अंबिया के वाक़िआत बच्चों के लिए (पार्ट-12c)
सैयदना ईसा अलैहिस्सलाम
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23- यहूदी सैयदना ईसा से छुटकारा चाहते हैं
यहूदियों के सब्र का बंधन टूट गया, उनकी ज़िद्द और दुश्मनी का प्याला भर गया अब वह सैयदना ईसा अलैहिस्सलाम से छुटकारा हासिल करना चाहते थे चुनांचे उन्होंने उस समय के हाकिम के पास केस कर दिया और शिकायत की कि बह एक बाग़ी जवान है जो अपनी गुमराही के कारण हमारे दीन से निकल गया है और हमारे नौजवानों को अपने क़ाबू में कर लिया है वह तो उसपर आशिक़ ही हो गए हैं उसने हमारे दरमियान जुदाई डाल दी है, हमारे अक़्लमंदों को बेवक़ूफ़ कहता है और हमारे काम के बीच रुकावट बन गया है।
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24- बदला लेने वालों और सियासत करने वालों का अंदाज़
ईसा हुकूमत के लिए ख़तरा है यह किसी निज़ाम के आगे नहीं झुकता और किसी क़ानून का पाबंद नहीं, किसी बड़े की इज़्ज़त नहीं करता और न पुराने लोगों को मुक़द्दस समझता है, वह क्रांतिकारी व्यक्ति है अगर उसके फ़ितने को रोका नहीं गया तो वह तबाही मचा देगा। चिंगारी को कभी छोटा समझने की ग़लती नहीं करनी चाहिए वरना वह आग बन कर जला डालेगी।
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25- धोखा और फ़रेब
यहूदियों की बातें धोखे और धूर्तता (slyness) से भरी हुई थी उनपर सियासी रंग चढ़ा हुआ था। वह जानते थे कि दीन के हवाले से की गई बात हाकिम (मंत्रियों) को उभारती और भड़काती नहीं हैं बल्कि यह उनकी सियासत थी कि हुकूमत यहूदियों के दीनी मामलात में हस्तक्षेप न करे इसलिए उन्होंने अपने मुक़द्दमे को सियासी रंग दे दिया।
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26- मुश्किल
बाहरी मुशरिक हाकिमों के लिए असल मामले की तह तक पहुंचना एक मुश्किल काम था हालांकि वह पहूदियों के मुक़द्दमे के मक़सद और मसीह से उनकी दुश्मनी से अच्छी तरह वाक़िफ़ थे। वह अपने मुल्क के प्रशासनिक प्रबंध में लगे हुए थे। लेकिन यहूदियों की ज़िद् जब हद से बढ़ गई और संकोच करते करते ज़्यादा समय बीत गया तो फिर इस मामले से छुटकारा पाना ही मुनासिब समझा क्योंकि अब इसका चर्चा पूरे मुल्क में होने लगा था।
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27- सैयदना ईसा मसीह न्यायालय में
जुमा का दिन और अस्र के बाद का समय था, सब्त (हफ़्ता) की रात होने ही वाली थी और यहूदी सब्त के दिन कोई काम नहीं करते थे, यह उनकी छुट्टी का दिन था।इसलिए वह चाहते थे कि जुमा के दिन ही सूरज डूबने से पहले पहले फ़ैसला आ जाये, वह मसीह से बहुत जल्द निजात चाहते थे ताकि वह निश्चिंत होकर सुकून से सो सकें और सुबह ख़ुशी से झूमते हुए उठें और कोई परेशानी बाक़ी न रहे।
हाकिम इस मुक़द्दमे से बिल्कुल तंग आ गया उसे इस मामले से न कोई लगाव था और न इसमें जनता का ही कोई भला था। यहूदी फ़ैसला सुनने के लिए इकट्ठे हो चुके थे, वह चीख़ व पुकार कर रहे थे। हाकिम सख़्त परेशान था, समय कम था सूरज डूबने के क़रीब था चुनांचे उसने फांसी का हुक्म देकर क़त्ल का फ़ैसला सुना दिया।
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28- उस युग का फ़ौजदारी कानून (Criminal law)
