Secularism (Dharmnirpechta), Islam Aur Aaj Ka Musalman

Secularism (Dharmnirpechta), Islam Aur Aaj Ka Musalman


सेकुलरिज्म, इस्लाम और मुसलमान


सेक्युलरिज्म का चस्का भी बड़ा कमाल का होता है, ऐसे लोग खुद को इंसानियत का मसीहा मानते हैं, इन्हें इस्लाम का वो आईना दिखाया गया है जहां से ये दीन के रास्ते पर चलने वाले लोग इन्हें जाहिल और गवार नज़र आते हैं

ये बात खास तौर पर देखी जा सकती है की अक्सर मॉर्डन पढ़े-लिखे मुसलमान जिनके दिमाग में सेक्युलरिज्म का कीड़ा जड़ जमाए हुए है वो दीनी पोस्ट को और मुख्य रूप से कुरान और हदीस को स्क्रॉल डाउन कर देते हैं, उनकी नज़र में दीनी पोस्ट करने वाले मुस्लिम्स कट्टर होते हैं।


अब आइए सेकुलरिज्म का  माने जान लें लेंसेक्युलर शब्द जो इजाद किया गया है वो मुसलमानो को दीन‌ इस्लाम से दूरी के लिए ही किया गया है। यही नहीं फेमिनिज्म, और लिबरलिज्म का ईजाद भी इसी कड़ी में हुआ ताकि इस्लाम की जड़ों में सेंध लगाया जाए।

पश्चिमी देशों ने इस पर बहुत मेहनत की है और समाज को बिगाड़ने फैमली सिस्टम को ख़तम करने इस्लामी शरीयत के खिलाफ़  कई काम को क़ानूनी मान्यता दिया  और आप देख सकते हैं अब ये कानून भारत मे भी धीरे धीरे लागू किये जा रहे हैं जैसे समलैंगिक को अपराध ना मानकर मान्यता देना बिना शादी के लिव इन रिलेशन शिप मे लड़का लड़की का रहना वैश्यावृति को सेक्स वर्कर मानकर अपराध की श्रेणी से बाहर करना जैसे कई बुरे काम को भारत मे भी क़ानूनी मान्यता दी जा रही है।

तागूत का ये दोगलापन रहा है कि जिन कामों को करने से इस्लाम मना करता है वही काम किया जाए ताकि समाज में बेहयाई फैले, आज जिस तरह की फिल्में , ड्रामे और ऐड आ रहे हैं ये सब इस्लाम के खिलाफ़ है।


इस हदीस पर गौर कीजिए, नबी ए पाक मुहम्मद (ﷺ)ने इरशाद फर्माया: 

"अनकरीब एक ज़माना ऐसा आयेगा की कुफर और बातिल की जामात तुमको खत्म करने के लिये आपस में एक दुसरे को बुला के इस तरह जामा हो जायेंगे  जैसे खाने वाले प्याले को घेर लेते है । 

एक सहाबा रजि० ने कहा: ऐ अल्लाह के नबी! क्या हम लोग उस रोज तादाद में कम होंगे?

आप (ﷺ)  ने कहा: "नही, तुम्हारी तादात उस रोज बहुत होगी मगर घास के उन तिनकों की तरह होगी जिनको पानी का  सैलाब बहा कर ले जाता है।"

एक सहबा रजि ० ने कहा: ऐसा, या रसूल अल्लाह ﷺ ऐसा क्यों होगा ?

आप ﷺ ने फर्माया: "दुनिया की मुहब्बत और मौत से नफरत करने लगोगे।"

[सुन्नन अबी दावूद -4297]


आज वही दौर शुरू है, सेकुलरिज्म का मतलब होता है धर्मनिरपेक्षता यानी धर्म के लिए अपेक्षित ना होना।

अब खुद का विश्लेषण करें, क्या आप धर्म के लिए अपेक्षित नहीं हैं?

