सीरत-ए सय्यदना अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु
[तहरीर नंबर 06]
12. ह़दीस 'कसाअ' यानी ओढ़ाने वाली ह़दीस
ह़दीस 'कसाअ' यानी ओढ़ाने वाली ह़दीस [सहीह मुस्लिम: 2424], किताब फ़ज़ाइले स़ह़ाबा और अहले बैत का मफ़्हूम:
आ़इशा रज़ियल्लाहु अन्हा रिवायत करती हैं कि अल्लाह के रसूल ﷺ एक दिन सुबह के वक्त निकले, आप चादर ओढ़े हुए थे, आपने अ़ली, फ़ातिमा, ह़सन और ह़ुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु को चादर में ले लिया और कहा:
إِنَّمَا يُرِيدُ اللَّهُ لِيُذْهِبَ عَنْكُمُ الرِّجْسَ أَهْلَ الْبَيْتِ وَيُطَهِّرَكُمْ تَطْهِيرًا
अल्लाह तो यही चाहता है कि तुमसे गन्दगी दूर कर दे ऐ घरवालो ! और तुम्हें पाक कर दे, ख़ूब पाक करना। [अह़ज़ाब: 33 सहीह मुस्लिम: 2424; किताब फ़ज़ाइले स़ह़ाबा]
इस ह़दीस से उन लोगों की तर्दीद होती है जो सहाबा किराम रज़ियल्लाहु अन्हु पर यह तोहमत लगाते हैं कि वोह लोग फ़ज़ाइले अ़ली को छुपाते हैं, यहाँ अ़ली और फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा की फ़ज़ीलत व मन्क़बत को वही आ़इशा रज़ियल्लाहु अन्हा बयान कर रही हैं, जिन्हें ह़ाक़िदीन यह कहकर मत़्ऊ़न करते हैं कि वोह अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु से बुग़्ज़ रखती थीं।
अल्लाह तआ़ला का इर्शाद है:
يَأَيُّهَا النَّبِيُّ قُلْ لِأَزْوَاجِكَ إِنْ كُنْتُنَّ تُرِدْنَ الْحَيُوةَ الدُّنْيَا وَزِينَتَهَا فَتَعَالَيْنَ أُمَتِّعْكُنَّ وَ أُسَرِ حُكُنَّ سَرَاحًا جَمِيلًا وَإِنْ كُنْتُنَّ تُرِدْنَ اللهَ وَرَسُولَهُ وَ الدَّارَ الْآخِرَةَ فَإِنَّ اللَّهَ أَعَدَّ لِلْمُحْسِنَتِ مِنْكُنَّ اَجْرًا عَظِيمًا يَنِسَاءَ النَّبِيِّ مَنْ يَأْتِ مِنْكُنَّ بِفَاحِشَةٍ مُّبَيِّنَةٍ تُضْعَفُ لَهَا الْعَذَابُ ضِعْفَيْنِ وَكَانَ ذَلِكَ عَلَى اللهِ يَسِيرًا (ج) وَمَنْ يَقْنُتْ مِنْكُنَّ لِلَّهِ وَرَسُوْلِهِ وَ تَعْمَلْ صَالِحًا نُّؤْتِهَا أَجْرَهَا مَرَّتَيْنِ وَأَعْتَدْنَا لَهَا رِزْقًا كَرِيمًا يَنِسَاءَ النَّبِيِّ لَسْتُنَّ كَأَحَدٍ مِنَ النِّسَاءِ إِنِ اتَّقَيْتُنَّ فَلَا تَخْضَعْنَ بِالْقَوْلِ فَيَطْمَعَ الَّذِي فِي قَلْبِهِ مَرَضٌ وَقُلْنَ قَوْلًا مَعْرُوفًا وَ قَرْنَ فِي بُيُوتِكُنَّ وَلَا تَبَرَّجْنَ تَبَرُّجَ الْجَاهِلِيَّةِ الْأُولَى وَالِينَ الصَّلوةَ وَآتِينَ الزَّكُوةَ وَأَطِعْنَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ إِنَّمَا يُرِيدُ اللَّهُ لِيُذْهِبَ عَنْكُمُ الرِّجْسَ أَهْلَ الْبَيْتِ وَيُطَهِّرَكُمْ تَطْهِيرًا ، وَاذْكُرْنَ مَا يُتْلَى فِي بُيُوتِكُنَّ مِنْ أَيْتِ اللَّهِ وَالْحِكْمَةِ إِنَّ اللَّهَ كَانَ لَطِيفًا خَبِيرًا
