Jannati aurton ki sardar kon-kon hain? (part 4-4)

Jannati aurton ki sardar kon-kon hain? (part 4-4)


जन्नती औरतों की सरदार (क़िस्त 4-4)


4. फ़ातिमा रज़ि अल्लाहु अन्हा बिन्ते मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)

फ़ातिमा रज़ि अल्लाहु अन्हा की फ़ज़ीलत:

उम्मुल मोमेनीन उम्मे सलमा रज़ि अल्लाहु अन्हा ने बयान किया कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मेरे घर में थे कि सैयदा फ़ातिमा रज़ि अल्लाहु अन्हा एक हंडिया लेकर आईं जिसमें गोश्त से तैयार किया हुआ ख़ज़ीरा (एक खाना जो क़ीमे और आटे से तैयार होता है) था। जब वह नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आईं तो आपने फ़रमाया अपने शौहर और दोनों बेटों को बुला कर लाओ इतने में सैयदना अली, हसन, और हुसैन रज़ि अल्लाहु अन्हुम आए और वह सब एक साथ बैठकर ख़ज़ीरा खाने लगे। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक दुकान जैसी जगह पर थे और वहीं आप के सोने की जगह भी थी नीचे ख़ैबर की बनी हुई चादर बिछी हुई थी, उम्मे सलमा रज़ि अल्लाहु अन्हा नमाज़ पढ़ रही थीं अल्लाह तआला ने उसी समय यह आयत नाज़िल की 

إِنَّمَا يُرِيدُ اللهُ لِيُذْهِبَ عَنْكُمُ الرِّجْسَ أَهْلَ الْبَيْتِ وَيُطَهِّرَكُمْ تَطْهِيرًا

"अल्लाह तो चाहता है की तमाम अहले बैत से गंदगी को दूर कर दे और तुम्हें बिल्कुल पाक साफ़ कर दे।" [सूरह 33 अल अहज़ाब 33]


इसके पश्चात नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने चादर का बचा हुआ भाग लिया और उन्हें ढांप लिया फिर अपना हाथ आसमान की तरफ़ उठाया और दुआ की

 اللَّهُمَّ هَؤُلَاءِ أَهْلُ بَيْتِي وَخَاصَّتِي فَأَذْهِبْ عَنْهُمْ الرِّجْسَ وَطَهِّرْهُمْ تَطْهِيرًا اللَّهُمَّ هَؤُلَاءِ أَهْلُ بَيْتِي وَخَاصَّتِي فَأَذْهِبْ عَنْهُمْ الرِّجْسَ وَطَهِّرْهُمْ تَطْهِيرًا 

"ऐ अल्लाह यह मेरे घर वाले और ख़ास हैं इनसे गंदगी दूर कर दे और इन्हें पाक कर दे" उम्मे सलमा रज़ि अल्लाहु अन्हा कहती हैं कि मैंने भी अपना सिर यह कहते हुए चादर के अंदर करना चाहा कि मैं भी आप के साथ शामिल हूं तो आप स ने फ़रमाया बेशक तुम ख़ैर पर हो बेशक तुम ख़ैर पर हो।" [मुसनद अहमद 8710, 11388, 11391]


उम्मुल मोमेनीन उम्मे सलमा रज़ि अल्लाहु अन्हा से एक और रिवायत भी है,

नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़दक की तैयार हुई एक चादर उनको उढ़ा दी और अपना हाथ सब के सिर पर रखकर फ़रमाया, "ऐ अल्लाह यह आले मुहम्मद हैं तू अपनी रहमतें और बरकतें मुहम्मद और आले मुहम्मद पर नाज़िल फ़रमा बेशक तू ही प्रशंसा और बुज़ुर्गी के लायक़ है।" उम्मे सलमा रज़ि अल्लाहु अन्हा कहती हैं कि मैंने भी अपना सिर चादर के अंदर दाख़िल करने की कोशिश की तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मेरे हाथ से चादर खींच लिया और फ़रमाया बेशक तुम तो पहले से ही ख़ैर और भलाई पर हो। [जामे तिर्मिज़ी 3871/ मुसनद अहमद 11390]


