सीरत-ए सय्यदना अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु
[तहरीर नंबर 08]
8. आपकी औलाद यानी ह़सन और ह़ुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु:
ह़सन बिन अली बिन अ़बी त़ालिब अल्हाशमी रसूलुल्लाह ﷺ के नवासे, दुनिया में आपके फूल, जन्नत के दो नौजवान सरदारों में से एक थे, आपकी माँ सय्यदा फ़ातिमा ज़ौहरा रज़ियल्लाहु अन्हा हैं, बइख़्तिलाफ़ रिवायात आपकी विलादत 3 हिज्री के निस़्फ़ रमज़ान या शाबान में हुई और कुछ रिवायात में विलादत की तारीख़ 4 हिज्री या 5 हिज्री बताई गई है। [फ़ज़ाइले सहाबा: हदीस: 2/96; ह़िल्यतुल औलिया: 2/35]
रसूलुल्लाह ﷺ ने आपका नाम ह़सन रखा, अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु का बयान है कि जब ह़सन की विलादत हुई तो मैंने उनका नाम 'ह़र्ब' रखा और जब अल्लाह के रसूल ﷺ तशरीफ़ लाए तो कहा: "मेरा बेटा मुझे दिखाओ तुमने उसका नाम क्या रखा? मैंने कहा, ह़र्ब। आपने फ़र्माया, नहीं बल्कि इसका नाम 'ह़सन' है। [सहीह बुख़ारी, अल्अदब: 28]
इस तरह अल्लाह के रसूल ﷺ ने क़सावते क़ल्बी के मफ़्हूम पर मुश्तमिल नाम को एक उ़मदा नाम में बदल दिया जिससे दिलों पर फ़रह़त व शादमानी का असर पड़ता है, बहरहाल उस नो मौलूद ने एक खूबसूरत नाम का जामा पहन लिया, फिर आपने उन्हें गोद में उठा लिया और बौसा दिया और मज़ीद जो किया उसकी तफ्सील अबू राफ़ेअ इस तरह बयान करते हैं कि मैंने रसूलुल्लाह ﷺ को देखा कि जब ह़सन की विलादत हुई तो उनके दोनों कानों में अज़ान दी। [सुनन अबूदाऊद: 5105] उ़लमा ने इस हदीस की सनद को ज़ईफ़ करार दिया है। नो मौलूद के कान में अज़ान की रिवायत ज़ईफ़ और अज़ान व इक़ामत की रिवायत मौज़ूअ़ है।
आपके अ़क़ीक़े से मुताल्लिक़ अबू राफ़ेअ़ बयान करते हैं कि जब ह़सन रज़ियल्लाहु अन्हु की विलादत हुई तो फ़ातिमा ने कहा: क्या मैं बेटे की तरफ़ से दुम्बों का अक़ीक़ा न करदूँ तो आप ﷺ ने फ़र्माया: नहीं, बल्कि उसके सर के बाल मुँडवा दो और बालों के बराबर चाँदी बतौर सदक़ा, मिस्कीनों और अस्ह़ाबे सुफ़्फ़ा को दे दो, चुनाँचे उन्होंने ऐसा ही किया। [तब्क़ात इब्ने सअ़द: 1/233, इसकी सनद ज़ईफ़ है]
9. ह़सन बिन अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु की फ़ज़ीलत पर चंद हदीसें:
सय्यदना बराअ़ बिन आ़ज़िब रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि मैंने ह़सन बिन अली रज़ियल्लाहु अन्हु को नबी करीम ﷺ के कँधे पर देखा और आप ﷺ दुआ़ कर रहे थे: ऐ अल्लाह! मुझे इससे मुह़ब्बत है तू भी इससे मह़बूब बना ले। [सहीह बुख़ारी: 3749]
सय्यदना अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु रसूलुल्लाह ﷺ से रिवायत करते हैं कि आप ﷺ ने ह़सन के बारे में फ़र्माया: अल्लाह मुझे इससे मुहब्बत है तू भी इसे महबूब बना ले और जो इससे मुहब्बत रखे उसे भी अपना महबूब बन्दा बना। [सहीह मुस्लिम: 2421]
सय्यदना ओसामा बिन ज़ैद रज़ियल्लाहु अन्हु नबी अकरम ﷺ से रिवायत करते हैं कि नबी करीम ﷺ उन्हें और हसन को पकड़कर यह दुआ करते थे: ऐ अल्लाह! मुझे इनसे मुहब्बत है तू भी इनसे मुहब्बत रख। [सहीह बुख़ारी: 3747]
संय्यदना अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि मैंने रसूलुल्लाह ﷺ को मिम्बर पर फ़र्माते हुए सुना हालाँकि उस वक्त ह़सन रज़ियल्लाहु अन्हु आपकी गोद में थे, आप ﷺ कभी लोगों की तरफ़ देखते, कभी उनकी तरफ़ और फ़र्माते: मेरा यह बेटा सरदार है, और उम्मीद है कि अल्लाह तआ़ला इसके ज़रिये से मुसलमानों की दो जमाअतों में सुलह कराएगा। [सहीह बुख़ारी: 3746]