उस समय के फ़ौजदारी क़ानून में यह ज़रूरी था कि जिसको फांसी की सज़ा सुनाई जाती वही सलीब उठाकर लाए। फांसी की जगह बहुत दूर थी जैसा कि विकासशील देशों में होता है। भीड़ इतनी हो चुकी थी कि लोग एक दूसरे पर गिर रहे थे। पुलिस बल और बाहर के आने बालों में अधिकांश वह लोग थे जिन्हें इस मामले से कोई दिलचस्पी नहीं थी। बनी इस्राईल एक दूसरे से मिलते जुलते थे उनके काम गड मड थे उनकी हालत ग़ैरों की नज़र ग़ैर वाली थी। शाम का समय था अंधेरा फैलने लगा था कुछ पहूदी और बेवक़ूफ़ नौजवान मसीह पर टूट पड़ते थे और उनके ख़िलाफ़ बढ़ बढ़ कर बोल रहे थे वह उन्हें गालियां देते थे, शर्म दिलाते थे और उनको तकलीफ़ देना और बेइज़्ज़ती करना चाहते थे।
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29- ईसा अलैहिस्सलाम तकलीफ़ बर्दाश्त करते हैं
सैयदना मसीह अलैहिस्सलाम थके हुए थे मुसलसल कोशिश और अदालत में ज़्यादा देर खड़े रहने और तकलीफ़ उठाने के कारण थक गए थे और सलीब बहुत भारी थी। उन्हें उठाकर लाने के लिए बहुत ज़ोर डाला गया लेकिन वह तो जल्दी जल्दी चल भी न सकते थे।
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30- अल्लाह की तदबीर
एक पुलिस ने एक इसाईली नौजवान को लकड़ी उठाकर लाने को कहा यह नौजवान अपने साथियों में सबसे बहादुर और सैयदना मसीह अलैहिस्सलाम को तकलीफ़ पहुंचाने में आगे आगे रहता था वह जल्दी से ले आया ताकि काम जल्द समाप्त हो और इस तबाही मचाने वाली ज़िम्मेदारी से निजात मिले।
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31- यहूदियों के लिए तो सब कुछ गडमड हो गया
इस तरह लकड़ी को फांसी के दरवाज़े तक पहुंचा दिया गया। फांसी देने वाले पुलिस आगे बढ़े और शहरी पुलिस से काम अपने हाथ में ले लिया। उन्होंने नौजवान को सलीब उठाये हुए देखा और फिर मामला गडमड हो गया लोग चीख़ व पुकार मचाने लगे। लोगों ने नौजवान के हाथों से सलीब पकड़ ली, शक की कोई गुंजाइश नहीं थी कि यही वह व्यक्ति है जिसे सलीब दी जानी है। अब वह चीख़ने और शोर मचाने लगा तथा अपने अलग होने का ऐलान करने लगा कि मेरा इस फ़ैसले और सलीब से कोई तअल्लुक़ नहीं है मेरे लकड़ी लाने पर यह मेरे साथ कैसा मज़ाक़ और ज़ुल्म किया जा रहा है। फांसी देने वाले पुलिस बल ने इस जानिब कोई ध्यान नहीं दिया, वह तो उसकी ज़बान ही नहीं समझते थे क्योंकि वह यूनानी और रूमी हाकिम थे।
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32- आदेश का पालन
हर मुजरिम अपने जुर्म से निकलना चाहता है और हर मुजरिम चीख़ता चिल्लाता है। पुलिस ने उसे पकड़ लिया और उसपर फ़ैसला लागू कर दिया। यहूदी दूर खड़े देखते रहे, दुनिया रात की तरह अंधेरी थी और वह सभी इस बात पर मुतमइन थे कि जिसे सलीब दी गई है वह मसीह ही हैं।
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33- ईसा अलैहिस्सलाम का आसमान पर उठाया जाना
सैयदना ईसा इब्ने मरयम अलैहिमास्सलाम को अल्लाह तआला ने यहूदियों के चाल से बचा लिया और उन्हें काफ़िरों के दरमियान से बहुत सम्मान के साथ उठा लिया।
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34- कुरआन इस क़िस्से के बारे में बताता है
अल्लाह का कलाम यहूदियों के बारे में अवगत कराता है।
