Panj Surah I Pansura

Panj Surah I Pansura


पंज सुरह / पनसूरा

किताब का मुख्य हिस्सा कुरआन की 5 सूरतें (यासीन, रहमान, वाक़िआ, मुल्क, मुज़म्मिल) है। ये अल्लाह का कलाम है, इनमें कोई शिर्क नहीं।

लेकिन किताब के आखिरी हिस्से में जो क़सीदा ग़ौसीया और "या ग़ौस मदद" वाली दुआएं/मनक़बत हैं, वो अल्लाह के हुक्म के मुताबिक खालिस शिर्क है।

अल्लाह ने खुद फरमाया है कि:

मदद, पुकारना, दुआ सिर्फ़ अल्लाह से मांगनी है।

"सिर्फ़ तुझी से मदद मांगते हैं।" [सूरह फातिहा (1:5)]

ये आयत साफ़ कहती है कि मदद मांगने का हक़ सिर्फ़ अल्लाह का है।

नबी ﷺ ने फरमाया: "दुआ इबादत है।" (अबू दाऊद, तिरमिज़ी सही हदीस)

दुआ/पुकार इबादत है, और इबादत सिर्फ़ अल्लाह के लिए। "या ग़ौस मदद" कहना दुआ है, जो अल्लाह के अलावा किसी और को है ये शिर्क है।

तौहीद में शिर्क मिलाकर किताब फायदेमंद नहीं हो सकती, अल्लाह के हुक्म (कुरआन और सही हदीस) के मुताबिक ये नुकसान ही पहुंचाएगी, फायदा नहीं।

अल्लाह ने साफ फरमाया है कि शिर्क मिल जाने से नेक अमल (अच्छे काम) बर्बाद हो जाते हैं, चाहे कितने भी बड़े क्यों न हों।

कुरआन की आयतें जो सीधे ये बताती हैं:

"और अगर उन्होंने अल्लाह के साथ शिर्क किया होता, तो जो कुछ उन्होंने किया था, वो सब उनसे बर्बाद हो जाता।" [सूरह अल-अनआम (6:88):]

मतलब: अगर तौहीद में शिर्क मिल जाए, तो सारे नेक अमल (जैसे नमाज़, रोज़ा, सदका, कुरआन पढ़ना) बेकार हो जाते हैं।

अल्लाह नबी ﷺ से फरमाते हैं: "अगर तूने शिर्क किया तो तेरा अमल बर्बाद हो जाएगा और तू नुकसान उठाने वालों में से हो जाएगा।" [सूरह अज़-ज़ुमर (39:65)]

यहां तक कि नबी ﷺ को भी चेतावनी है कि शिर्क से अमल तबाह हो जाता है।

"अल्लाह शिर्क को कभी माफ़ नहीं करता, लेकिन जो चाहे उसके अलावा गुनाह माफ़ कर देता है।" [सूरह अन-निसा (4:48)]

शिर्क सबसे बड़ा गुनाह है, और ये तौहीद को नष्ट कर देता है।

इस किताब का असली फायदा बहुत कम (या शायद ही कोई) है अगर वो हिस्सा शिर्क वाला है, क्योंकि घर में हर मुसलमान के पास कुरआन-मुसहफ़ तो होता ही है (या मोबाइल/ऐप पर आसानी से उपलब्ध है)।


असली बात क्या है?

कुरआन की 5 सूरतें (यासीन, रहमान, वाक़िआ, मुल्क, मुज़म्मिल) पढ़ने का फायदा बहुत बड़ा है। ये अल्लाह का कलाम है, लेकिन मदनी पंज सुरह किताब में जो अतिरिक्त हिस्सा है (क़सीदा ग़ौसीया, "या ग़ौस मदद" वाली दुआएं, ग़ौस-ए-आज़म की मनक़बत) वो अल्लाह के हुक्म के खिलाफ है, क्योंकि ये मर चुके इंसान को पुकारना है, जो शिर्क है।


घर में शिर्क वाली चीज़ रखने का नुकसान बहुत ज़्यादा क्यों है?

अल्लाह के कलाम से:

"दीन में कोई ज़बरदस्ती नहीं" [सूरह अल-बक़रा (2:256)]

लेकिन शिर्क वाली किताब/क़सीदा घर में रखना मतलब है शिर्क की बातें घर में मौजूद रहना, जो परिवार के लिए फितना बन सकता है।

शिर्क सबसे बड़ा गुनाह है, जो माफ़ नहीं होता (बिना तौबा के)। [सूरह अन-निसा (4:48)]


घर में शिर्क वाली किताब रखने से:

  • शैतान को घर में घुसने का मौका मिलता है (क्योंकि शिर्क उसकी सबसे बड़ी खुशी है)।
  • बच्चे/परिवार के लोग वो पढ़कर गुमराह हो सकते हैं।
  • नेक अमल (कुरआन पढ़ना) का सवाब कम हो सकता है या बर्बाद हो सकता है अगर शिर्क मिल जाए।
  • आखिरत में हिसाब के वक्त ये किताब/क़सीदा गवाह बन सकती है कि शिर्क की तरफ झुकाव था।


क्या करना चाहिए? (अल्लाह के मुताबिक सबसे सही रास्ता)

  • कुरआन की सूरतें अलग से पढ़ो मोबाइल ऐप (Quran Majeed, Al Quran), या असली कुरआन से। फायदा पूरा मिलेगा, कोई शिर्क नहीं।
  • मदनी पंज सुरह किताब का वो हिस्सा (क़सीदा ग़ौसीया आदि) फाड़ दो या जला दो क्योंकि शिर्क वाली चीज़ घर में रखना खतरा है।
  • मदद/हिफाज़त के लिए सीधे अल्लाह से दुआ करो। जैसे: "या अल्लाह, मेरी मदद फरमा।" "रब्बी इन्नी मजलूम" [सूरह क़सस 28:21]
  • सूरह मुल्क रात को सोने से पहले पढ़ो (सही हदीस से कब्र के अज़ाब से बचाव)।
  • तौबा करो अगर पहले पढ़ा हो, अल्लाह तौबा कबूल करने वाला है।
  • घर में खालिस कुरआन और सही किताबें रखो (जैसे सही बुखारी, रियाज़ुस सालेहीन, या तफसीर वाली किताबें)।


नतीजा: सबके पास कुरआन है, तो शिर्क मिली किताब रखकर फायदा ढूंढना मतलब नुकसान खरीदना है। अल्लाह हमें खालिस तौहीद पर रखे, शिर्क और उसके नुकसान से बचाए। 


आमीन


By Team Islamic Theology

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