उम्मुल मोमेनीन आयेशा रज़ि अल्लाहु अन्हा का बयान है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक सुबह निकले आपके कंधे पर ऊंट के कजावे वाली एक काली ऊनी चादर थी, उसी समय हसन रज़ि अल्लाहु अन्हु आए आपने उन्हें चादर में ले लिया, उसके बाद हुसैन रज़ि अल्लाहु अन्हु आए आपने उन्हें चादर में ले लिया, फिर फ़ातिमा रज़ि अल्लाहु अन्हा आईं आप ने उन्हें भी चादर में दाख़िल कर लिया फिर अली रज़ि अल्लाहु अन्हु आए आपने उन्हें भी चादर में दाख़िल कर लिया और फिर सूरह 33 अल अहज़ाब की इस आयत की तिलावत की

إِنَّمَا يُرِيدُ اللهُ لِيُذْهِبَ عَنْكُمُ الرِّجْسَ أَهْلَ الْبَيْتِ وَيُطَهِّرَكُمْ تَطْهِيرًا

"अल्लाह तो चाहता है की तमाम अहले बैत से गंदगी को दूर कर दे और तुम्हें बिल्कुल पाक साफ़ कर दे।" 

[सही मुस्लिम 6261]


नजरान के ईसाइयों का एक प्रतिनिधि मंडल (delegation) आया था रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उन्हें इस्लाम की दावत दी लेकिन उहोने इंकार कर दिया तो यह आयत नाज़िल हुई।

"इल्म आ जाने के बाद अब इस मामले में तुमसे कोई झगड़ा करे तो ऐ नबी! उससे कहो कि “(अच्छा मैदान में) आओ हम अपने बेटों को बुलाएं तुम अपने बेटों को, हम अपनी औरतों को बुलाएं और तुम अपनी औरतों को, हम अपनी जानों को बुलाएं और तुम अपनी जानों को उसके बाद हम सब मिलकर (अल्लाह की बारगाह में) गिड़गिड़ाएं और दुआ करें कि जो झूठा हो उस पर अल्लाह की लानत हो।" [सूरह 03 आले इमरान आयत 61]


इसकी वज़ाहत हदीस में यूं मिलती है।

"जब यह आयत {فَقُلْ تَعَالَوْا نَدْعُ أَبْنَاءَنَا وَأَبْنَاءَكُمْ (आप कह दीजिए हम अपने बेटों को बुला लें और तुम अपने बेटों को बुला लो) उतरी तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अली, फ़ातिमा, हसन और हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हुम को बुलाया और फ़रमाया, "ये मेरे अहले बैत (घर वाले) हैं।" [सही मुस्लिम हदीस नंबर 6220/ किताब फ़ज़ाएलिस सहाबा, अली बिन अबी तालिब के फ़ज़ाएल में]


नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया,

"फ़ातिमा मेरे जिस्म का टुकड़ा है जिसने उसे नाराज़ किया उसने मुझे नाराज़ किया।" [सही बुख़ारी 3714, 3767]


"फ़ातिमा मेरे जिगर का टुकड़ा है जो चीज़ उसे ख़ुश करती है वह मुझे ख़ुश करती है और जिसने उसे तकलीफ़ पहुंचाया उसने मुझे तकलीफ़ दी।" [सही मुस्लिम 6308/अल मुस्तदरक लिल हाकिम 4734]


"नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम औरतों में सबसे ज़्यादा फ़ातिमा रज़ि अल्लाहु अन्हा से और मर्दो में सबसे ज़्यादा अली रज़ि अल्लाहु अन्हा से मुहब्बत करते थे।" [अल मुस्तदरक लिल हाकिम 4735]