'फिर अपने कुफ्र और इनकार में यहूदी इतने आगे बढ़े कि मरयम पर घिनौना इल्ज़ाम लगाया। और ख़ुद कहा कि हमने मसीह, मरयम के बेटे ईसा,अल्लाह के रसूल का क़त्ल कर दिया है हालाँकि सही बात यह है कि उन्होंने न उसको क़त्ल किया, न सूली पर चढ़ाया, बल्कि मामला उनके लिये सन्दिग्ध (suspicious) कर दिया गया। जिन लोगों ने इसके बारे में इख़्तिलाफ़ किया है वह भी हक़ीक़त में शक में पड़े हुए हैं। उनके पास इस मामले में कोई इल्म नहीं है, सिर्फ़ अटकलों पर चलते रहे हैं। उन्होंने मसीह को यक़ीनन कत्ल नहीं किया। बल्कि अल्लाह ने उसको अपनी तरफ़ उठा लिया, अल्लाह ज़बरदस्त ताक़त रखने वाला और हिकमत वाला है''। (1)
अल्लाह की मर्ज़ी के अनुसार वह आसमान में हैं, अल्लाह हर चीज़ पर क्रादिर है। ईसा की पैदाइश भी अजीब थी उनकी ज़िन्दगी भी अजीब थी उनका तमाम मामला शुरू से अंत तक अजीब और आम आदत से हट कर था लेकिन अल्लाह की कुदरत से साबित था।
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1, सूरह 04 अन निसा आयत 156 से 158
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35- क़यामत के क़रीब ईसा अलैहिस्सलाम का दोबारा दुनिया में आना
जब अल्लाह चाहेगा ईसा अलैहिस्सलाम आसमान से उतरेंगे और उन यहूदियों और ईसाईयों के ख़िलाफ़ हुज्जत क़ायम करेंगे जो कमी और ज़्यादती का शिकार हो गए हैं। वह दीने हक़ की मदद करेंगे, बातिल वालों को मिटा देंगे जैसा कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ख़बर दी है और बहुत सी सहीह मुतवातिर अहादीस में आया है और जो हर दौर के मुसलमानों का अक़ीदा रहा है और अल्लाह ने सच फ़रमाया है।
'और किताब वालों में से कोई ऐसा न होगा जो उसकी मौत से पहले उस पर ईमान न ले आये और क़यामत के दिन वह उसपर गवाही देगा।" (1)
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1, सूरह 04 अन निसा आयत 159
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36- सैयदना मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नबी बनाये जाने के विषय में ईसा अलैहिस्सलाम की भविष्यवाणी
सैयदना मसीह अलैहिस्सलाम से यहूदियों की लड़ाई, नित नई चालों और और अपनी कमज़ोरी और मददगारों की संख्या कम होने के कारण दावत का काम पूरा न हो सका तो उन्होंने लोगों को छोड़ा और अल्लाह की आज्ञा का पालन किया। और उन्होंने लोगों को एक रसूल की बशारत दी कि वह मेरे बाद आएगा जो उसे पूरा करेगा जिसे मैंने शुरू किया था और जो उसके लिए ख़ास होगी उसे आम करेगा और उसके द्वारा अल्लाह अपनी नेअमत अपने बन्दों पर पूरी करेगा और उसकी मख़लूक़ पर हुज्जत क़ायम हो जायेगी।।
"जब मरियम के बेटे ईसा ने कहा, ऐ बनी इस्राईल में तुम्हारी तरफ़ अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूं तौरात की तस्दीक़ करते हुए जो तुम्हारे सामने है और ख़ुशख़बरी देता हूं एक ऐसे रसूल की जो मेरे बाद आएगा उसका नाम अहमद होगा।" (1)
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1, सूरह 61 अस सफ़ आयत 06
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37- ख़ालिस तौहीद से उलझे हुए अक़ीदे की तरफ़
