से हूरों का निकाह कराएगा न की खुली अय्याशी की इजाज़त होगी। और जो हूर जिसकी बीवी रहेगी वो हमेशा उसी की बीवी रहेगी।

अल्लाह ने अपने आखिरी पैगम्बर के जरिए हमे बता दिया है कि हर जन्नती के लिए 2 बीवियां है।

नबी अकरम (ﷺ) ने फ़रमाया:

"जन्नत में जो पहला गरोह दाख़िल होगा उनके चेहरे चौदहवीं रात के चाँद की सूरत होंगे और दूसरे गरोह के चेहरे उस बेहतर रौशन और चमकदार सितारे की तरह होंगे जो आसमान में है। उनमें से हर शख़्स को दो-दो बीवियाँ मिलेंगी हर बीवी के बदन पर लिबास के सत्तर जोड़े होंगे फिर भी उसकी पिंडली का गूदा बाहर से (गोश्त के पीछे से) दिखाई देगा।" [सुनन तिर्मिजी: 2522]

जो इंसान भी हक (यानी सच्चाई) के लिए जालिमों से लड़ते हुए शहीद हो जाए यानी दुनिया में अच्छाई को फैलाने और बुराई को खत्म करने के लिए लड़े और वह शहीद हो जाए तो अल्लाह ने सिर्फ उसके लिए 72 हूरों से शादी का वादा किया है। और ये अल्लाह की मर्जी है कि वह जिसको चाहे जितनी हूरें दें उसपर किसी का क्या ऐतराज बनता है?

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:

अल्लाह के नज़दीक शहीद के लिये छः इनामात हैं-

(1) ख़ून का पहला बूँद गिरने के साथ ही इस की मग़फ़िरत हो जाती है।
(2) वो जन्नत में अपनी जगह देख लेता है।
(3) अज़ाबे-क़ब्र से महफ़ूज़ रहता है।
(4) अज़ीम घबराहट वाले दिन से मामून रहेगा
(5) उसके सिर पर इज़्ज़त का ताज रखा जाएगा जिस का एक याक़ूत दुनिया और उसकी सारी चीज़ों से बेहतर है।
(6) 72 जन्नती हूरों से उसकी शादी की जाएगी और उसके सत्तर रिश्तेदारों के सिलसिले में उसकी शफ़ाअत क़बूल की जाएगी। [सुनन तिर्मिजी : 1663, मिशकात : 3834]

गवाही देने वाले को शाहिद कहते है और किसी इंसान के मुसलमान होने के लिए उसे शहादत का कलमा पढ़ना होता है जिसमे वह अपनी जुबान से हक (सच्चाई) की गवाही देते है कि "अल्लाह के सिवा कोई माबूद (यानी इबादत के लायक) नहीं है और मुहम्मद ﷺ अल्लाह के बंदे और रसूल है। "

और इसी कलमे की गवाही शहीद अपनी जान देकर देता है यानी शहीद की गवाही सबसे अफजल है क्योंकि उसने अपनी जान देकर हक (सच्चाई) की गवाही दी है इसलिए ही अल्लाह ईनाम के तौर पर शहीद का निकाह 72 हूरों से कराएगा क्योंकि वह दुनिया में सबसे बड़ी गवाही देकर अल्लाह के पास पहुंचा है। 


2. सवाल: जन्नत में मर्द को एक से ज्यादा बीवियां रखने की इजाजत क्यों है?

जवाब: इस्लाम लैंगिक समानता (Gender equality) को नहीं मानता है बल्कि लैंगिक न्याय (Gender justice) को मानता है। 

जैसे इस्लाम ने मर्द और औरत की जिम्मेदारी अलग अलग रखी है क्योंकि उन दोनो कि फितरत भी अलग अलग है अल्लाह के बताए हुए रास्ते के मुताबिक जिंदगी गुजारना ही इंसानों की फितरत है। अगर कोई लैंगिक समानता (Gender equality) को ही मानता है तो उसे चाहिए की मर्द को भी बच्चे पैदा करने के लिए कहे जो कि इंसान की फितरत के खिलाफ है इसलिए ही इस्लाम लैंगिक न्याय (Gender justice) की बात करता है और ये बात न्याय (justice) के ऐन मुताबिक है कि अगर दुनिया में एक इंसान को 4 बीवियां रखने की इजाजत है तो जन्नत में वह 4 से ज्यादा भी रख सकता है।


अब सवाल ये उठेगा की एक से ज्यादा बीवियां रहेंगी तो क्या वह आपस में लड़ेंगी नहीं?