सैयदना जाफ़र, सैयदना अली और सैयदना ज़ैद बिन हारिसा एक साथ इकट्ठे हुए। सैयदना जाफ़र रज़ि अल्लाहु अन्हु ने कहा: अल्लाह के रसूल तुम में से सबसे ज़्यादा मुझसे प्यार करते हैं। सैयदना अली रज़ि अल्लाहु अन्हु बोले नहीं अल्लाह के रसूलु को तुम में सबसे ज़्यादा मुझसे मुहब्बत है। सैयदना ज़ैद बोल पड़े, अल्लाह के रसूल को तुम में सबसे ज़्यादा मुझसे प्यार हैं। फिर वह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आए और अनुमति के बाद अंदर आकर पूछा, ऐ अल्लाह के रसूल आपको हम में से सबसे ज़्यादा मुहब्बत किससे है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया "फ़ातिमा के साथ" उन्होंने कहा हम तो मर्दो के बारे में पूछ रहे हैं। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया, "ऐ जाफ़र! तुम्हारी शक्ल मेरी शक्ल से मिलती जुलती है और मेरी शक्ल तुम्हारी शक्ल से मिलती जुलती है, तुम मुझसे और मेरे ख़ानदान में से हो। ऐ अली! तुम मेरे दामाद और मेरी औलाद के बाप हो मैं तुम्हारा हूं और तुम मेरे हो, और ऐ ज़ैद तुम मेरे आज़ाद किये हुए ग़ुलाम हो और मुझसे हो तुम्हारा मुझसे बहुत गहरा तअल्लुक़ है और मुझे सबसे ज़्यादा महबूब हो।" [मुसनद अहमद 11708/अल मुस्तदरक लिल हाकिम 4957]


अली रज़ि अल्लाहु अन्हु से रिवायत हैं कि एक रात रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमारे यहां रात गुज़ारी उनके पास हसन और हुसैन दोनों सोए हुए थे। हसन ने पानी मांगा तो आप मिश्कीज़ा के पास गए और पानी उंडेला जब पानी लेकर आए तो हुसैन ने प्याला पकड़ लिया, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने प्याला लेकर पहले हसन को पानी पिलाया फिर हुसैन को पिलाया। फ़ातिमा रज़ि अल्लाहु अन्हा बोल पड़ीं ऐसा महसूस होता है कि आप हसन से ज़्यादा मुहब्बत करते हैं नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा, नहीं! बल्कि हसन ने पहले पानी मांगा था उसके बाद फ़रमाया "मैं, तुम, यह दोनों (हसन हुसैन) और यह सोया हुआ व्यक्ति (अली) आख़िरत के दिन एक मकान में होंगे।" [अस सिलसिला अस सहीहा 3457/ अल मुअजम अल कबीर 2556/ अल मुस्तदरक लिल हाकिम 4664]


रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की भविष्यवाणियों में से एक यह भी है कि क़यामत के क़रीब इमाम महदी पैदा होंगे जो मुसलमानों को उनकी बस्ती से निजात और इस्लाम को ग़लबा दिलाएंगे वह फ़ातिमा रज़ि अल्लाहु अन्हा की नस्ल से होंगे।

उम्मे सलमा रज़ि अल्लाहु अन्हा ने कहा कि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुना "महदी मेरी बेटी फ़ातिमा की औलाद में से होगा।" (हसन) [सुनन अबु दाऊद 4284/ सुनन इब्ने माजा 4086/ अल मुस्तदरक लिल हाकिम 8672]


फ़ातिमा रज़ि अल्लाहु अन्हा जन्नती औरतों की सरदार:

उम्मुल मोमेनीन आयेशा सिद्दीक़ा रज़ि अल्लाहु अन्हा का बयान है कि फ़ातिमा रज़ि अल्लाहु अन्हा वैसे ही चलते हुए आईं जैसे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चलते थे, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनका स्वागत किया, ख़ुश रहो मेरी बेटी! फिर उन्हें अपने दाएं या बाएं तरफ़ बिठाया और राज़ की कोई बात कही तो वह रोने लगीं मैंने उनसे पूछा तुम रोने क्यों लगीं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फिर राज़ की कोई बात उनके कान में बताई तो वह हंस पड़ीं। मैंने पूछा आज ग़म के बाद ख़ुशी की जो कैफ़ियत देखी है ऐसी कैफ़ियत पहले कभी नहीं देखी थी फिर मैंने फ़ातिमा से एक ही समय में रोने और हंसने के राज़ के बारे में पूछा तो उन्होंने जवाब में कहा, मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के राज़ को ज़ाहिर नहीं कर सकती। चुनांचे जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मृत्यु हो गई तो मैंने अपने हक़ का वास्ता देकर पूछा तो उन्होंने बताया कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पहली राज़ की बात यह कही थी बेशक जिब्रील प्रत्येक वर्ष मुझ पर एक बार क़ुरआन पेश करते थे लेकिन इस वर्ष उन्होंने दो बार क़ुरआन पेश किया, मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि मेरी मौत का वक़्त क़रीब ही है इसलिए अल्लाह से मुहब्बत करना और सब्र करना, इस कारण मैं रो पड़ी जैसा कि अपने देखा फिर जब रसूलुल्लाह ने मुझे परेशान देखा तो मुझसे कहा, "मेरे घर वालों में तुम्हीं सबसे पहले मुझसे आ मिलोगी, क्या तुम इस बात पर ख़ुश नहीं हो कि तुम मोमिन औरतों और इस उम्मत की तमाम औरतों की सरदार होगी इसपर मैं हंस पड़ी जैसा कि आप ने देखा।" [सही बुख़ारी 3623, 3625, 3634, 3715, 4433, 6285/ सही मुस्लिम 6312 से 6314/सुनन अबु दाऊद / जामे तिर्मिज़ी 3872, 3873, 3893/ अस सिलसिला अस सहीहा 2815/ मुसनद अहमद 11014/ अल मुस्तदरक लिल हाकिम 7715]


