Khulasa e Qur'an - surah 94 | surah ash sharah

Khulasa e Qur'an - surah | quran tafsir

खुलासा ए क़ुरआन - सूरह (094) अश- शरह


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ


सूरह (094) अश- शरह


नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर अल्लाह का ख़ास एहसान और नसीहत

इस सूरह का पिछली सूरह अज़ जुहा से गहरा संबंध है। यहां भी अल्लाह ने एहसानात याद दिला कर नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को तसल्ली दी है: क्या हमने तुम्हारा सीना तुम्हारे लिए नहीं खोल दिया और वह बोझ उतार दिया जिसने तुम्हारी पीठ झुका दी थी। और तुम्हारे ज़िक्र को बुलन्द कर दिया। तो जान लो कि कठिनाई के साथ आसानी है। निस्संदेह कठिनाई के साथ आसानी है। इसलिए दावत के काम से फ़ारिग़ होने के बाद पूरी तवज्जुह के साथ अपने रब की इबादत करें। (1 से 8) 


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही

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