इसका जवाब यह है कि जब इंसान जन्नत में जायेगा तो उसे न तो मौत आनी है और न ही किसी किस्म की बिमारी उसे होगी। और बिमारी दो प्रकार की होती है-

1. जिस्मानी बिमारी: जैसे जिस्म को कोई बिमारी हो, बुखार, खासी, जुखाम इत्यादि

2. रूहानी बिमारी: यानी दिल की बिमारियां जैसे एक दूसरे से जलन, हसद, कीना, वुग्ज और नफरत।

जब जन्नत में एक दूसरे से कोई नफरत ही नहीं होगी यानी कोई रूहानी बिमारी या दिल की बिमारी ही नहीं होगी तो वहां एक से ज्यादा बीवियां भी राजी खुशी रहेंगी।

उदाहरण: एक साथ 2 बीवियां रखने को दुनिया में बुरा समझा जाता है क्योंकि नादान लोग कहते है कि ये तो औरत पर जुल्म है और कोई औरत कैसे बर्दाश्त कर सकती है कि कोई उसके शौहर को शेयर करे। वह दोनो औरतें एक दूसरे से जलेंगी, बुग्ज रखेंगी, आपस में हसद रखेंगी और नफरत फैलेगी। 

लेकिन जब जन्नत में कोई ऐसी बिमारी ही नहीं रहेगी तो एक से ज्यादा बीवियां भी राजी खुशी रहेंगी।

जन्नत के बारे में अल्लाह ने कुरआन में कहा है:

لَا یَسۡمَعُوۡنَ فِیۡہَا لَغۡوًا وَّ لَا تَاۡثِیۡمًا اِلَّا قِیۡلًا سَلٰمًا سَلٰمًا
"वहाँ वो कोई बेहूदा कलाम या गुनाह की बात न सुनेंगे। जो बात भी होगी ठीक-ठीक होगी।"
[कुरआन 56:25-26]

ये जन्नत की बड़ी नेमतों में से एक है, जिसे क़ुरआन में अलग-अलग जगहों पर बयान किया गया है कि इन्सान के कान वहाँ बेहूदगी, बकवास, झूठ, ग़ीबत (पीठ पीछे बुराई), चुग़ली, बोहतान, गाली, डींगें मारने, तंज़ करने और मज़ाक़ उड़ाने और ताने देने की बातें सुनने से बचे होंगे। वो बदज़बान और बद्तमीज़ लोगों की सोसाइटी न होगी जिसमें लोग एक-दूसरे पर कीचड़ उछालें। वो शरीफ़ और तहज़ीबदार लोगों का समाज होगा, जिसके अन्दर ये बेहूदा बातें न होंगी। अगर किसी शख़्स को अल्लाह ने कुछ भी तहज़ीब और शाइस्तगी और अच्छे ज़ौक़ (रुचि) से नवाज़ा हो तो वो अच्छी तरह महसूस कर सकता है। दुनियावी ज़िन्दगी का ये कितना बड़ा अज़ाब है जिससे इन्सान को जन्नत में नजात पाने की उम्मीद दिलाई गई है।


3. सवाल: जन्नत में जब मर्द को हूरें मिलेंगी तो औरत को क्या मिलेगा?

जवाब: ये बात पाकवाज शरीफ औरतों की फितरत के खिलाफ है। 

जैसाकी हमने उपर इस्लाम के कुछ उसूल में आपको ये बात बताई है कि अल्लाह ने जन्नत की नेमतों की तशरीह इंसान की फितरत को सामने रखकर की है। और ये बात पाकबाज़ शरीफ औरतों की फितरत के खिलाफ है कि कोई उनसे ये सवाल करें कि आपके जन्नत में कितने शौहर होंगे। इसलिए ही इस्लाम ने औरत को हूर की जगह क्या मिलेगा इसपर खामोशी इख्तियार की है।

