इंडिया में वैलेंटाइन्स डे कैसे मनाया जाता है?
वैलेंटाइन्स डे इस्लाम में आग की तरह फ़ैल रहा है जिसे रोकना बेहद ज़रूरी है। ये हराम त्योहार हमारी आने वाली नस्लों को बर्बादी की कगार पर ले जाने वाली कौमो के लिए मुफीद अमल साबित हो रहा है खास तौर पर इस्लामी मुआशरों, नई नस्लों, मॉडर्न मुस्लिम परिवारों में। ये एक हराम अमल है जिसे दुनिया भर के मुसलमानों के लिए हराम क़रार दिया गया है। अगर कोई चीज़ इस्लाम में हराम कही जाती है तो इसका मतलब ये है के वो अमल हमारे लिए फायदेमंद हरगिज़ नहीं हो सकता अलबत्ता उसके नुक़सानात हमारा आज और कल दोनों बर्बाद कर सकते हैं।
ये दीन के मामले में बिदअत है। इसका ताल्लुक़ सिर्फ तोहफे देने तक ही नहीं रह गया बल्कि ये गैर कानूनी जिन्सी ताल्लुक़ात (ज़िना) को प्रमोट करता है। हमें चाहिए के हम ऐसे हराम रिश्तों से खुद को दूर रखें और अगर आप ऐसे रिश्तों में हैं तो उसे ख़त्म करके आगे बढ़ने की कोशिश करें। हर ज़िम्मेदार वालिदैन को चाहिए के वो अपनी औलाद पर नज़र रखें। खास तौर पर इस दिन उनकी हर एक्टिविटी को नोटिस करें। इस दिन हमारी (वालिदैन) लापरवाही और होने वाली बेहयाई की वजह से हमें और हमारी औलादों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
वैलेंटाइन्स डे: एक नेमत या लानत
हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। आज हमारे कौम की बच्चियां कॉलेज, यूनिवर्सिटी और एक्स्ट्रा क्लासेस के नाम पर अपने घर वालों से झूट बोल कर घर से दिनभर बाहर अपने लवर (lover) के साथ ज़िनाकारी करती हैं, जिसके नतीजे भयंकर होते हैं-
1. लाखों कवांरे लड़के और लड़कियां वैलेंटाइन्स डे के दिन जिस्मानी ताल्लुक़ात बना कर अपना फख्र (pride) खो देते हैं।
2. इसके कुछ रोज़ बाद हज़ारों लड़कियां हामिला (pregnant) हो जाती हैं।
3. कुछ तो हमल को ज़ाया करा देती हैं और कुछ ज़्यादा तादाद में गर्भनिरोधक गोलियां लेने और दूसरे ट्रीटमेंट्स की वजह से ता-उम्र माँ बनने की सलाहियत खो देती हैं। लड़कियों में बच्चेदानी (uterus) कैंसर आम होता जा रहा है जिसकी वजह ये हाई डोज़ गोलियां हैं।
4. कुछ को घरों में क़ैद कर दिया जाता है और टॉर्चर किया जाता है। उनकी एजुकेशन रोक दी जाती है और जल्द से जल्द कैसा भी रिश्ता मिलते ही निकाह कर दिया जाता है।
5. सैकड़ों लड़कियां सिंगल मदर बन जाती हैं। कुछ तो घर से बेदार कर दी जाती हैं तो कुछ खुद ही माँ बाप दोनों की ज़िम्मेदारियों में उलझ कर रह जाती हैं। ऐसी लड़कियों की शादियां होती भी हैं तो उनका बहुत बुरा हाल होता है।
6. लड़के इस अमल के बाद ऐसे बरी हो जाते जैसे कुछ हुआ ही नहीं पर इसका सीधा इफ़ेक्ट लड़कियों की एजुकेशन पर पड़ता है साथ ही उनके ज़ेहन पर भी।
7. कुछ लड़कियां डिप्रेशन में चली जाती हैं जिन्हे इससे बाहर निकलते निकलते सालों लग जाते हैं और ये वक़्त उनके हाथ से चला जाता है।
8. इसका समाज पर गहरा असर पड़ता है, कुछ पेरेंट्स इस ज़िल्लत को बर्दास्त नहीं कर पाते वो आत्महत्या कर लेते हैं या घर, मोहल्ला या शहर छोड़ कर चले जाते है और नई जगह पर गरीबी में ज़िन्दगी बसर करते हैं।
9. बिन बयाही माँ बनने के बाद वो लड़के भी अपनी औलाद को क़बूल नहीं करते न उस लड़की से निकाह करते हैं जिससे सिंगल पेरेंटिंग कई गुना बढ़ जाती है।
10. इस दिन की बेहयाई की वजह से हज़ारों लड़के-लड़कियों को सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिसीसेस से लड़ना पड़ता है। लड़कियों में बच्चेदानी (uterus) कैंसर आम होता जा रहा है।
इंडिया में वैलेंटाइन्स डे का प्रमोशन
टेलीविजन, न्यूज़ पेपर और दीगर मैग्जिंस में आने वाले एक एड जिसमें कई सारी गर्भनिरोधक गोलियों का प्रचार प्रसार हो रहा है, "सिर्फ एक कैप्सूल से 72 घंटो के अंदर अनचाही प्रेगनेंसी से छुटकारा..."