यक़ीनन ह़स़न रज़ियल्लाहु अन्हु के बारे में नबी करीम ﷺ का यह फ़र्माना कि आप सरदार हैं, इनके लिये बड़े फ़ख़्र की बात और शराफ़त का तमग़ा है। आपके नाना मुहम्मद ﷺ की यह बशारत मुकम्मल तौ़र से सादिक़ आई। चुनाँचे आप मुआ़विया रज़ियल्लाहु अन्हु के ह़क़ में ख़िलाफ़त से दस्तबरदार हो गए और अल्लाह तआ़ला ने आपके हाथों मुसलमानों के इख़्तिलाफ़ और उनकी खूँ रेज़ियों को बन्द कर दिया। यह 41 हिजरी का वाक़िया है। आपकी मुद्दते ख़िलाफ़त सिर्फ़ छः (6) महीने है। इस्लामी तारीख़ में इस साल को 'आ़मुल जमाअ़त' कहा जाता है, आप ﷺ ने हदीस में इसी बात की तरफ इशारा किया था: "उम्मीद है कि अल्लाह तआला इसके ज़रिये से मुसलमानों की दो जमाअतों में सुलह कराएगा।" [अल् बिदाया वन् निहाया: 8/20]
हाफ़िज़ इब्ने ह़जर रहमतुल्लाह अलैह इस हदीस की शरह़ में लिखते हैं कि इस हदीस में दलाइले नुबुव्वत में से एक दलील और ह़सन बिन अली रज़ियल्लाहु अन्हु की मंक़िबत पाई जाती है, आपने हुकूमत सम्भालने से इसलिए किनाराकशी न की थी कि आपके पास माल की क़िल्लत थी, या किसी ज़िल्लत से बचना चाहते थे, या और कोई वजह थी, बल्कि मह़ज़ रज़ाए इलाही मत़्लूब थी, इसीलिए आपने जब मुसलमानों में आपस ख़ूॅं रेज़ी देखी तो दीन की इफ़ादियत और उम्मत की मस़्लिह़त व मफ़ाद को तर्जीह दी। [फ़त्हुल बारी: 13/66]
सईद मक़्बरी आप कीसान अल्मदनी हैं, उम्मे शुरैक के ग़ुलाम थे, आप सिक़ा हैं। 10 हिजरी में वफ़ात पाई, देखिए अत्तहज़ीब: 463 से रिवायत है कि हम अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु के साथ थे, कि हमारे पास ह़सन बिन अ़ली बिन अ़बी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु आए और सलाम किया, हमने सलाम का जवाब दिया और अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु उनकी आमद और सलाम नहीं जान सके, हमने कहा: ऐ अबू हुरैरा, देखो ह़सन बिन अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु आए हैं और सलाम किया है। चुनाँचे आप उनसे मिले और कहा: व अलैकुमुस्सलाम, ऐ मेरे सरदार, फिर फ़र्माया : यह सरदार हैं। [मुस्तदरक/मारिफ़तुस़्स़ह़ाबा: 3/149] इसकी सनद सही है और इमाम ज़हबी रहमतुल्लाह अलैह ने इसकी मुवाफ़िक़त की है।
आप शक्लो शुबाहत में रसूलुल्लाह ﷺ जैसे थे। सय्यदना अ़नस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि उन्होंने कहा कि ह़सन बिन अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु से बढ़कर रसूलुल्लाह ﷺ से मुशाबा कोई न था। [सहीह बुख़ार: 3752]
सय्यदना उक़्बा बिन हारिस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि मैंने अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु को देखा वोह ह़सन को उठाए हुए हैं और फ़र्मा रहे हैं, मेरे बाप इन पर फ़िदा हों, यह नबी करीम ﷺ के ज़्यादा मुशाबेह हैं, अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु से ज़्यादा मुशाबेह नहीं, और अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु खड़े मुस्कुरा रहे हैं। [सहीह बुख़ारी: 3750] पस अपने नाना मुहम्मद ﷺ के मुशाबेह होना उनके लिये बड़े फ़ज़्लो शर्फ़ की बात है।
सीरीज सीरते सय्यदना अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु तहरीर नंबर 08 आगे जारी है इंशाअल्लाह गुजारिश है इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
जज़ाकुमुल्लाहु ख़ैरन
Team Islamic Theology
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