धर्म के इतिहास का मामला भी बड़ा अजीब व ग़रीब है जिसपर आंखे रोती हैं, दिल पिघलते हैं। वह ईसा मसीह की ख़ालिस तौहीद की दावत, आसान दीन, जो तमाम उलझाव और पेचीदगी और हर तरह की तावील और तब्दीली से पाक थी और एक अल्लाह की इबादत करने, उससे मांगने, उससे विनती करने, और उसी से ख़ालिस मुहब्बत रखने की दावत थी वह उलझे हुए अक़ीदे, समझ में न आने वाले फ़लसफ़े में तब्दील हो गई उनके अनुयायियों ने उनके सिलसिले में ख़ूब अतिश्योक्ति की और उन्हें बहुत आगे पहुंचा दिया कि मानवीय सीमाओं को लांघ कर ख़ुदाई सीमाओं तक पहुंच गए। उन्होंने यहां तक कहा कि "मसीह अल्लाह के बेटे हैं (1) उन्होंने यह भी कहा अल्लाह ने बेटा बनाया है" (2) बेशक अल्लाह मरयम के बेटे मसीह ही हैं (3) उन्होंने एक ख़ुदा जो ऐसा बेनियाज़ है जिसका न कोई बेटा है और न बाप उसे तीन लोगों पर शामिल एक परिवार बना दिया और उन तमाम को ख़ुदा क़रार दिया। चुनांचे उन्होंने कहा, रब, बेटा, रूहल क़ुदुस। उन्होंने मसीह अलैहिस्सलाम की मां मरयम के बारे यह अक़ीदा रखा और पाकीज़गी के साथ साथ इबादत के दर्जे तक पहुंचा दिया कि उन्हें 'अल्लाह की मां बना दिया और गिरजा घरों में उनकी मूर्तियां और तस्वीरें रख दीं और उसके आगे सिर झुकाने, दुआ करने और नज़रें मानने लगे। अल्लाह ने उनके अक़ीदे को सख़्त नापसंद किया और उनके इस अमल की बुराई बयान करते हुए कहा:
"मरयम का बेटा मसीह केवल एक रसूल के इलावा और कुछ नहीं था, उससे पहले और भी बहुत से रसूल गुज़र चुके थे, उसकी मां एक हक्रपरस्त (सत्यवती) औरत थी और वह दोनों खाना खाते थे। देखो, हम किस तरह उनके सामने हक़ीक़त की निशानियां स्पष्ट करते हैं, फिर देखो यह किधर उलटे फिरे जाते हैं। इनसे कहो क्या तुम अल्लाह को छोड़कर उसकी पूजा करते हो जो न तुम्हारे लिए किसी नुक़सान का इख़्तियार रखता है और न फ्रायदे का? सब कुछ सुनने और सब कुछ जानने वाला तो अल्लाह ही है।" (4)
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1, सूरह 09 अत तौबा आयत 30
2, सूरह 02 अल बक़रह आयत 116
3, सूरह 05 अल माएदा आयत 72
4, सूरह 05 अल माएदा आयत 75, 76
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38- ईसा अलैहिस्सलाम एक अल्लाह की इबादत की दावत देने वाले थे
ईसा अलैहिस्सलाम ने भी दूसरे अंबिया की तरह एक अल्लाह की ही इबादत की दावत दी इसीलिए इन्जील में उनका बयान है कि अल्लाह के लिए लिखा हुआ है.... अपने माबूद को सज्दा करो और केवल उसी की इबादत करो।" (1), "अल्लाह के लिए लिखा हुआ है कि अपने माबूद को सज्दा करो और केवल उसी की इबादत करो।" (2) अल्लाह तआला ने फ़रमाया,
"किसी इंसान का यह काम नहीं है कि अल्लाह तो उसको किताब, हुक्म और पैग़म्बरी दे और वह लोगों से कहे कि अल्लाह के बजाय तुम मेरे बन्दे बन जाओ। वह तो यही कहेगा कि सच्चे अल्लाह वाले बनो जैसा कि इस किताब की तालीम का तक़ाज़ा है जिसे तुम पढ़ते और पढ़ाते हो। वह तुमसे हरगिज़ यह नहीं कहेगा कि फ़रिश्तों या पैग़म्बरों को अपना रब बना लो क्या यह मुमकिन है कि एक नबी तुम्हारे मुसलमान होने के बाद भी तुम्हें कुफ़्र का हुक्म देगा। [अल्लाह के आज्ञाकारी बनो]" (3)
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1, इन्जील मती 4:10
2, इन्जील लूक़ा 4:8
3, सूरह 03 आले इमरान आयत 79, 80
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39- कुरआन ईसा अलैहिस्सलाम की दावत के विषय में बताता है
कुरआन में लिखा है कि यही वह किताब है जो अपने से पहले की किताबों की तस्दीक़ करती है और हिफ़ाज़त भी, और सैयदना ईसा अलैहिस्सलाम की ख़ालिस तौहीद की दावत का स्पष्ट स्टाइल में ऐलान भी है अब उसमें कोई कमी ज़्यादती नहीं की जा सकती।
