सीरत-ए सय्यदना अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु
[तहरीर नंबर 12]
14. ग़ज़्वा-ए हुनैन व तबूक में सय्यदना अली रज़ियल्लाहु अन्हु की ज़िम्मेदारी
i. सय्यदना अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु ग़ज़्वए हुनैन और ग़ज़्वए तबूक के मौक़े पर मदीना में नबी करीम ﷺ के अहले बैत की ख़बरगीरी अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु के हवाले : 8 हिजरी में ग़ज़्वए ह़ुनैन के मौके पर भी अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु का मुजाहिदाना कारनामा देखा जा सकता है, जिसमें आपने बहादुरी और फ़न्ने ह़र्बो ज़र्ब मे तजुर्बेकारी का मुज़ाहिरा किया। उस ग़ज़्वे में आप भी दीगर अंसारो मुहाजिरीन की तरह रसूलुल्लाह ﷺ के साथ साबित क़दम रहे, क़बीला हवाज़िन का एक शख़्स सुर्ख ऊँट पर एक स्याह झण्डा लिये हुए था और अपनी कार्रवाई करते चला जा रहा था, यह शख़्स जब किसी को ज़द में लेता तो उसे नेज़े से मार देता और जब लोग पीछे छूट जाते तो झण्डा बुलन्द करके उन्हें दिखाता वोह फिर उसके पीछे लग जाते थे। सय्यदना अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु अपनी जंगी महारत और मैदान में ज़वील तजुर्बे की बिना पर यह महूसूस कर लिया कि अहले हवाज़िन के जज़्बात जगाने और उन्हें मज़बूत करने में उस आदमी का ज़बरदस्त असर है, इसलिए आप और एक अंसारी यक बेक उस पर टूट पड़े और उसे ऊँट से गिराने फिर क़त्ल कर देने में कामयाब हो गए और फिर देखा गया कि चंद ही साअ़तों बाद दुश्मन शिकस्त खाकर भाग खड़ा हुआ और मुसलमान फ़तह़याब हो गए। [मुस्नद अबू यअला: 3955, इसकी सनद हसन है]
ii. ग़ज़्वए तबूक के मौक़े पर सय्यदना अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु के हवाले अहले बैत: रजब 9 हिज्री में तबूक का मअ़रका पेश आया। सीरते नबवी में इस ग़ज़्वे की बड़ी अहमियत है, इससे वोह मक़ासिद व नताइज हासिल हुए जो मुसलमानों और अरबों की नफ़्सियात व एह़सासात और बाद के पेश आने वाले वाक़ियात व हालात का रुख़ मुअ़य्यन करने में अ़मीक़ (गहरी) और देरपा असरात के हामिल हैं।
इस ग़ज़्वे के मौक़े पर रसूल ﷺ ने मदीना मुनव्वरा का मुह़ाफ़िज़ (गवर्नर) मुहम्मद बिन मस्लमा रज़ियल्लाहु अन्हु और अपने अहले बैत की देखभाल व ख़बरगीरी के लिये अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु को मुक़र्रर किया, फिर क्या था,
मुनाफ़िक़ों को ह़सदो निफ़ाक़ की भड़ास निकालने का एक मौक़ा हाथ लग गया, उन्होंने अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु के बारे में चे मीगोइयाँ शुरू कर दीं और यहाँ तक कि नबी करीम ﷺ ने अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु को सिर्फ़ इसीलिए पीछे छोड़ दिया है कि आप उन्हें अपने लिये एक बोझ समझते थे यक़ीनन अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु के ह़क़ में उनकी यह बेह़दागोई उनकी मुनाफ़िक़त की वाज़ेह दलील है जैसाकि सही व सरीह़ हदीस है कि अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़र्माया: क़सम है उस ज़ात की जिसने बीज से पौधा उगाया और रूह को ज़िन्दगी अता की। नबी ﷺ ने मुझसे अ़हद किया है कि, "मुझसे मोमिन ही मुहब्बत करेगा और मुनाफ़िक़ ही बुग्ज़ रखेगा।" [सहीह मुस्लिम: 78]
आप ग़ज़्वे में शिर्कत के जज़्बे से सरशार थे लश्कर से जा मिले और रसूलुल्लाह ﷺ से अर्ज़ किया: ऐ अल्लाह के रसूल! क्या आप मुझे बच्चों और औरतों में छोड़ देंगे।
आप ﷺ ने फ़र्माया: "क्या तुम इसबात से खुश नहीं कि मेरे लिये उस मक़ाम पर रहो जिस मक़ाम पर हारून मूसा के लिये थे, मगर यह ज़रूर है कि मेरे बाद कोई नबी नहीं हो सकता।" [सहीह बुख़ारी: 2404]
सीरीज सीरते सय्यदना अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु तहरीर नंबर 12 आगे जारी है इंशाअल्लाह गुजारिश है इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
जज़ाकुमुल्लाहु ख़ैरन
Team Islamic Theology

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