सीरत-ए सय्यदना अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु
[तहरीर नंबर 09]
10. ह़ुसैन बिन अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु:
आपका नामो नसब अबू अ़ब्दुल्लाह ह़सन बिन अ़ली बिन अबी त़ालिब है, आप चमने ज़ार रसूलुल्लाह ﷺ के शगुफ़्ता फूल और आपके नवासे हैं, आप ﷺ की लख़्ते जिगर सय्यदा फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हु के लड़के हैं, आपकी विलादत 4 हिज्री में हुई। सने विलादत के सिलसिले में दीगर अक्क़ाल भी हैं और माहे मुहर्रम 61 हिजरी मे बमक़ामे करबला आ़शूरा के दिन शहादत पाई। [अल् बिदाया वन् निहायाः 8/331,334]
यअ़ला बिन आमिरी रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि वोह एक बार रसूलुल्लाह ﷺ के साथ एक दावत पर निकले, अल्लाह के रसूलुल्लाह ﷺ के सामने ठहर गए और ह़ुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु दूसरे बच्चों के साथ खेल रहे थे। रसूलुल्लाह ﷺ ने उन्हें पकड़ना चाहा, लेकिन इधर उधर भागते रहे, और रसूलुल्लाह ﷺ भी उनको हँसाते रहे और पीछे से दौड़ाते रहे, यहाँ तक कि उनको पकड़ लिया, फिर आप ﷺ ने एक हाथ से उनकी गुद्दी और दूसरे से ठोडी पकड़कर उनके मुँह को बौसा दिया और फ़र्माया: हुसैन मुझसे है और मैं हुसैन से हूँ, ऐ अल्लाह जो हुसैन से मुहब्बत करे तू उसे महबूब रखं, हुसैन मेरे नवासों में से एक नवासा है। [फ़ज़ाइले सहाबा: 1361, इसकी सनद हसन है]
इस हदीस में ह़ुसैन की मंक़िबत व फ़ज़ीलत साफ़ तौर से नज़र आ रही है, ऐसा लगता है कि आपको इल्हामे रब्बानी के ज़रिये से मुस्तक़्बिल में उन्हें पेश आने वाले हादसात का इल्म हो गया था, इसलिए आपने मख़्सूस तौर से उनका ज़िक्र किया, उनकी मुहब्बत को वाजिब ठहराया और उनके साथ किसी तरह की बदसुलूकी को ह़राम क़रार दिया और फिर इसकी मज़ीद ताकीद इन अल्फ़ाज़ में किया: "जो हुसैन से मुहब्बत करे, अल्लाह उससे मुहब्बत करे।"
क्योंकि हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु की मुहब्बत रसूलुल्लाह ﷺ की मुहब्बत और रसूल ﷺ की मुहब्बत अल्लाह की मुहब्बत के ज़रिये से है।
सय्यदना अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि जब हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु का सरे मुबारक उबैदुल्लाह बिन ज़ियाद उ़बैदुल्लाह 67 हिज्री में क़त्ल हुआ। के पास लाया गया और एक त़श्त में रख दिया गया तो वोह उस पर लकड़ी से कुरैदने लगा और आपके ह़ुस्नो खूबसूरती के बारे में भी कुछ कहा: इस पर अनस रज़ियल्लाहु अन्हु ने कहा कि हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु रसूलुल्लाह ﷺ के सबसे ज़्यादा मुशाबेह थे, इन्होंने वस्मा (वस्मा एक पौधा है जो यमन में पाया जाता है उसके पत्तों से बालों को ख़िज़ाब किया जाता है।) का ख़िज़ाब इस्तेमाल कर रखा था। [सहीह बुख़ारी: 3748]
सय्यदना अ़नस रज़ियल्लाहु अन्हु से एक दूसरी जगह रिवायत है कि जब हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु का सरे मुबारक उबैदुल्लाह बिन ज़ियाद के पास लाया गया तो वोह आपके अगले दो दाँतों को छड़ी से कुरेदने लगा और कहने लगा: यक़ीनन यह बहुत खूबसूरत था, तो मैं ने कहा: अल्लाह की क़सम ! तुम बहुत नाज़ेबा हरकत कर रहे हो, मैंने अल्लाह के रसूल ﷺ को देखा है कि जहाँ तुम छड़ी रखे हो उसी जगह पर बौसा देते थे, चुनाँचे उसने छड़ी वहाँ से हटा ली। [फ़ज़ाइले सहाबा: 2/985; इसकी सनद हसन है, मज्मउ़ज़्ज़वाइद: 9/195]