حَسْبُكَ مِنْ نِسَاءِ الْعَالَمِينَ مَرْيَمُ ابْنَةُ عِمْرَانَ وَخَدِيجَةُ بِنْتُ خُوَيْلِدٍ وَفَاطِمَةُ بِنْتُ مُحَمَّدٍ وَآسِيَةُ امْرَأَةُ فِرْعَوْنَ

"तमाम दुनिया की औरतों में मरयम बिन्ते इमरान, ख़दीजा बिन्ते ख़ुवैलिद, फ़ातिमा बिन्ते मुहम्मद और फ़िरऔन की बीवी आसिया तुम्हारे लिए काफ़ी हैं।" [जामे तिर्मिज़ी 3878/ किताबुल मनाक़िब अन रसूलिल्लाह ख़दीजा रज़ि अल्लाहु अन्हा की फ़ज़ीलत के विषय में, मिश्कातुल मसाबीह 6190/ मुसनद अहमद 10413/ अल मुस्तदरक लिल हाकिम 4745, 4746]


خَطَّ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الْأَرْضِ أَرْبَعَةَ خُطُوطٍ قَالَ تَدْرُونَ مَا هَذَا فَقَالُوا اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَفْضَلُ نِسَاءِ أَهْلِ الْجَنَّةِ خَدِيجَةُ بِنْتُ خُوَيْلِدٍ وَفَاطِمَةُ بِنْتُ مُحَمَّدٍ وَآسِيَةُ بِنْتُ مُزَاحِمٍ امْرَأَةُ فِرْعَوْنَ وَمَرْيَمُ ابْنَةُ عِمْرَانَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُنَّ أَجْمَعِينَ

रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ज़मीन पर चार लकीरें खींची और पूछा क्या तुम जानते हो यह क्या है? लोगों ने कहा अल्लाह और अल्लाह के रसूल को बेहतर पता है फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया:

"जन्नत की औरतों में ख़दीजा बिन्ते ख़ुवैलिद, फ़ातिमा बिन्ते मुहम्मद, आसिया बिन्ते मुज़ाहिम और मरयम बिन्ते इमरानसबसे अफ़ज़ल हैं।" [अस सिलसिला अस सहीहा 3470, मुसनद अहमद 10412 से 10414, 10557, 11590/ अल मुस्तदरक लिल हाकिम 3836, 4160, 4754, 4852]


سَيِّداتُ نِسَاءِ أَهْلِ الْجَنَّةِ بَعْدَ مَرْيَمَ بنتِ عِمْرَانَ، فَاطِمَةُ، وَخَدِيجَةُ، وَآسِيَةُ امْرَأَةُ فِرْعَوْنَ .