तो हमे भी इस मसले पर खामोशी इख्तियार करनी चाहिए क्योंकि हमे नहीं पता की अल्लाह ने उनके लिए क्या रखा हो। और अल्लाह ने जन्नत के बारे में कहा है की वहां इंसान जिस चीज की तमन्ना करेगा वह उसको दी जायेगी और यह बात दोनों के लिए है चाहे वो मर्द हो या औरत। 

ٱلْـَٔاخِرَةِ ۖ وَلَكُمْ فِيهَا مَا تَشْتَهِىٓ أَنفُسُكُمْ وَلَكُمْ فِيهَا مَا تَدَّعُونَ
"वहाँ (जन्नत में) जो कुछ तुम चाहोगे, तुम्हें मिलेगा और हर चीज़ जिसकी तुम तमन्ना करोगे, वो तुम्हारी होगी" 
[कुरआन 41:31]

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ فِى رَوْضَاتِ ٱلْجَنَّاتِ ۖ لَهُم مَّا يَشَآءُونَ عِندَ رَبِّهِمْ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلْفَضْلُ ٱلْكَبِيرُ
"जो लोग ईमान ले आए हैं और जिन्होंने अच्छे काम किये हैं, वो जन्नत के बाग़ों में होंगे, जो कुछ भी वो चाहेंगे अपने रब के यहाँ पाएँगे, यही बड़ी मेहरबानी है।"
[कुरआन 42:22]

لَهُم مَّا يَشَآءُونَ فِيهَا وَلَدَيْنَا مَزِيدٌۭ
"वहाँ (जन्नत में) उनके लिये वो सब कुछ होगा जो वो चाहेंगे, और हमारे पास इससे ज़्यादा भी बहुत कुछ इनके लिये है।"
[कुरआन 50:35]

यानी जो कुछ वो चाहेंगे वो तो उनको मिलेगा ही, मगर उसपर और ज़्यादा अल्लाह उन्हें वो कुछ भी देंगे जिसका कोई तसव्वुर तक उनके ज़हन में नहीं आया है के वो उसके हासिल करने की ख़ाहिश करें।

इन आयात से पता चला की वहां जन्नत में हर जन्नती की ख्वाहिश पूरी होगी तो अब रहा ये सवाल की औरत को वहां क्या मिलेगा? तो इसके सिर्फ दो ही संभावनाएं मुमकिन है:

1. या तो जन्नती औरत के दिल में कभी ये ख्वाहिश नही आयेगी की उसके एक से ज्यादा शौहर हों। 

2. और अगर ये ख्वाहिश आयेगी तो उसको अल्लाह जैसे चाहे वैसे पूरा करे जैसाकी कुरान की आयत है कि वहां हर ख्वाहिश को पूरा किया जाएगा।


खुलासा: 

1. अल्लाह ने दुनिया में इंसानों को इम्तिहान के लिए भेजा है और जो लोग इस इम्तिहान में पास होंगे उनके लिए जन्नत है और जो फेल होंगे उनके लिए जहन्नुम है, 

2. जन्नत एक ऐसी चीज है जिसके बारे में कोई तसव्वुर भी नहीं कर सकता है अल्लाह ने इंसान को अच्छे काम करने पर मोटिवेट रखने के लिए जन्नत की कुछ नेमतों को दुनिया की चीज़ों से समझाया है जिसमे से हूर भी एक नेमत है। और 

3. हूर से अल्लाह जन्नती का निकाह कराएगा। 72 हूरों से निकाह हर जन्नती का नहीं बल्कि सिर्फ शहीद का होगा। बाकी हर जन्नती को 2 बीवियां मिलेंगी। और अल्लाह अपनी तरफ से जितनी बीवियां जिसको देना चाहे दे सकता है।


अल्लाह से दुआ है कि अल्लाह हमें शहादत की मौत नसीब करे। आमीन।


लेखक: अकरम हुसैन

एक टिप्पणी भेजें

3 टिप्पणियाँ

कृपया कमेंट बॉक्स में कोई भी स्पैम लिंक न डालें।

क्या आपको कोई संदेह/doubt/शक है? हमारे साथ व्हाट्सएप पर चैट करें।
अस्सलामु अलैकुम, हम आपकी किस तरह से मदद कर सकते हैं? ...
चैट शुरू करने के लिए यहाँ क्लिक करें।...