ऐ नबी ! अपनी बीवियो से कह दे अगर तुम दुनिया की ज़िन्दगी और इसकी ज़ीनत का इरादा रखती हो तो आओ मैं तुम्हें कुछ सामान दे दूँ और तुम्हें रुख़्स़त कर दूँ, अच्छे त़रीक़े से रुख़्स़त करना। और अगर तुम अल्लाह और उसके रसूल और आख़िरी घर का इरादा रखती हो तो बेशक अल्लाह ने तुममें से नेकी करने वालियों के लिये बहुत बड़ा अज्र तैयार कर रखा है। ऐ नबी की बीवियो ! तुममें से जो खुली बेह़याई (अमल में) लाएगी उसके लिये अज़ाब दो गुना बढ़ाया जाएगा और यह बात अल्लाह पर हमेशा से आसान है। और तुममे से जो अल्लाह और उसके रसूल की फ़र्माबरदारी करेगी और नेक अमल करेगी उसे हम उसका अज्र दो बार देंगे और हमने उसके लिये बाइज़्ज़त रिज़्क़ तैयार कर रखा है। ऐ नबी की बीवियो ! तुम औरतों में से किसी एक जैसी नहीं हो, अगर तक़्का इख़्तियार करो तो बात करने में नर्मी न करो कि जिसके दिल में बीमारी है त़मअ़ कर बैठे और वोह बात कहो जो अच्छी हो। और अपने घरों में टिकी रहो और पहली जाहिलियत के ज़ीनत ज़ाहिर करने की तरह ज़ीनत ज़ाहिर न करो और नमाज़ क़ायम करो और ज़कात दो और अल्लाह और उसके रसूल का हुक्म मानो। अल्लाह तो यही चाहता है कि तुमसे गन्दगी दूर कर दे ऐ घरवालो! और तुम्हें पाक कर दे, ख़ूब पाक करना। और तुम्हारे घरों में अल्लाह की जिन आयात और दानाई की बातों की तिलावत की जाती है उन्हें याद करो। बेशक अल्लाह हमेशा से निहायत बारीक बीन, पूरी ख़बर रखने वाला है। [अह़ज़ाब: 28 से 34]
इन आयाते करीमा में स़िर्फ़ नबी करीम ﷺ की अज़्वाजे मुताह़रात को मुख़ातब किया गया है, बात उन्हीं से शुरू हुई है और उन्हीं पर ख़त्म हुई है। कुछ बातों का हुक्म दिया गया है और कुछ कामों से रोका गया है, इस पर वादा है और वईद है, लेकिन चूँकि उन अह़कामात की इफ़ादियत अज़्वाजे मुताहरात के साथ दूसरों के ह़क़ में भी थी इसलिए 'तत़्हीर' में मुज़क्कर का सैग़ा इस्तेमाल किया गया, क्योंकि क़ाइदा के ऐतिबार से जहाँ मुज़क्कर और मुअन्नस का इज्तिमाअ़ हो जाए, वहाँ मुज़क्कर को तर्जीह दी जाती है। चुनाँचे आयात की इफ़ादियत तमाम अहले बैत को शामिल होगी जिनमें अ़ली, फ़ातिमा, ह़सन और ह़ुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु ख़ास तौर से शामिल हैं और इसी ख़ुसूसियत की बिना पर आप ﷺ ने उनके लिये ख़ास़ त़ौर से दुआ़ भी की, इसी तरह अहले बैत का इत़्लाक़ अ़ली, फ़ातिमा, ह़सन और हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु के अलावा दूसरे लोगों पर भी होगा जैसाकि ज़ैद बिन अरक़म रज़ियल्लाहु अन्हु की हदीस में है कि जब उनसे पूछा गया: क्या आप ﷺ की बीवियाँ अहले बैत में से हैं? तो आपने फ़र्माया कि हाँ आप ﷺ की बीवियाँ अहले बैत में से हैं, लेकिन अहले बैत जिन पर ज़कात हराम है वोह आले अ़ली, आले जाफ़र, आले अ़क़ील और आले अ़ब्बास सभी हैं। [सहीह मुस्लिम:1078, किताब फ़ज़ाइले स़ह़ाबा]
लिहाज़ा बदलालत आयते करीमा अज़्वाजे मुताह्ह़रात अहले बैत में नीज़ अ़ली, फ़ातिमा, ह़सन और ह़ुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु ह़दीसे कसाअ और ज़ैद बिन अरक़म की हदीस की रोशनी में अहले बैत में दाख़िल हैं और आले अ़ब्बास, आले अ़क़ील, आले जाफ़र भी हदीस ज़ैद बिन अरक़म की रोशनी में अहले बैत में दाखिल हैं और इसी तरह आले हारिस बिन अ़ब्दुल मुत़्तलिब भी अहले बैत में दाख़िल हैं। [सहीह मुस्लिम: 167]
सीरीज सीरते सय्यदना अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु तहरीर नंबर 10 आगे जारी है इंशाअल्लाह गुजारिश है इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
जज़ाकुमुल्लाहु ख़ैरन
Team Islamic Theology
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