क्या आप को लगाता है कि ये दुनियां कि जिंदगी आप के लिए काफ़ी है?

क्या चंद लोगों को वक्ति तौर पर खुश रखने और चंद दुनियावी फ़ायदे के लिए अल्लाह के कानून को पिछे नहीं कर रहे हैं?


थोड़ा कड़वा है मगर हकीकत है।

इन कड़वे सवालों के जबाब अपने मन से ढूढने की कोशिश करें।

सेक्युलर का कतई ये मतलब नहीं कि आप मस्जिद आकर नमाज़ पढ़े और हम मंदिर में जा कर पूजा करें।

जैसा कि आज कल देखने को मिल रहा है बल्कि सेक्युलर का मतलब है चैन से जियो और जीने दो एक दूसरे के लिये दिल में नफरत न रखो।

अल्लाह ताला ने इसी को कुरान में कुछ इस तरह बयान फरमाया है:

لَکُمۡ دِیۡنُکُمۡ وَلِیَ دِیۡنِ
"तुम्हारे लिये तुम्हारा दीन है और मेरे लिये मेरा दीन।"
[क़ुरान 109:6]


सबसे पहले हमें इस दुनियां में आने का मकसद पता होना चाहिए और मकसद ये है कि हम अल्लाह सुभान हू ताला से मुहब्ब्त करें और इबादत करें हर हाल में अल्लाह को राज़ी करें।  ये बहुत बड़ा मौका है,दुनियां धोखा भी है और मौका भी है अब ये हमारे ऊपर है कि हम इस मौके से फ़ायदा उठाते हैं या धोखा खा जाते हैं।


दुनियां की जिंदगी चलती हुई ट्रेन की मानिंद है जिसमें आने जानें वाले लोग तीन तरह के होते हैं-

1. वो लोग जो ट्रेन में सफ़र करने वालों को अल बिदा कह रहे होते हैं, इनकी जिंदगी का कोई ख़ास मकसद नहीं, ऐसे लोग दूसरे को खुश करने में अपनी जिंदगी बिता देते हैं।

2. दूसरे वो लोग जो ट्रेन को रोकना चाहते हैं उनका मकसद लोगों को हक से मोड़ देना होता है.. 

मिसाल के तौर पर अबु लहब, फिरौन, कारून और हमान। जैसे कुफ्फार और मुशरिकीन ए मक्का थे जो अल्लाह के नबी ﷺ को रोक देना चाहते थे। तभी तो आप ﷺ और उनके साथियों को इतनी अजीयते और तकलीफें दिया करते थे उनका एक ही एजेंडा था कि आप ﷺ को आप के मकसद से फेर दें। आज वही लोग लिबरल, सेक्युलर, फेमिनिज्म और atheism के रूप में मौजुद हैं जो मुसलमानो को दीन से दूर कर देना चाहते हैं।

मगर अल्लाह का दीन तो गालिब होकर रहेगा चाहे तुम चाहो या ना चाहो।

3. तीसरे वो लोग हैं जो हर हाल में हक पर डटे रहते हैं उनके इरादे को कोई बदल नहीं सकता। इसकी सबसे बड़ी मिशाल हमारे नबीﷺ थे दीन के लिए कितनी तकलीफें उठाई।

सहाबा परेशान हो गए ख्वावाम रजी० कहा या रसूल अल्लाह ﷺ इतनी तकलीफें दे रहे हैं वो लोग या अल्लाह के रसूल कब तक?


