नमाज़ियों की आम गलतियाँ और उनकी इस्लाह
पार्ट-2
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम...
[5] हवा ख़ारिज होने के बावजूद नमाज़ पढ़ना:
قَالَ ﷺ: لَا يَقْبَلُ اللَّهُ صَلَاةَ أَحَدِكُمْ إِذَا أَحْدَثَ حَتَّى يَتَوَضَّأَ
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: "तुम में से किसी का वज़ू टूट जाए तो अल्लाह तआला उसकी नमाज़ उस वक़्त तक क़बूल नहीं करता जब तक कि वो दोबारा वज़ू न कर ले।" (बुख़ारी: 6954 - मुस्लिम: अल-तहारह 330) - अन अबू हुरैरह
قَالَ ﷺ: وَلَا يُحَافِظُ عَلَى الْوُضُوءِ إِلَّا مُؤْمِنٌ
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: "वज़ू की पाबंदी मोमिन ही करता है।" (मुसनद अहमद, इब्न माजह, हाकिम, बैहक़ी) - अन थौबान (इब्न माजह, तबरानी) - अन इब्न अम्र (तबरानी) - अन सलमा बिन अल-अकवा [सहीह अल-जामी: 952] (सहीह)
★ जब भी वज़ू टूट जाए, नमाज़ के लिए अज़-सर-ए-नौ (नए सिरे से) वज़ू करना लाज़िम है।
[6] बदबूदार चीज़ खाकर मस्जिद में आना:
قَالَ ﷺ: مَنْ أَكَلَ مِنْ هَذِهِ الشَّجَرَةِ فَلَا يَقْرَبَنَّ مَسْجِدَنَا وَلَا يُؤْذِيَنَّا بِرِيحِ الثَّومِ
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: "जो शख़्स इस (बदबूदार) पौधे से कुछ खा ले वो हमारी मस्जिद के क़रीब भी न आए, और हमें लहसुन की बू से तकलीफ़ न दे।" (मुस्लिम: अल-मसाजिद व मवाक़िउस-सलाह 71 - (562))
وَفِي رِوَايَةٍ: فَإِنَّ الْمَلَائِكَةَ تَتَأَذَّى مِمَّا يَتَأَذَّى مِنْهُ الْإِنْسُ
एक रिवायत में है: "इसलिए कि फ़रिश्तों को भी उस चीज़ से तकलीफ़ होती है जिससे लोगों को तकलीफ़ होती है।" (मुस्लिम: अल-मसाजिद व मवाक़िउस-सलाह 72 - (563))
★ मुँह की बदबू से नमाज़ियों और फ़रिश्तों दोनों को कोफ़्त व तकलीफ़ होती है, इसलिए मुँह साफ़ करके ही मस्जिद में दाख़िल हों।
[7] तहिय्यतुल मस्जिद अदा किए बग़ैर मस्जिद में बैठना:
عَنْ أَبِي قَتَادَةَ صَاحِبِ رَسُولِ اللَّهِ ﷺ قَالَ:
دَخَلْتُ الْمَسْجِدَ وَرَسُولُ اللَّهِ ﷺ جَالِسٌ بَيْنَ ظَهْرَانَيِ النَّاسِ قَالَ فَجَلَسْتُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ ﷺ:
مَا مَنَعَكَ أَنْ تَرْكَعَ رَكْعَتَيْنِ قَبْلَ أَنْ تَجْلِسَ
قَالَ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ، رَأَيْتُكَ جَالِسًا وَالنَّاسُ جُلُوسٌ
قَالَ: فَإِذَا دَخَلَ أَحَدُكُمُ الْمَسْجِدَ فَلَا يَجْلِسْ حَتَّى يَرْكَعَ رَكْعَتَيْنِ
هَذَا لَفْظُ مُسْلِمٍ, وَلِلْبُخَارِيِّ:
فَلَا يَجْلِسْ حَتَّى يُصَلِّيَ رَكْعَتَيْنِ
साहाबी-ए-रसूल हज़रत अबू क़तादा ؓ से रिवायत है, फ़रमाते हैं: "मैं मस्जिद में दाख़िल हुआ तो अल्लाह के रसूल ﷺ लोगों के साथ बैठे हुए थे। पस मैं भी जाकर बैठ गया। अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: तुम ने बैठने से पहले दो रकअत क्यों अदा नहीं कीं? मैंने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल ﷺ, मैंने देखा कि आप और सारे लोग बैठे हुए हैं (तो मैं भी आकर बैठ गया)। आप ﷺ ने फ़रमाया: जब तुम में से कोई शख़्स मस्जिद में दाख़िल हो तो वो दो रकअत अदा करने से पहले हरगिज़ न बैठे।" (बुख़ारी: अत-तहज्जुद 1163 - मुस्लिम: सलातुल मुसाफ़िरीन व क़स्रुहा 70 - (714))
★ बग़ैर किसी उज़र (वजह) के मस्जिद में आते ही सीधा बैठ जाने से परहेज़ करें।
[8] नमाज़ के लिए दौड़कर आना:
قَالَ ﷺ: إِذَا أُقِيمَتِ الصَّلَاةُ فَلَا تَأْتُوهَا تَسْعَوْنَ وَأْتُوهَا تَمْشُونَ وَعَلَيْكُمُ السَّكِينَةُ فَمَا أَدْرَكْتُمْ فَصَلُّوا، وَمَا فَاتَكُمْ فَأَتِمُّوا
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: "जब जमाअत खड़ी हो जाए, तो नमाज़ के लिए दौड़ते हुए मत आओ बल्कि चलते हुए सुकून ओ वक़ार से आओ। फिर जितनी नमाज़ मिल जाए अदा करो और जो रह गई उसे मुकम्मल करो।" (बुख़ारी: अल-जमुआ 908 - मुस्लिम: अल-मसाजिद व मवाक़िउस-सलाह 151 - (602)) - अन अबू हुरैरह
★ हमेशा वक़ार, तमकीनत और इत्मीनान के साथ चलकर आएं ताकि नमाज़ में ख़ुशू ओ ख़ुज़ू क़ाइम रहे।
By Team Islamic Theology

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