"जिन्होंने कहा कि अल्लाह मरयम के बेटे मसीह ही है वह काफ़िर है। मसीह ने तो कहा था कि ऐ बनी इस्राईल अल्लाह की इबादत करो जों मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी। जो अल्लाह के साथ शिर्क करेगा तो अल्लाह उसपर जन्नत हराम कर देगा उसका ठिकाना जहत्रम होगा और ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं होगा।" (1)
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1, सूरह 05 अल माएदा आयत 72
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40- ईसा अलैहिस्सलाम की दावत में तौहीद का स्थान
प्यारे, सुंदर और प्रभावी स्टाइल के कारण हर उस व्यक्ति को मज़ा आता जो तीहीद के मुक़ाम और अंबिया व रसूलों की जीवनी (सीरत) से वाक़िफ़ हो और अल्नाह तआला को पहचानना, उसके आगे झुकना और उससे डरना जिसकी आदत बन गई हो।
"मसीह ने कभी इस बात को अपने लिए बुरा नहीं समझा कि वह अल्लाह का एक बन्दा हो, और न अल्लाह के फ़रिश्ते इसको अपने लिए बुरा समझते हैं। अगर कोई अल्लाह की बन्दगी को अपने लिए बुरा समझता है और घमंड करता है तो एक वक़्त आएगा जब अल्लाह सब को घेर कर अपने सामने हाज़िर करेगा। उस वक़्त वह लोग जिन्होंने ईमान लाकर अच्छे अपना काम किए है अपना बदला पूरा पूरा पाएँगे और अल्लाह अपनी मेहरबानी से उनको और ज़्यादा बदला देगा और जिन लोगों ने बन्दगी को अपने लिए ज़िल्लत और शर्म का कारण समझा और घमंड किया उनको अल्लाह दर्दनाक सज़ा देगा और अल्लाह के सिवा जिनकी भी सरपरस्ती और मदद पर वह भरोसा रखते हैं उनमें से किसी को भी वह यहाँ नहीं पाएँगे।" (1)
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1, सूरह 04 अन निसा आयत 172, 173
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41- क़यामत का एक दिलकश दृश्य
क्रयामत के दृश्यों में से एक दिल को छू जाने वाले दृश्य को क़ुरआन ने अपने प्रभावी और चमत्कारी स्टाइल में बयान किया है। सैयदना ईसा अलैहिस्सलाम उन बातों से ख़ुद को अलग करने का ऐलान करेंगे जो लोगों ने उनके बारे में झूठ घड़ रखा है या उनके साथ जैसा मामला किया है वह पूरी सच्चाई और स्पष्टता से अपनी दावत की सफ़ाई देंगे और अपनी उम्मत से इस केस में बढ़ा चढ़ा कर पेश करने वालों को बताएंगे कि वह अकेले इस जुर्म के ज़िम्मेदार हैं। क़ुरआन पढ़िए और सूरते हाल की अज़मत और आकर्षक व ख़ूबसूरत मंज़र को महसूस कीजिए।
जब अल्लाह फ़रमायेगा, "ऐ मरयम के बेटे ईसा, क्या तूने लोगों से कहा था। कि अल्लाह को छोड़कर मुझे और मेरी माँ को ख़ुदा बना लो तो वह जवाब में कहेंगे "सुब्हानल्लाह (अल्लाह पाक), मेरा यह काम न था कि वह बात कहता जिसके कहने का मुझे हक़ न था, अगर मैंने ऐसी बात कही होती तो आपको ज़रूर मालूम होता। आप जानते हैं जो कुछ मेरे दिल में है और मैं नहीं जनता जो कुछ आप के दिल में है, आप तो तमाम छुपी हक़ीक़तों के जानने वाले हैं। मैंने उनसे इसके सिवा कुछ नहीं कहा जिसका आपने मुझे हुक्म दिया था, कि अल्लाह की बन्दगी करो जो मेरा रब भी है और तुम्हारा रब भी। मैं उसी वक़्त तक उनका संरक्षक था जबतक कि मैं उनके बीच में था। जब आपने मुझे वापस बुला लिया तो आप उनपर संरक्षक थे और आप तो तमाम ही चीज़ों पर संरक्षक है। अब अगर आप उन्हें सज़ा दें तो वह आप के बन्दे हैं और अगर माफ़ कर दें तो आप ग़ालिब और हिकमत वाले हैं। तब अल्लाह कहेगा "यह वह दिन है जिसमें सच्चों को उनकी सच्चाई फ़ायदा पहुंचाएगी। उनके लिए ऐसे बाग़ हैं जिनके नीचे नहरें बह रही हैं यहाँ वह हमेशा रहेंगे अल्लाह उनसे राज़ी हुआ और वह अल्लाह से राज़ी हुए यही बड़ी कामयाबी है। ज़मीन, आसमान और तमाम मौजूद चीज़ों की बादशाही अल्लाह ही के लिए है और वह हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है।" (1)
