Namaziyon Ki Aam Ghalatiyan Aur Unki Islaah (Part-3)

Namaziyon Ki Aam Ghalatiyan Aur Unki Islaah (Part-3)

नमाज़ियों की आम गलतियाँ और उनकी इस्लाह

पार्ट-3

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम...

[9] ज़बान से नमाज़ की नियत करना:

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ: أَنَّ النَّبِيَّ ﷺ دَخَلَ الْمَسْجِدَ، فَدَخَلَ رَجُلٌ، فَصَلَّى، ثُمَّ جَاءَ، فَسَلَّمَ عَلَى النَّبِيِّ ﷺ فَرَدَّ النَّبِيُّ ﷺ عَلَيْهِ السَّلَامَ، فَقَالَ: «ارْجِعْ فَصَلّْ فَإِنَّكَ لَمْ تُصَلِّ»، فَصَلَّى، ثُمَّ جَاءَ، فَسَلَّمَ عَلَى النَّبِيِّ ﷺ فَقَالَ: «ارْجِعْ فَصَلّْ فَإِنَّكَ لَمْ تُصَلِّ» ثَلَاثًا، فَقَالَ: وَالَّذِي بَعَثَكَ بِالْحَقِّ، فَمَا أُحْسِنُ غَيْرَهُ، فَعَلَّمْنِي، فَقَالَ: «إِذَا قُمْتَ إِلَى الصَّلَاةِ، فَكَبِّرْ...» فذكر الحديث

हज़रत अबू हुरैरह ؓ से रिवायत है, फ़रमाते हैं: "कि नबी करीम ﷺ मस्जिद में दाखिल हुए। एक और शख्स भी मस्जिद में आया। उस ने नमाज पढ़ी और आप ﷺ की खिदमत में हाजिर हुआ। उस ने आप ﷺ को सलाम किया तो आप ﷺ ने उसके सलाम का जवाब दिया और फरमाया: वापस जाओ और दोबारा नमाज अदा करो क्योंकि तुमने नमाज नहीं पढ़ी। तीन मर्तबा ऐसा ही हुआ (चौथी बार) उस शख्स ने कहा: उस जात की कसम जिस ने आपको हक के साथ भेजा है, मैं इससे अच्छी नमाज नहीं पढ़ सकता। आप ही मुझे सिखा दीजिए। इस पर आप ﷺ ने फरमाया: जब तुम नमाज के लिए खड़े हो तो तकबीर कहो। (फिर इसके बाद पूरा वाकिया है।)" (बुख़ारी: अल-अज़ान 793, मुस्लिम: अस-सलाह 45 - (397))

★ नमाज़ शुरू करते वक्त जुबान से नीयत के अल्फाज़ (जैसे: "नवैतु अन उसल्ली...") कहना साबित नहीं है।
★ नमाज़ की असल नीयत दिल का इरादा है, और जब इंसान तकबीर-ए-तहरीमा कहे तो वही नीयत शुमार होती है।


[10] तंग लिबास में नमाज़ पढ़ना:

قَالَ تعالى: يَابَنِي آدَمَ خُذُوا زِينَتَكُمْ عِنْدَ كُلِّ مَسْجِدٍ [الأعراب: ٣١]

अल्लाह तआला ने फ़रमाया: "ऐ बनी आदम, हर नमाज के वक्त अपने आपको (लिबास से) आराजता कर लिया करो।" (अल-अ'राफ़: 31)

قال ابن حجر: ونقل بن حجر الاتفاق على أن المراد ستر العورة

इब्ने हजर रहिमहुल्लाह फरमाते हैं: "इब्ने हज़्म ने इस बात पर इत्तेफाक नकल किया है कि इस आयत में (जीनत से) मुराद सित्र का ढांपना है।" (फ़त्हुल बारी लि-इब्न हजर, 1/465)

قَالَ ﷺ: مَا بَيْنَ السُّرَّةِ وَالرُّكْبَةِ عَوْرَةٌ (١)

अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: "नाफ और घुटनों के दरमियान का हिस्सा औरत (यानी छुपाने की चीज) है।” (हाकिम) अन अब्दुल्लाह बिन जाफर - [सहीह अल-जामी: 5583] (हसन)

★ नमाज़ के दौरान बदन का कम-से-कम छुपाने वाला हिस्सा (सित्र) यानी मर्दों के लिए नाफ से घुटने तक का हिस्सा पूरी तरह ढका होना लाज़िम है।
★ तंग या चुस्त कपड़ों की वजह से बदन का उभार ज़ाहिर हो, ऐसे लिबास में नमाज़ मकरूह हो जाती है।


[11] एहराम में इज़तिबा की हालत में नमाज़ पढ़ना:

قَالَ ﷺ: لَا يُصَلِّي أَحَدُكُمْ فِي الثَّوْبِ الْوَاحِدِ لَيْسَ عَلَى عَاتِقَيْهِ شَيْءٌ

अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: "तुम में से कोई शख्स एक कपड़े में इस हाल में नमाज न पढ़े कि उसके कंधों पर (ढांपने के लिए) कुछ भी न हो।" (बुख़ारी: अस-सलाह 359, मुस्लिम: अस-सलाह 277 - (516)) - अन अबू हुरैरह

★ एक ही चादर या कपड़े में इस तरह नमाज़ पढ़ना कि दोनों कंधे बिल्कुल खुले हों और उन पर कोई कपड़ा न हो, मना है।
★ कम-से-कम एक हिस्सा कंधे पर भी होना चाहिए या चादर को कंधों पर डालकर नमाज़ अदा करें।


[12] तस्वीर वाले लिबास या चीज़ में नमाज़ पढ़ना:

عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا: أَنَّهَا اشْتَرَتْ نُمْرَةً فِيهَا تَصَاوِيرُ، فَقَامَ النَّبِيُّ ﷺ بِالْبَابِ فَلَمْ يَدْخُلْ، فَقُلْتُ: أَتُوبُ إِلَى اللَّهِ مِمَّا أَذَبْتُ؟ قَالَ: «مَا هَذِهِ النُّمْرَةُ؟» قُلْتُ: لِتَجْلِسَ عَلَيْهَا وَتَوْسِدَهَا! قَالَ: «إِنَّ أَصْحَابَ هَذِهِ الصُّوَرِ يُعَذَّبُونَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ، وَيُقَالُ لَهُمْ: أَحْيُوا مَا خَلَقْتُمْ، وَإِنَّ الْمَلَائِكَةَ لَا تَدْخُلُ بَيْتًا فِيهِ الصُّوَرُ»

हज़रत आयशा ؓ से रिवायत है: "उन्होंने नबी करीम ﷺ के लिए एक छोटा सा तकिया खरीदा जिस पर तस्वीर बनी हुई थी। जब नबी करीम ﷺ تشریف لائے तो आप दरवाजे पर ही रुक गए और अंदर घर में दाखिल न हुए। हज़रत आयशा ؓ ने अर्ज की: (ऐ अल्लाह के रसूल,) मैं अल्लाह के हुजूर तौबा करती हूं, मुझ से क्या गलती हो गई? आप ﷺ ने फरमाया: इन तस्वीर वालों को कयामत के दिन अजाब दिया जाएगा। उनसे कहा जाएगा अपनी बनाई हुई तस्वीरों को अब जिंदा भी करके दिखा दो! और फरिश्ते उस घर में दाखिल नहीं होते जिसमें (किसी जानदार की) तस्वीर हो।" (बुख़ारी: अल-लिबास 5957, मुस्लिम: अल-लिबास व अज़-जीना 3941)

عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ: قَامَ رَسُولُ اللَّهِ ﷺ يُصَلِّي فِي خَمِيصَةٍ ذَاتِ أَعْلَامٍ، فَنَظَرَ إِلَى أَعْلَامِهَا فَلَمَّا قَضَى صَلَاتَهُ قَالَ: «اذْهَبُوا بِخَمِيصَتِي هَذِهِ إِلَى أَبِي جَهْمِ بْنِ حُذَيْفَةَ وَأْتُونِي بِأَنْبِجَانِيَّتِهِ، فَإِنَّهَا أَلْهَتْنِي آنِفًا فِي صَلَاتِي»

हज़रत आयशा ؓ से रिवायत है, फ़रमाती हैं: "अल्लाह के रसूल ﷺ खड़े हुए और नमाज़ पढ़ने लगे। आप ने एक ऐसा कुर्ता पहन रखा था जिसमें नक्श ओ निगार बने हुए थे। आप की निगाह उन नुकूश पर पड़ी। जब आप नमाज़ से फ़ारिग हुए तो आप ने फ़रमाया: ये कुर्ता अबू जहम बिन हुज़ैफ़ा के पास ले जाओ, और उनके पास से मेरे लिए उन का सादा कुर्ता ले आओ। इस लिए कि इन नुकूश ने मुझे नमाज़ में अपनी तरफ़ मशगूल कर दिया।" (बुख़ारी: अस-सलाह 373, मुस्लिम: अल-मसाजिद व मवाक़िउस-सलाह 62 - (556)) - वल-लफ़्ज़ु लि-मुस्लिम

★ ऐसे कपड़े पहन कर नमाज़ पढ़ने से बचें जिस पर ज़्यादा नक्श-ओ-निगार या बेल-बूटे बने हों।
★ इन डिज़ाइनों की वजह से नमाज़ के दौरान ध्यान भटकता है और ख़ुशू-ओ-ख़ुज़ू में ख़लल पड़ता है।


By Team Islamic Theology

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