आप ﷺ को अल्लाह यकीन था आप ने फ़रमाया ऐ ख्वाम रजी० पिछली कौमों और उम्मतों को जमीन में गाड़ कर उनके जिस्मों को लोहे कि आरियो से अलग कर दिया गया उन्होंने कभी शिकायत नहीं की बल्कि सबर करते रहे और जान लो कि मै जो दीन लेकर आया हूं वो हर घर में दाखिल होकर रहेगा।


नबी करीम ﷺ ने फरमाया, "अल्लाह रुए जमीं के हर शहर  व बस्ती के हर घर में कलमा इस्लाम दाखिल फरमा देगा, चाहे कोई इसे इज़्जत के साथ कबूल करे या जिल्लत के साथ जिंदा रहे ,वह लोग जिन्हें अल्लाह इज़्जत अता फरमाएगा तो वह उनको इसका अहल (मुहाफिज) बना देगा या उन को जलील कर देगा तो वह उसकी इताअत अख़्तियार कर लेंगे।" मिश्कत उल मसाबीह-42 


इस्लाम एक अल्लाह का दीन है इस दीन को follow करना हम सब का फर्ज़ है। अगर आप इस्लाम के रास्ते पर नहीं चलते तो ये शदीद अफसोस की बात है आप ने इस्लाम को सही से पढ़ा ही नहीं है।

आप गफलत की सहरावों में भटक रहे हैं, आप को किसी ने मिसगाइड किया है। आप सिर्फ़ नाम के मुसलमान है।

मेरे अजीज़ भाई और बहनों अपने मकशद को पहचानें अल्लाह के रास्ते पर चलने की कोशिश करें।

कुछ नहीं तो जो लोग अल्लाह के काम में लगे हुए हैं उनको सपोर्ट करें चाहे जिस भी तरीके से हो सके, जिस भी चीज़ से अल्लाह ने आप को नवाजा है जान, माल या हुनर। जितना बन सके उतना करें।


कयामत में अल्लाह ताला सवाल करेगा, "मैंने तुम्हें जो सलाहियतें दी थी, उसमें तूने दीन के लिए क्या किया?

क्या जवाब देगें हम?

ऐसा लगाता है हम आज किसी भीड़ का हिस्सा बनते जा रहे हैं हमारे नाम तो मुसलमान हैं, सलाहुद्दीन, अली, मुहम्मद, उमर, अब्दुल्ला, मगर क़िरदार में कहीं से भी नज़र नहीं आता। 

हमारे दिल को बीमारी ने जकड़ लिया है, जिसे अल वहन कहते हैं। 

इस बीमारी में इंसान दुनियां से मुहब्बत और मौत से नफ़रत करने लगाता है।

जब कि मौत हक है।

کُلُّ نَفْسِِ ذائِقَۃُ الْمَوْت

"हर नफ़्स को मौत का मज़ा चखना है"

अल्लाह शिर्क / बिदअत से हमारी और तमाम अहले ईमान की हिफाजत फरमाये। 

दुनिया में चाहे जितनी परेशानियाँ हमारे ऊपर आए मगर अल्लाह हमें साबित कदम रखे, 

जब तक हम जिंदा रहें अल्लाह हमें इस्लाम पर जिंदा रखे,

तौहीद पर कायम रहें और  हमारा खात्मा हो तो ईमान पर ही हो।

आमीन या रब्बुल आलमीन 



आपकी दीनी बहन
फिरोजा खान


एक टिप्पणी भेजें

2 टिप्पणियाँ

  1. माशाअल्लाह बहन बहुत ही बेहतरीन पोस्ट कि पढ़कर दिल रुवानी आ गई!!

    जवाब देंहटाएं
  2. Ma sha Allah dini bahen behatreen islah Allah aap ko jajaye khair de din aur duniya dono me
    Allah aap ko sahi salamat rakhe apne panah me rakhe har Bala wa musibato se mahefuj rakhe din doguna rat chaoguna tarakki de din aur duniya dono me

    जवाब देंहटाएं

कृपया कमेंट बॉक्स में कोई भी स्पैम लिंक न डालें।

क्या आपको कोई संदेह/doubt/शक है? हमारे साथ व्हाट्सएप पर चैट करें।
अस्सलामु अलैकुम, हम आपकी किस तरह से मदद कर सकते हैं? ...
चैट शुरू करने के लिए यहाँ क्लिक करें।...