आख़िर में ज़िक्र हुई दोनों हदीसें ह़सन रज़ियल्लाहु अन्हु की शख़्सियत व शबाहत में अहले बैत में सबसे ज़्यादा रसूलुल्लाह ﷺ से क़रीबतर होने पर दलालत करती हैं, लेकिन यहाँ इश्काल पैदा होता है कि फ़ज़ीलते ह़सन रज़ियल्लाहु अन्हु के तज़्किरे में अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु ही का बयान है कि ह़सन रज़ियल्लाहु अन्हा रसूलुल्लाह ﷺ से सबसे ज़्यादा मुशाबेह थे, जबकि यहाँ ह़ुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु को सबसे ज़्यादा मुशाबेह बता रहे हैं। चुनाँचे हाफ़िज़ इब्ने ह़जर रहमतुल्लाह अलैह ने इसका जवाब इस तरह दिया है कि जब ह़सन बक़ैदे हयात थे तो आप ﷺ के ज़्यादा मुशाबेह थे और इनकी वफ़ात के बाद इनके भाई हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु रसूलुल्लाह ﷺ की शक्लो शबाहत से क़रीबतर थे, या ह़सन रज़ियल्लाहु अन्हु के अलावा दीगर लोगों के मुक़ाबले में हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु नबी करीम ﷺ से ज़्यादा मुशाबेह थे, और इसका भी एहतिमाल है कि कुछ अ़अज़ा में हसन रज़ियल्लाहु अन्हु रसूलुल्लाह ﷺ से ज़्यादा मुशाबिहत रखते थे और कुछ अअ़ज़ा में हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु आप ﷺ से ज़्यादा मुशाबिहत रखते थे। जैसाकि तिर्मिज़ी और इब्ने हिब्बान ने हानी बिन हानी की सनद से अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत किया है कि सर से सीने तक हसन और सीने से पैर तक हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु रसूलुल्लाह ﷺ के ज़्यादा मुशाबेह थे। [फ़ज़ाइले सहाबा: 1366, इसकी सनद सही है]
यह ह़ुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु के सिलसिले में वारिदशुदा अ़हादीस में से कुछ हैं।
11. ह़सन और ह़ुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु के मुश्तरका फ़ज़ाइल मे वारिदशुदा हदीसें:
इब्ने उ़मर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि उनसे इराक़ के किसी शख़्स ने पूछा: अगर कोई शख़्स एह़राम की हालत में मक्खी मारे तो उसे क्या कफ़्फ़ारा देना पड़ेगा? इस पर इब्ने उ़मर रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़र्माया: इराक़ के लोग मक्खी मारने के बारे में सवाल करते हैं जबकि यह लोग नवासए रसूल को क़त्ल कर चुके हैं जिनके बारे में आप ﷺ ने फ़र्माया था: "यह दोनों दुनिया में मेरे दो फूल हैं।" [सहीह बुख़ारी: 3753]
सय्यदना अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़र्माया: जिसने इन दोनों (यानी हसन व हुसैन से मुहब्बत की उसने गोया मुझसे मुहब्बत की और जिसने इन दोनों से बुग्ज़ की उसने मुझसे बुग्ज़ की। [सहीह सुनन अबू दाऊद: 2/92; फ़ज़ाइले सहाबा: 1359, सनद हसन]
सय्यदना बराअऐ बिन आज़िब रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ की निगाह हसन और हुसैन पर पड़ी तो कहा: ऐ अल्लाह! मुझे दोनों से मुहब्बत है, तू भी इन्हें महबूब बना ले। [सहीह सुनन तिर्मिज़ी: 3782]
सय्यदना अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु रसूलुल्लाह ﷺ से रिवायत करते हैं कि आपने फ़र्माया: "हसन और हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु नौजवानाने जन्नत के दो सरदार हैं।" [मज्मउ़ज़्ज़वाइद: 9/184; शैख़ अल्बानी ने इसकी तस़्ह़ीह़ की है। अस़्स़हीहा: 2/448]
