औरत क़ी इमामत
फराइज़ और नवाफील मे औरत इमामत करा सकती है सफ के बीच मे खड़ी होगी-
रईताता अल हंफिया बयान करती हैं,
أَمَّتْنَا عَائِشَةُ فَقَامَتْ بَيْنَهُنَّ ف الصَّلَاةِ الْمَكْتُوبَةِ
"हमें आयशा रज़ि अन्हा ने सफ के बीच मे खड़े होकर फ़र्ज़ नमाज़ क़ी इमामत कराई।"
[सुनन दरक़ुतनी 1507 सहीह सनद]
इमाम नववी ने इसकी सनद को सहीह कहा है।
[खुलासातुल एहकाम 2/680]
इमाम अहमद बिन हंबल, इमाम शाफई, इमाम इसहाक बिन राहुवे और हाफ़िज़ इब्ने हजम रहिमल्लाह अजमाइन औरत क़ी इमामत के जाएज़ होने के क़ायल हैं।
मौलाना अब्दुल हई लखनवी लिखते हैं-
यही वजह है कि औरत सफ के दरमियान खड़ी होकर ममनु का इर्तिकाब करेंगी इसका ज़ोफ मखफी नहीं बल्कि इन सारी की सारी वजह का ज़इफ होना मखफी नहीं जो औरत क़ी इमामत के मकरू होने के हवाले से बयान क़ी जाती है जैसा के हमने तोहफातुल नेबुला मे इसकी तहक़ीक़ बयान कर दी है हमने ये रिसाला औरतों क़ी जमात के मसले मे लिखा है हमने इसमें ज़िक्र किया है क़ी हक़ ये है औरत क़ी इमामत मकरूह नहीं है।
[उमदत उर रियायह 1/153]
औरत सिर्फ़ औरतों की जमात की इमामत करा सकती है सफ के बीच मे खड़ी होकर।
आपका दीनी भाई
मुहम्मद रज़ा
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