इस प्रचार ने भोली भाली बच्चियों के दुस्साहस और बेगैरत को बढ़ा दिया है। और उस पर सुप्रीम कोर्ट की कानूनी मान्यता एक काला धब्बा है।
सुप्रीम कोर्ट ने MTP (Medical Termination of Pregnancy) एक्ट के इंडिया में कुवांरी लड़कियों को भी 24 हफ्तों तक गर्भपात का अधिकार दे दिया है कि unmarried लड़कियां गर्भपात करा सकती हैं। यह निहायत ही जाहिलाना और शर्मनाक फ़ैसला है।
एक गाईनाकोलोजिस्ट महिला डाक्टर की मानें तो वेलेंटाइन डे सेलिब्रेशन के कुछ दिन बाद कॉलेज, यूनिवर्सिटी और विभिन्न क्षेत्रों से आने वाली कवारी लड़कियां भारी मात्रा में गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती हैं।
एक रिपोर्ट बताती है कि हमारे देश में 43 लाख लड़कियों में बाँझपन और 30 लाख लड़कियों में बच्चेदानी का कैंसर पाया गया है और इसका एक बहुत बड़ा कारण गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन है।
एक तरफ़ तो भारत सरकार नारी सशक्तिकरण के नाम पर विभिन्न योजनाओं को लागू कर रही है "मातृत्व सुरक्षा", "जननी सुरक्षा", "बेटी बचाओ" जैसी योजनाओ के नाम पर करोड़ो रूपये लगा कर महिला हितैसी का झूठा ढोंग करती है और दुसरी तरफ़ i-pill और दीगर गर्भपात की गोलियों का ज़हर।
13 फ़रवरी को इंटरनेशनल कंडोम डे के नाम से मनाया जाता है क्यूंकि इस दिन लाखों की तादाद में कंडोम बिकते हैं। ये अपनी दुकाने चलने के लिए इस बेहयाई डे को प्रमोट करते है। अफ़सोस हमारी नई जनरेशन इसमें पड़ कर अपनी मुस्तकबिल के साथ खेल रही है।
आज झूठी मोहब्बत की जाल में फंस कर लडकियां हवस का शिकार होती हैं फिर अपनी गलती और गुनाह को छुपाने के लिए और अनचाही प्रेगनेंसी से बचने के लिए वह इन ज़हर जैसी "गोलियों को निगल जाती हैं जिसका न कम्पोजीशन पता होता है न कांसेप्ट…" ये गोलियां जहर से भी ज्यादा घातक है जो आने वाली ज़िंदगी के सुनहरे सपनों को खा जाता है।
इस बात पर संजीदगी से गौर करने की जरुरत है कि इन दवाईयों में आर्सेनिक भरा होता है यह 72 घंटो के अंदर सिर्फ बनने वाले भ्रूण को खत्म नही करता बल्कि प्रजनन क्षमता को ही नष्ट करने लगता है।
सच्चा मर्द ज़िना नहीं निकाह करता है।
एक सच्चा मर्द कभी भी निकाह से पहले ज़िना की ख्वाइश ज़ाहिर नहीं करता, ज़िना करना तो दूर की बात है। उसके नज़दीक रिश्ते में पाकदामनी अहमियत रखती है।
मेरी बहनों आप का दिल ये कैसे गवारा कर लेता है कि कोई गैर मर्द आप को देखे, आप को छुए, आप को इस्तेमाल करे और जब उसका मन भर जाए तो आप को टिशू पेपर की तरह फेक दे।
जो मर्द आपसे ज़िना की ख्वाइश ज़ाहिर करे तो समझ लें उसे आप से नहीं बल्कि आपके जिस्म से मुहब्बत है, जिसे हासिल करने के बाद आपकी तरफ मुड़ कर भी नहीं देखेगा। ये एक तल्ख़ हकीकत है, हर लड़की अपने महबूब की मुहब्बत पर नाज़ करती है पर प्यार में इतने अंधे भी न हो जाये के दिमाग का इस्तेमाल भी न सकें और सामने वाला आपकी ज़िन्दगी तबाह ओ बर्बाद करके चला जाये।
मर्द की ये फितरत है कि औरत को कमज़ोर समझ कर दस्तक देता है और मुख्तलिफ तरीकों से उसके जिस्म तक पहुंच ने के लिय औरत के हुस्न की तारीफ़ करता है लेकीन औरत की समझदारी और परहेजगारी ऐसी होनी चाहिए कि किसी भी गैर मेहरम के लिए दिल का दरवाज़ा न खोले, उसे चाहिए कि वो अपने जज़्बातों पर काबू रखे, अल्लाह से डरे, अपने वालदेन की इज्ज़त का ख्याल रखें।
आपकी दीनी बहन
फ़िरोज़ा
1 टिप्पणियाँ
बहुत खूब
जवाब देंहटाएंकृपया कमेंट बॉक्स में कोई भी स्पैम लिंक न डालें।