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1, सूरह 05 अल माएदा आयत 116 से 120
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42- उलझे हुए अक़ीदे से खुली मूर्तिपूजा तक
मसीही प्रचारक अपने दीन को बचाने के लिए यूरोप चले गए हालांकि मसीह अलैहिस्सलाम ने उन्हें इसका आदेश नहीं दिया था। उन्होंने ने स्पष्ट तौर पर बनी इसाईल की खोई हुई भेड़ों की तरफ़ भेजा था। एक ज़माने तक उनके दरमियान मूर्तिपूजा का प्रचार होता रहा था वह उसमें ठूड़ियों तक दबे हुए थे। यूनानी मूर्तिपूजक थे उन्होंने अल्लाह की सिफ़ात को अलग अलग ख़ुदा की शक्ल दे दी थी और वैसे ही मूर्तियां भी तराश ली थीं। उन्होंने अपनी इबादतगाहों और हैकल में उन्हीं को जगह दे दी थी। कोई रिज़्क़ का ख़ुदा था, कोई रहमत का ख़ुदा था, कोई ग़ज़ब का ख़ुदा था, रूमी पूरी तरह मूर्तिपूजा की ख़ुराफ़ात में दूबे हुए थे। मूर्तिपूजा उनके गोश्त और ख़ून के साथ रच बस गई थी उनकी रूह और ख़ून के साथ दौड़ रही थी वह अलग अलग ख़ुदाओं की पूजा करते थे जब वहां ईसाई पहुंचे तो क़ुस्तनतीन महान ने 306 ईसवी में ईसाईयत क़ुबूल कर ली और इस नए दीन से ऐसे चिमट गया और इतना जोश चढ़ा कि उसने सरकारी धर्म घोषित कर दिया।
फिर तो ईसाईयत के अनुयायियों ने मूर्तिपूजा का अक्रीदा, रूमी तक़लीद और यूनानी फ़िलॉसफ़ी से बहुत सी चीज़ें ग्रहण कर लीं और धीरे धीरे उसके क़रीब होते चले गए जिसका नतीजा यह हुआ कि उनकी असल नबवी रूह और तौहीद की ग़ैरत ग़ायब हो गई। कुछ मुनाफ़िक़ ईसाइयत में दाख़िल हो गए और उन्होंने अपने पुराने अक़ीदे, के साथ मूर्तिपूजा का स्वाद चखा दिया फिर तो एक नया दीन पैदा हुआ जो ईसाईयत और मूर्तिपूजा का समान मिश्रण था।
इस प्रकार आक्रमणकारी ईसाइयत मसीह के रास्ते और उनकी दावत से हट कर दूसरे रास्ते पर चल पड़ी और उसके मानने वाले उस मुसाफ़िर की तरह हो गए जो जाने अनजाने अंधेरी रात में रास्ता भटक गया हो ऐसा व्यक्ति कभी अपने पहले रास्ते घर नहीं पहुंच सकता।
यह वह बारीक हिकमत (सूक्ष्म दर्शिता) है जिसको केवल वही जान सकता है जिसने इस दीन का ऐतिहासिक अध्ययन किया हो। इसी कारण अल्लाह ने उन्हें ज़ाललीन (गुमराह) बताया है जबकि यहूदियों की सिफ़ात मग़ज़ूब (अल्लाह के ग़ज़ब का शिकार) बताई है। चुनांचे मुस्लमानों की ज़बान पर जारी कर दिया
"ऐ अल्लाह! हमें सीधा रस्ता दिखा उन लोगों का रस्ता जिन पर तूने इनआम अता किया उनका रस्ता नहीं जो तेरे ग़ज़ब के शिकार हुऎ और जो भटके हुऎ गुमराह हैं।" (1)
यूरोप की घटना इंसानियत की घटना है जिसकी रहनुमाई एक लंबे समय तक यूरोप करता रहा है और बराबर उसी के शासन और नियंत्रण में है।
"तमाम इख़्तियारात अल्लाह के ही हाथ में है पहले भी और बाद में भी।" (2)
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1, सूरह 01 अल फ़ातिहा 6, 7
2, सूरह अर रूम आयत 04
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किताब: कसास उन नबीयीन
मुसन्निफ़ : सैयद अबुल हसन नदवी रहमतुल्लाहि अलैहि
अनुवाद : आसिम अकरम अबु अदीम फ़लाही
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