Kya ramzan me marne wala sidha jannat me jayega

Kya ramzan me marne wala sidha jannat me jayega


क्या रमजान में मरने वाला सीधा जन्नत जाएगा?

रमजान में मरने वाला जन्नत जाएगा इस सिलसिले में कोई हदीस सहीह नहीं। 

इस विषय में कुछ लोग हदीस बयान करते हैं उन हदीस को हम देखते हैं क्या वो सहीह है?


1. पहली हदीस

 3 लोगों के लिए जन्नत की बशारत :-

 हज़रत इब्ने मसूद रज़ि अन्हु से रिवायत है नबी सल्लल्लाहु वसल्लम ने फरमाया :-

"जिसको रमजान के इख़्तिताम के वक्त मौत आई है जन्नत में दाखिल होगा और जिसको मौत अरफा के दिन (यानी 09 जुल हिज्जा ) के खत्म होते वक्त आई वह भी जन्नत में दाखिल होगा और जिसको मौत सदक़ा देने की हालत में आई वह भी जन्नत में दाखिल होगा।" [हिल्यातुल औलिया 05/26 हदीस 6187] 


ये रिवायत सख्त ज़इफ है इसकी सनद में नस्र बिन हम्माद बिन अजलान है ये मतरूक उल हदीस है। 

इमाम अबू हातिम अर राज़ी कहते हैं। 

"ये मतरूक उल हदीस है।" [अल जरह व तादील इब्ने हातिम 08/470]

बाज़ ने इसको कज़्ज़ाब कहा है। 

इमाम यहया बिन मुईन कहते हैं, "कज़्ज़ाब है।" [ज़ोफा अल कबीर लिल उक़ैली 04/300]


2. दूसरी हदीस

कयामत के दिन रोज़े का सवाब :-

हजरत आयशा रज़ि अन्हा से रिवायत है की नबी अलैहिस्सलाम ने फरमाया, "जिसका रोजे की हालत में इंतकाल हो अल्लाह उसको कयामत के दिन रोजे का सवाब आता करेगा।" [अल फिरदोस बिमसारुल खतताब 03/504 हदीस 5557]

ये हदीस सख्त ज़इफ है इसकी सनद में उमरो बिन अल हुसैन है ये मतरूक उल हदीस है। 


हाफ़िज़ इब्ने हजर कहते हैं :-

عمرو بن الحصين العقيلي بضم أوله البصري ثم الجزري متروك

"उमरो बिन हुसैन ये मतरूक है।" [तक़रीब उत तहज़ीब रक़म 5012)*


हजरत अनस बिन मालिक रज़ि अन्हू फरमाते हैं मैंने नबी सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम को फरमाते हुए सुना, "ये रमज़ान तुम्हारे पास आ गया इसमें जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं और शैतान को कैद कर दिया जाता है मुर्दा है वो शख्स जिसने रमज़ान को पाया और उसकी मगफिरत ना हुई के ज़ब इसकी रमज़ान में मगफिरत ना हुई तो फिर कब होंगी?" [मजमा उज़ ज़वाइद 03/340 हदीस 4788]

यह हदीस भी ज़इफ है। 

इमाम हैसमी खुद इसको नक़ल करने के बाद इसकी सनद के एक रावी फज़ल बिन ईसा अर्क़ाशी को ज़इफ क़रार देतें हैं। लेकिन इसमें रमज़ान में फोत होने वाले के लिए मगफिरत की बात नहीं है। 


नोट:- शैतान के क़ैद होने वाली बात दीगर सहीह अहादीस से साबित है। 


जो बग़ैर हिसाब किताब जन्नत में जायेंगे उनके बारेँ में नबी अलैहिस्सलाम ने हमें आगाह कर दिया है। 

नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया, 

''मेरे सामने उम्म्तें पेश की गईं। किसी नबी के साथ पूरी उम्मत गुज़री, किसी नबी के साथ कुछ आदमी गुज़रे, किसी नबी के साथ दस आदमी गुज़रे, किसी नबी के साथ पाँच आदमी गुज़रे और कोई नबी अकेला गुज़रा। फिर मैंने देखा तो इन्सानों की एक बहुत बड़ी जमाअत दूर से नज़र आई। 

मैंने जिब्राईल से पूछा : क्या ये मेरी उम्मत है? 

उन्होंने कहा, नहीं बल्कि उफ़ुक़ की तरफ़ देखो। 

मैंने देखा तो एक बहुत ज़बरदस्त जमाअत दिखाई दी। 

फ़रमाया कि ये है आपकी उम्मत और ये जो आगे-आगे सत्तर हज़ार की तादाद है उन लोगों से हिसाब न लिया जाएगा और न उनपर अज़ाब होगा। 

मैंने पूछा : ऐसा क्यों होगा? 

उन्होंने कहा कि इसकी वजह ये है कि ये लोग दाग़ नहीं लगवाते थे, दम झाड़ नहीं करवाते थे, शगून नहीं लेते थे, अपने रब पर भरोसा करते थे।" 

फिर नबी करीम (सल्ल०) की तरफ़ उक्काशा-बिन-मोहसिन (रज़ि०) उठ कर बढ़े और कहा कि, या रसूलुल्लाह! दुआ फ़रमाएँ कि अल्लाह तआला मुझे भी उन लोगों में कर दे। 

नबी करीम (सल्ल०) ने दुआ फ़रमाई कि "ऐ अल्लाह! इन्हें भी उनमें से कर दे।" 

इसके बाद एक और सहाबी खड़े हुए और कहा कि मेरे लिये भी दुआ फ़रमाएँ कि अल्लाह तआला मुझे भी उनमें से कर दे। 

नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया कि उक्काशा इसमें तुमसे आगे बढ़ गए।

[बुखारी 6541]


अल्लाह दीन समझने की तौफ़ीक़ दे। 

आपका दीनी भाई
मुहम्मद

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