Seerat Ali bin Abi Talib RaziAllahu Anhu (Tahreer No. 11)

Seerat Ali bin Abi Talib RaziAllahu Anhu

सीरत-ए सय्यदना अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु

[तहरीर नंबर 11]


13. आले रसूल ﷺ के लिये मख़्स़ूस़ अह़काम

i. माले ज़कात खाने की ह़ुर्मत: अ़ब्दुल मुत़्तलिब बिन रबीआ़ रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी अकरम ﷺ ने फ़र्माया: आले मुह़म्मद के लिये सदक़ा का माल खाना जाइज़ नहीं है, यह लोगों का मैल कुचैल है। [सहीह मुस्लिम: 1072]


ii. आले मुह़म्मद रसूलुल्लाह ﷺ की विरासत के ह़क़दार नहीं: सय्यदना अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़र्माया: हम अम्बिया अपने माल का वारिस नहीं बनाते, हमने जो भी छोड़ा सदक़ा है। [सहीह बुख़ारी, हदीस: 3093, सहीह मुस्लिम: 1757]

इस हदीस को अबूबक्र, उ़मर, उ़स्मान, अ़ली, त़लह़ा, ज़ुबेर, सअ़द, अ़बदुर्रहमान बिन औफ़, अ़ब्बास बिन अ़ब्दुल मुत़्तलिब, अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हुमा और अज़्वाजे मुताह़रात रज़ियल्लाहु अन्हा ने रिवायत किया है और यह हदीस कुतुबे स़िह़ाह़ व मसानीद में मौजूद हैं। [मिन्हाजुस्सुन्ना: 4/195, अल बिदाया वन् निहाया: 5/252]

माले ग़नीमत (जो माल काफ़िरो से उन पर लड़ाई में फ़तह व गल्बा होने के बाद मिले उसे कहते हैं। और माले फ़ै (जो माल बगैर लड़ाई के कुफ़्फ़ार से हासिल हुआ उसे फ़ै कहते हैं। उसके पाँचवें हिस्से के मुस्तह़िक़ हैं: माले ग़नीमत के मुताल्लिक़ अल्लाह तआ़ला का इर्शाद है:

وَ اعْلَمُوا أَنَّمَا غَنِمْتُمْ مِّنْ شَيْءٍ فَأَنَّ لِلَّهِ خُمُسَهُ وَ لِلرَّسُولِ وَ لِذِي الْقُرْبَى وَالْيَتَنى وَ الْمَسْكِينِ وَ ابْنِ السَّبِيلِ اِنْ كُنْتُمْ أمَنْتُمْ بِاللهِ وَمَا أَنْزَلْنَا عَلَى عَبْدِنَا يَوْمَ الْفُرْقَانِ  يَوْمَ الْتَقَى الْجَمْعَنِ وَاللَّهُ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ

और जान लो कि बेशक तुम जो कुछ भी ग़नीमत हासिल करो तो बेशक उसका पाँचवाँ हिस्सा अल्लाह के लिये और रसूल के लिये और क़राबतदार और यतीमों ओर मिस्कीनों और मुसाफ़िर के लिये है, अगर तुम अल्लाह पर और उस चीज़ पर ईमान लाए हो जो हमने अपने बन्दे पर फ़ैसले के दिन नाज़िल की, जिस दिन दो जमाअ़तें मुक़ाबिल हुईं और अल्लाह हर चीज़ पर पूरी कुदरत रखने वाला है। [सूरह अन्फ़ाल: 41]

और माले फ़ै के बारे में फ़र्माया:

مَا أَفَاءَ اللهُ عَلَى رَسُولِهِ مِنْ أَهْلِ الْقُرَى فَلِلَّهِ وَلِلرَّسُولِ وَ لِذِي الْقُرْبَى وَالْيَتَى وَ لا الْمَسْكِينِ وَ ابْنِ السَّبِيلِ لَى لَا يَكُونَ دُولَةً بَيْنَ الْأَغْنِيَاءِ مِنْكُمْ وَمَا أَتَكُمُ الرَّسُولُ فَخُذُوهُ وَمَا نَهُكُمْ عَنْهُ فَانْتَهُوا وَاتَّقُوا اللَّهَ إِنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ

जो कुछ भी अल्लाह ने इन बस्तियों वालों से अपने रसूल पर लौटाया तो वोह अल्लाह के लिये और रसूल के लिये और क़राबतदार और यतीमों और मिस्कीनों और मुसाफ़िर के लिये है, ताकि वोह तुममें से मालदारों के दरम्यान ही गर्दिश करने वाला न हो और रसूल तुम्हें जो कुछ दे तो वोह ले लो और जिससे तुम्हें रोक दे तो रुक जाओ और अल्लाह से डरो, यक़ीनन अल्लाह बहुत सख़्त सज़ा देने वाला है। [सूरह हश्र: 7]


iii. नबी करीम ﷺ के साथ इन्हें भी दुरूद में शामिल करना: कअ़ब बिन अ़ज्रा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि हमने रसूलुल्लाह ﷺ से पूछा कि ऐ अल्लाह के रसूल! आपके अहले बैत पर हम कैसे दुरूद भेजें ? क्योंकि सलाम की कैफ़ियत तो हमें अल्लाह ने सीखा दिया है। आप ﷺ ने फ़र्माया:

कहो, ऐ अल्लाह ! रहमत भेज मुहम्मद ﷺ और आले मुहम्मद पर जिस तरह तूने रहमत भेजी है इब्राहीम अलैहिस्सलाम और आले इब्राहीम अलैहिस्सलाम पर। तू बहुत तारीफ़ किया गया बुजुर्गवार है। ऐ अल्लाह! बरकत नाज़िल कर मुहम्मद ﷺ और आले मुहम्मद पर जिस तरह बरकत नाज़िल किया है इब्राहीम अलैहिस्सलाम और व आले इब्राहीम पर तू बहुत तारीफ़ किया हुआ बुज़ुर्गवार है। [सहीह बुखारी: 3370; सहीह मुस्लिमः 406]


iv. वो ख़ुस़ूस़ी अक़ीदत व मुहब्बत के मुस्तहिक़ हैं: सय्यदना ज़ैद बिन अरक़म रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत करते हैं कि आपने फ़र्माया: मैं अपने अहले बैत के बारे में तुम्हें अल्लाह से डरते रहने की तल्क़ीन करता हूँ, मैं अपने अहले बैत के बारे में तुम्हें अल्लाह से डरते रहने की तल्क़ीन करता हूँ। मैं अपने अहले बैत के बारे में तुम्हें अल्लाह से डरते रहने की तल्क़ीन करता हूँ। [सहीह मुस्लिम: 2408]

इमाम क़ुर्तुबी रहमतुल्लाह अलैह‌ इस हदीस की तशरीह़ में लिखते हैं कि इस वस़िय्यते नबवी और आप ﷺ की बार बार ताकीद का वाजबी तक़ाज़ा है कि आप ﷺ के अहले बेत से मुह़ब्बत और उनकी तौक़ीर की जाए, बल्कि यह एक फ़र्ज़ है जिसे छोड़ने वाले के लिये कोई उ़ज़्र क़ाबिले क़बूल नहीं है। [फै़ज़ुल क़दीर/अल्मनावी: 3/14] 

इस वस़िय्यते नबवी की अहमियत और तक़ाज़े को ख़लीफ़ए अव्वल अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने अच्छी तरह समझा, उनके अ़क़ीदतमंद रहे, उन्हें तक्रीमो ऐज़ाज़ से नवाज़ा और लोगों को भी इस बात की दावत दी। फ़र्माया कि मुहम्मद ﷺ के अहले बैत के हुक़ूक़ का ख़्याल रखो। [सहीह बुखारी: 3713] 

उनके हुकूक़ का ख़्याल रखने का मतलब यह है कि उन्हें किसी तरह तक्लीफ़ न दो और उनके साथ बदसुलूकी न करो। [फ़त्हुल्बारी: 7/97] 

इमाम नववी रहमतुल्लाह अलैह‌ कहते हैं कि उनका एह़तिराम करो और उनकी इज़्ज़त करो। आप ﷺ ने अली रज़ियल्लाहु अन्हु से उन हुकूक़ की पासदारी की ताकीद इन अल्फ़ाज़ मे की है: उस ज़ात की क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, बेशक रसूलुल्लाह ﷺ के अक़्रबा से सिलारहूमी करना मुझे इस बात से ज़्यादा महबूब है कि मैं अपने अक़रबा से सिलारहूमी करूँ। [सहीह बुख़ारी: 3712] 

पस अहले बैत से मुहब्बत करना अहले सुन्नत वल जमाअ़त की बुनियादी अक़ाइद में शामिल है।

अ़ल्लामा इब्ने तैमिया रहमतुल्लाह अलैह‌ फ़र्माते हैं: अहले सुन्नत वल जमाअ़त के अक़ाइद में यह बात शामिल है कि वोह नबी करीम ﷺ के अहले बैत से अक़ीदत रखते हैं और उनके बारे में वस़िय्यते नबवी की पूरी हिफ़ाज़त करते हैं। [मज्मूउ़ल् फ़तावा: 3/407]

क़ाज़ी ऐ़याज़ रहमतुल्लाह अलैह‌ फ़र्माते हैं, मुहब्बत नबवी ﷺ की अ़लामत यह है कि आप ﷺ ने जिससे मुहब्बत की है उससे मुहब्बत की जाए और जो आपसे क़राबतदारी के बाइस अहले बैत में से है और सहाबा में से है ख़्वाह मुहाजिरीन में से हों या अंस़ार में से उससे मुहब्बत की जाए। [अश्शिफ़ाउ: 2/573]

हाफ़िज़ इब्ने कसीर रहमतुल्लाह अलैह‌ का क़ौल है कि अहले बैत के साथ ह़ुस्न सुलूक और उनकी इज़्ज़तो तक्रीम के हम क़त़्अ़न मुंकिर नहीं क्योंकि ह़सबो नसब और मक़ामो मर्तबा के ऐतिबार से रूए ज़मीन पर बसने वालों में सबसे पाक और शरीफ़ तरीन घराने से इनका ताल्लुक़ है, ख़ास तौर से इनकी तक़्दीसो तक्रीम इसलिए भी बढ़ जाती हे कि वोह वाज़ेह़ और सही सुन्नते नबवी के पाबन्द थे और अपने अस्लाफ़ की तरफ मुकम्मल ह़क़ परस्त थे, जैसे कि अ़ब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु ओर उनकी औलाद, अ़ली ओर उनके अहले बैत और उनकी ज़ुर्रियत रज़ियल्लाहु अन्हु। [तफ़्सीरुल क़ुरआनुल अ़ज़ीम / इब्ने कसीर: 4/113]


सीरीज सीरते सय्यदना अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु तहरीर नंबर 11 आगे जारी है इंशाअल्लाह गुजारिश है इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। 

जज़ाकुमुल्लाहु ख़ैरन


Team Islamic Theology

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