"जन्नत में औरतों की सरदार मरयम बिन्ते इमरान के बाद फ़ातिमा, ख़दीजा और फ़िरऔन की बीवी आसिया होंगी।" [अस सिलसिला अस सहीहा 3507]


سَيِّدَاتُ نِسَاءِ الْجَنَّةِ أَرْبَعٌ مَرْيَمُ بِنْتُ عِمْرَانَ وَخَدِيجَةُ بِنْتُ خُوَيْلِدٍ وَفَاطِمَةُ ابْنَةُ مُحَمَّدٍ وَآسِيَةُ"

"जन्नत की औरतों में चार सरदार होंगी मरयम बिन्ते इमरान, फ़ातिमा बिन्ते रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, ख़दीजा बिन्ते ख़ुवैलिद, और आसिया।" [अल मुस्तदरक लिल हाकिम 4754, 4853/ मुसनद अहमद 10412/ मुसनद बनी हाशिम, अब्दुल्लाह बिन अब्बास]


हुज़ैफ़ा रज़ि अल्लाहु अन्हु ने बयान किया कि मैंने एक दिन मग़रिब और ईशा की नमाज़ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ पढ़ी, फिर मैं आप के पीछे पीछे चला आप ने मेरी आवाज़ सुनी तो पूछा कौन, हुज़ैफ़ा! मैं बोला जी! मैं हुज़ैफ़ा हूं।आप ने फ़रमाया अल्लाह तुम्हें और तुम्हारी मां को बख्शे, फिर बोले यह एक फ़रिश्ता था जो इस से पहले ज़मीन पर कभी नहीं उतरा था, उसने अपने रब से मुझे सलाम करने और यह ख़ुशख़बरी देने की अनुमति मांगी थी कि "फ़ातिमा जन्नती औरतों की सरदार और हसन हुसैन जन्नत में जवानों के सरदार होंगे।" (हसन) [जामे तिर्मिज़ी 3781/ मुसनद अहमद 10414, 11376/अल मुस्तदरक लिल हाकिम 4721, 4722]


फ़ातिमा रज़ि अल्लाहु अन्हा को यह स्थान यूं ही नहीं मिला था कि वह नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की प्यारी बेटी थीं, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तो न्याय स्थापित करने और इस्लाम के संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए आये थे जब इंसाफ़ और न्याय का मामला होता तो किसी रिश्तेदारी या ख़ानदान का लिहाज़ नहीं होता था रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तो मानवता के रहनुमा और मुकम्मल इंसान थे उन्हें अल्लाह ने आदर्श (ideal) बनाकर तमाम इंसानों की हिदायत के लिए चुना था इसलिए अगर कोई न्याय के ख़िलाफ़ कोई सिफ़ारिश करता तो आप नाराज़ होते और न्याय का फ़ैसला करते हदीस में एक वाक़िआ बयान हुआ है- 

"फ़तह ए मक्का के दिन बनी मख़ज़ूम की एक औरत (एक रिवायत में किसी मर्द के चोरी करने का ज़िक्र है) फ़ातिमा बिन्ते अस्वद ने चोरी की तो क़ुरैश ने आपस में एक मीटिंग की और एक दूसरे से पूछने लगे कि कौन है जो रसूलुल्लाह के पास सिफ़ारिश करे अंत में यह तय हुआ कि उसामा बिन ज़ैद से अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ज़्यादा प्यारे हैं चुनांचे उसामा रज़ि अल्लाहु अन्हु रसूलुल्लाह के पास सिफ़ारिश लेकर आये जैसे ही उन्होंने बात की रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चेहरे का रंग बदलने लगा फिर फ़रमाया "क्या तुम अल्लाह की हुदूद में सिफ़ारिश करते हो फिर आप खड़े हुए और एक तक़रीर की तुमसे पहले के लोग और बनी इस्राईल इसीलिए बर्बाद हुए कि जब उनमें से इज़्ज़तदार घराने का कोई व्यक्ति चोरी करता तो उसे छोड़ दिया जाता और जब कोई कमज़ोर क़बीले का कोई व्यक्ति चोरी करता तो उस पर हद (सज़ा) लागू होती, क़सम है उस ज़ात की जिसके क़ब्ज़े में मेरी जान है मुहम्मद की बेटी फ़ातिमा भी चोरी करती तो मैं उसका भी हाथ काटता।" [सही बुख़ारी 3475, 6788/ सही मुस्लिम 4410 से 4413/ जामे तिर्मिज़ी 1430 / सुनन अबु दाऊद 4373, 4374/ सुनन इब्ने माजा 2547/सुनन निसाई 4900 से 4907/ मुसनद अहमद 6625, 6626/ अल मुस्तदरक लिल हाकिम 8145, 8147]