अब्दुल्लाह बिन बुरैदा से रिवायत है कि मैंने अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु को फ़र्माते हुए सुना: एक मर्तबा रसूलुल्लाह ﷺ ख़ुत्बा दे रहे थे, दौराने ख़ुत्बा हसन और हुसैन आ पहुँचे, दोनों सुर्ख रंग की क़मीस मे मल्बूस थे, गिरते पड़ते चल रहे थे, रसूलुल्लाह ﷺ मिम्बर से उतर गए और दोनों को उठाकर अपने सामने लाकर बिठा लिया और फ़र्माया : यक़ीनन सच कहा है अल्लाह ने कि बेशक तुम्हारे मालो औलाद फ़ित्ना हैं, मैंने उन दोनों बच्चों को गिरते पड़ते आते हुए देखा तो मैं सब्र न कर सका और अपनी बात काटकर उन दोनों को उठा लिया।" [फ़ज़ाइले सहाबा: 1358, इसकी सनद सही है]
सईद बिन ज़ुबैर इब्ने अ़ब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत करते हैं कि अल्लाह के रसूल ﷺ हसन और हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु के लिये कलिमों से पनाह ढूँढ़ते थे और कहते थे :
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ، وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لاَمَّةٍ
तुम्हारे बाप इब्राहीम, इस्माईल और इस्हाक़ अलैहिस्सलाम के लिये इन्हीं कलिमों की पनाह ढूँढते थे। "मैं तुम दोनों के लिये पनाह माँगता हूँ, अल्लाह के कामिल कलिमात की हर शैतान, हर मूज़ी जानवर और हर नज़रे बद की बुराई से।" [सहीह बुख़ारी: 3371]
यहाँ एक बात की वज़ाहत ज़रूरी हे कि इस हदीस कि लफ़्ज़ 'हाम्मत' और सअ़द बिन अबी वक़्क़ास नीज़ अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु की हदीस में वारिद 'हाम्मतिन' में कोई तआरुज़ नहीं है। चुनाँचे सअऊद बिन अबी वक़्क़ास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़र्माया: "ला हाम्मतिन' सहीह इब्ने हिब्बान: 6127, इसकी सनद क़वी है।
[तब्रानी: 1764] यानी उल्लू की कोई तासीर नहीं है और अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि आप ﷺ ने फ़र्माया : "ला हाम' शरह मुश्किलुल आसार: 7/328, इसकी सनद सही है। उल्लू की बोली कोई तासीर नहीं और फ़र्माया, कोई बीमारी मुतअ़द्दद नहीं, सफ़र की कोई नहूसत नहीं और उल्लू की बोल की कोई तासीर नहीं। [सहीह मुस्लिम: 2220]
इमाम जाफ़र त़ह़ावी इन अहादीस के मुताल्लिक़ लिखते हैं कि आख़िर में ज़िक्र हुई अहादीस में 'हामत' की तासीर और उसके वुजूद की नफ़ी की गई है। लेकिन सवाल यह पैदा होता है कि जो चीज़ मादूम है आप ﷺ ने उससे पनाह कैसे माँगी? सो इसका जवाब यह है कि जिस 'हाम्मत' से आप ﷺ ने पनाह माँगी है उससे मूज़ी जानवर मुराद हैं और इसके मीम को तशदीद के साथ पढ़ा जाता है और जिस 'हाम्मतिन' के वुजूद और उसकी तासीर की नफ़ी की है उससे उल्लू की बोली मुराद है कि जिससे अहले अरब ज़मानए जाहिलियत में किसी की मौत का फ़ाल लेते थे, इसके मीम को मुख़्फ़फ़ पढ़ा जाता है लिहाज़ा दोनों दो चीजें हैं और उनमें कोई तआरुज़ नहीं। [शरह़ मुश्किलुल आसार: 7/330]
सीरीज सीरते सय्यदना अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु तहरीर नंबर 09 आगे जारी है इंशाअल्लाह गुजारिश है इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
जज़ाकुमुल्लाहु ख़ैरन
Team Islamic Theology
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