दीन का इल्म कैसे हासिल करें?
दीन का इल्म यानी इस्लाम के उसूलों, कुरआन, हदीस, और शरीअत की सही समझ रखना ये हर मुसलमान मर्द और औरत पर ज़रूरी (फ़र्ज़) है।
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया, "इल्म हासिल करना हर मुसलमान मर्द और औरत पर फर्ज़ है।” [सुनन इब्न माजाह 224]
लेकिन आज के दौर में लोग सोचते हैं कि:
- "हम कहां से शुरू करें?"
- "समय नहीं है"
- "कौन सिखाएगा?"
- "हम तो आम इंसान हैं, आलिम नहीं बन सकते"
तो चलिए, आसान और सीधा तरीका जानते हैं,
1. सबसे पहले: नीयत (इरादा) ठीक करें
अल्लाह सिर्फ आपके काम नहीं, आपकी नीयत को भी देखता है।
अगर आप दीन सीखना चाहते हैं:
- सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए सीखिए
- दिखावे, बहस या दूसरों को नीचा दिखाने के लिए मत सीखिए
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया, “जिसने ऐसा इल्म हासिल किया जिससे अल्लाह की रज़ा मांगी जाती है, लेकिन उसने दुनिया कमाने के लिए हासिल किया, वो जन्नत की खुशबू भी नहीं पाएगा।” [सुनन अबू दाऊद 3664]
2. कुरआन से शुरुआत करें
- रोज़ थोड़ा वक़्त निकालकर कुरआन की तिलावत करें।
- साथ में उसका तर्जुमा और तफ़्सीर पढ़ें।
- आसान तफ़्सीर जैसे तफ़्सीर-ए-आसाँ, मआरिफ़ुल क़ुरआन या ऑडियो तफ्सीर सुने।
शुरुआत ऐसे करें:
- हर दिन 5–10 आयतें + तर्जुमा + तफ़्सीर
- नोटबुक में कुछ पॉइंट्स लिखें – "क्या सीखा?"
- उस पर अमल करने की नीयत करें
3. हदीस पढ़ना शुरू करें
कुरआन के बाद सबसे ज़रूरी इल्म है हदीस यानी रसूलुल्लाह ﷺ की ज़िन्दगी और बातों को समझना।
शुरुआत इन किताबों से करें:
- रियाज़ुस्सालिहीन – आसान, हर दिन की ज़िन्दगी से जुड़ी हदीसें
- अरबईन नववी – 40 अहम हदीसें, हर मुसलमान को याद होनी चाहिए
- वीडियो या ऑडियो शरह (explanation) के साथ पढ़ें
4. ऑनलाइन/ऑफ़लाइन दर्स (क्लासेज़) लें
आज के दौर में दीन का इल्म हासिल करना और भी आसान हो गया है। घर बैठे-बैठे मोबाइल से सीख सकते हैं:
- यूट्यूब चैनल्स
- ऐप्स
- कोर्सेज़
कई जगह मुफ्त या पेड ऑनलाइन इस्लामिक कोर्सेज़ मिलते हैं।
5. रोज़ाना थोड़ा वक़्त तय करें (Consistency)
- हर दिन 15–30 मिनट का टाइम सिर्फ दीन की तालीम के लिए रखें, चाहें सुबह उठकर, या रात में सोने से पहले।
- एक छोटी सी दीनी डायरी रखें जहाँ आप रोज़ कुछ न कुछ नोट करें।
6. अपने अमल से इल्म को ज़िंदा करें
सिर्फ सुनना और पढ़ना काफी नहीं। जो सीखें, उसे अमल में भी लाएं:
- अगर नमाज़ की अहमियत जानी, तो नमाज़ क़ायम करें
- अगर ग़ीबत के नुक़सान समझे, तो छोड़ दें
- अगर झूठ की हदीस सुनी, तो सच्चा बनें
7. बहनों के लिए ख़ास सलाह
बहनों को अक्सर घर के काम और बच्चों में फुर्सत नहीं मिलती, लेकिन:
- खाना बनाते हुए ऑडियो तफ़्सीर सुनें
- बच्चों को सुलाते हुए हदीस की कहानियाँ सुनाएं
- घर की लड़कियों के साथ छोटा सा दीनी हलक़ा (गोल बैठक) शुरू करें
8. मस्जिद, मदरसे और दीनी महफ़िल / मजलिस में हिस्सा लें
- अपने इलाके की मस्जिद, दारुल उलूम, या इस्लामी सेंटर से जुड़ें।
- वहां होने वाली तालीमी नशिस्त, बयान, तफ़्सीर, दर्स में शामिल हों।
- ऐसे लोगों की सोहबत (साथ) अपनाएं जो आपको अल्लाह के करीब ले जाएं।
याद रखिए:
- दीन का इल्म कोई आलिम बनने के लिए ही नहीं, बेहतर इंसान, बेहतर मुसलमान बनने के लिए होता है
- थोड़ा-थोड़ा सीखें, लेकिन पक्के इरादे के साथ
- इंसान अमल से बनता है, सिर्फ़ सुनने से नहीं
9. दुआ करें:
اَللّٰهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا
“अल्लाहुम्मा इननी असअलुका इल्मन नाफ़िअन…”
(ए अल्लाह! मुझे नफ़ा देने वाला इल्म अता फ़रमा)
[सुनन इब्न माजह 925]
इल्म सीखो, अमल करो, और दूसरों तक पहुँचाओ, यही इस्लामी ज़िन्दगी है।
By Islamic Theology

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