एक रिवायत में यह भी है, 

बनी मख़ज़ूम की एक औरत सामान उधार लेती थी और पैसे नहीं देती थी या इनकार कर देती थी तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उसका हाथ काटने का आदेश दिया लोगों ने उसामा बिन ज़ैद से सिफ़ारिश कराई तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया, "अगर मेरी बेटी फातिमा भी यह जुर्म करती तो मैं उसका भी हाथ काट देता।" [मुसनद अहमद 6623, 6624]


अगर फजीलत की बुनियाद रिश्तेदारी या ख़ूनी रिश्ता होता तो हक़ीक़ी चचा अबु लहब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का सबसे बड़ा शत्रु न होता और भतीजे की हिलाकत की दुआ और उनके ख़िलाफ़ नित नई साज़िशें न करता, अबु लहब की मुज़म्मत में कुरआन की आयात बल्कि सूरह नाजिल न होती। अबू तालिब हर मौक़ा पर रसूलुल्लाह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का साथ देने और पूरी तरह सहायता करने और नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बार-बार यकीन दिलाने के बावजूद केवल "ला इलाहा इल्लल्लाह" का इक़रार न करने के कारण जहन्नम के मुस्तैिक न ठहरते और कुरआन की यह आयत إِنَّكَ لَا تَهْدِى مَنْ أَحْبَبْتَ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ يَهْدِى مَن يَشَآءُ ۚ وَهُوَ أَعْلَمُ بِٱلْمُهْتَدِينَ  "तुम जिसे चाहो हिदायत नहीं दे सकते बल्कि अल्लाह जिसे चाहता है हिदायत देता है उसे मालूम है कि हिदायत का तलबगार कौन है।" (सूरह 28 अल क़सस आयत 56/ सही बुख़ारी 4772) नाज़िल न होती। 

इस्लाम में कोई रिश्तेदारी या ख़ूनी रिश्ता काम नहीं आता है यहां तो उसे अपना कर एक हब्शी ग़ुलाम जिसका वहां के समाज में कोई स्थान न था वह मुअज़्ज़िन ए रसूल बनता है और जब वह मदीने की गलियों में चलता है तो सरकार को उसके क़दमों की चाप जन्नत में सुनाई देती है। इसीलिए नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सबसे पहले अपने घर वालों को और अपने क़बीले वालों को उनका अलग-अलग नाम लेकर पुकारा था और उन्हें ख़ुद को अल्लाह के अज़ाब और जहन्नम की आग से बचाने के लिए उपदेश देते हुए साफ़-साफ़ ऐलान कर दिया था कि मुझसे माल व दौलत तो ले लो लेकिन मैं आख़िरत में तुम्हें कोई लाभ नहीं पहुंचा सकता वहां तुम्हारे आमाल ही तुम्हारे काम आएंगे। 

"जब सूरह अश शुअरा की आयात 214 وَأَنذِرْ عَشِيرَتَكَ الْأَقْرَبِينَ (अपने क़रीबी रिश्तेदारों डराओ) तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया "ऐ मेरी बेटी फ़ातिमा सुनो, ऐ मेरी फूफी सफ़िया सुनो मैं तुम्हारे लिए अल्लाह के पास कोई इख़्तियार नहीं रखता, वहां मैं किसी के काम नहीं आ सकता अलबत्ता तुम दोनों मेरे माल से जो चाहो ले सकती हो।"

"ऐ क़ुरैश के लोगो! ख़ुद को अल्लाह के अज़ाब और जहन्नम की आग से बचा लो, ऐ काब बिन लोई और मुर्रा बिन काब के बेटों, ऐ अब्दे शम्स की औलाद, ऐ अब्दे मुनाफ़ के सपूतो! अपने आप को अल्लाह के अज़ाब से बचा लो, ऐ हाशिम और अब्दुल मुत्तलिब के ख़ानदान वालो! ख़ुद को अल्लाह के अज़ाब से बचा लो, ऐ मेरे चचा अब्बास अल्लाह की शरण में आजाओ मैं अल्लाह के यहां तुम्हारे मामले में कोई इख़्तियार नहीं रखता।" [सही बुख़ारी 2753, 3527, 4771/ सही मुस्लिम 205, 501 से 504, 506, 508/ जामे तिर्मिज़ी 3184, 3185 / सुनन निसाई 3674 से 3678 मुसनद अहमद 8695,  9856, 10511, 10513]


आसिम अकरम अबु अदीम फ़लाही

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