इब्राहिम खलीलुल्लाह से इस्माइल ज़बीउल्ला तक
जमीन और आसमान की हर चीज़ इस बात की गवाही दे रही थी के इस कायनात का खालिक बस एक ही रब है,असमान में गरदिश करने वाले चाँद सूरज सितारे वा सय्यारे भी गवाही दे रहे थे के हमें बस एक ही रब ने पैदा किया है,बे नमूना व बे सुतून खड़ा आसमां जिसमें कोई शिगाफ़ नही और लहलहाती ,हवाएं शोर मचा रहीं थीं कि अपने रब के साथ किसी को शरीक ना करो,जो सितारे इस क़ायनात के वाहिद रब की शहादत दे रहे थे, इन के बारे में तो कुछ और ही सरगोशियाँ होने लगी थी।
जमीन के किसी गोशे में एक दरबार लगा था, जिस का बादशाह अपनी ख़ुदाई का घमंड़ लिये रियाया के हर फर्द पर जलाल बना हुआ था, बादशाह नमरूद ! इंतिहाई संग दिल ज़ालिम जाबिर व मुताक़ब्बिर बादशाह !
लेकिन ये क्या के आज उस के दरबार में नजूमी गमनाक और सर झुकाये बैठे हैं।
नमरूद जरा परेशान हो गया, सवाल किया "ऐ नजूमियों!! किया बात आज तुम परेशान नज़र आते हो?"
नजूमी भला किस तरह ज़ालिम बादशाह को उस की हलाकत की खबर सुनाते। चुनाचे डरते डरते कहने लगे "ऐ नमरूद आसमान में एक सितारा नमुदार हुआ है और आज से पहले ऐसा सितारा कभी नमूदार नही हुआ, ऐ नमरूद ये सितारा तेरी हुकूमत के जवाल की खबर देता है, तेरी रियाया में एक लड़का पैदा होगा जो तेरी हुकूमत का तख्ता पलट देगा।"
ये सुन कर पहले नमरूद परेशान हुआ फिर हुक्म जारी कर दिया।
" ऐ मर्दो तुम अपनी औरतों से अलग रहो और इस दिन के बाद जो भी बच्चा पैदा हो उसे क़त्ल कर दिया जाए
(सूरह अनाम आयत न.74 तफ़्सीर इब्ने कसीर)
हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की विलादत इन्ही दिनों में हुई लेकिन अल्लाह पाक ने आप अलैहिस्सलाम को जालिमों से महफूज रखा।
इब्राहिम अलै.के वालिद आज़र ने नमरूद के डर से आप को एक गार में छुपा दिया था जहां आप जवान हुए आज़र के दो बेटे और थे हारान और नाहूर। लूत अलैहिस्सलाम हारान के बेटे और इब्राहिम अलैहिस्सलाम के भतीजे थे।
आप जब जवान हुए तो आज़र उन्हें घर वापस ले आये और आपका निकाह सारा अलैहिस्सलाम से हुआ। इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने देखा उनका बाप आज़र पत्थर को तराश कर मूर्तियां बनाता है चुनाचे अपने बाप से सवाल करने लगे
"अब्बा जान ये क्या है?
वालिद ने कहा "ये हमारे खुदा हैं"
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने ताज़्ज़ुब से कहा "ये कैसे खुदा है जिनको आप पत्थर के टुकड़ों से तराश रहे हैं"
पत्थरों को तराश तराश कर इनके दिल खुद पत्थर हो चुके थे फिर ये लोग कहाँ से उस बात को समझते।
लेकिन इब्राहिम अलैहिस्सलाम को अल्लाह ने रुश्द व हिदायत से नवाजा था। आप इंतिहाई बुरदबार और सलीमुल फितरत इंसान थे अल्लाह ऐसे ही लोगो से मुहब्बत करता है तदबबुर और तफक्कुर (सोच समझ कर) काम लेते हैं चुनाचे इब्राहिम अलैहिस्सलाम उन खुदाओं से बेज़ार आसमान पर नज़रें जमाएं तदबबुर करने (सोचने) लगे थे। चाँद, सूरज, सितारों के आकार व साख्त और उन की रोशनी को देख कर कहने लगे "ये मेरे खुदा हैं लेकिन ज्यादा देर नही गुज़री उन का दिल मायूस हो चुका था और कहता जाता ये "कैसे खुदा हैं जो ग़ुरूब होने वाले मेरे खुदा नही हो सकते।"
नफ़्स लववामा ने आवाज़ दी और नफ़्स मुतमईन्ना ने लब्बेक कह कर पुकार उठा।
"मैंने सब से यकसु होकर अपनी जात को उस की तरफ मुतवज़्ज़ा कर लिया है ,जिसने आसमान और जमीन को पैदा किया है ,में हरगिज़ मुशरिकों में से नही हूं।"
(सूरह अनाम आयत 79)
लेकिन वालिद को दावत ए हक़ पर बुलाना सबसे बड़ा चैलेंज था चुनाचे एक दिन इब्राहिम अलैहिस्सलाम अपने वालिद से कहने लगे।
अब्बा आप ऐसी चीज़ों को क्यों पूजते हैं जो ना सुने ना देखें और ना आपके कुछ काम आ सकें।
(सूरह मरियम आयत 42)
लेकिन हाय बदबख्ती के इन के बाप का जवाब इसके सिवा कुछ ना था के मै तुझे सन्ग्सार करदूंगा। बाप बेटे में जबरदस्त गुफ्तगू होने लगी जिस का तफसीली जिक्र सूरह मरियम 41 से 48 में किया गया है।
बेटे ने बाप को बेहतरीन और उम्दा तरीके से दावत हक़ दी लेकिन बाप ने सिवाए संगसार करने की धमकी के कोई जबाब न दिया, आप की रहम दिली व मुहब्बत थी कि आप अपने वालिद को मगफिरत की दुआ की तसल्ली देते रहे लेकिन रब्बे जुल जलाल को एक मुशरिक की मगफिरत बिल्कुल ना गवारा थी और इब्राहिम को उन के लिए दुआ ए मगफिरत करने से मना कर दिया गया चुनाचे हदीस शरीफ में है कयामत के दिन हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपने वालिद आज़र से मिलेंगे तो आज़र के चहरे पर गर्द गुवार सियाही होगी हज़रत इब्राहीम अलै फरमायंगे " क्या मैने आप से नही कहा था आप मेरी नाफरमानी ना करे?" ,वो कहैंगे, "आज में ना फ़रमानी नही करूँगा" हज़रत इब्राहीम फ़रमाएंगे "या रब तूने मुझे से वादा किया था जिस दिन लोग (क़ब्रो से उठाए) जाएंगे उस तू मुझे रुसवा नही करेगा,इस से बड़ कर रुसवाई क्या होगी कि मेरा बाप रहमत से दूर है (जहन्नम में) जा रहा है। "
अल्लाह फरमाएगा "मैने जन्नत काफ़िरो पर हराम कर दी है फिर फरमाया जाएगा ऐ इब्राहिम जरा अपने पैरों के नीचे देखो क्या है, वो देखेंगे तो ज़िब्ह किया हुआ जानवर खून में लुथड़ा हुआ पड़ा होगा, जिसकी टांगो से पकड़ कर दोजख में फेंक दिया जाएगा
(सहीह बुखारी :3350)
इब्राहिम अलैहिस्सलाम को जिस कौम की तरफ भेजा गया था,वो लोग साल में दो बार बहुत बड़ा जश्न मनाते थे जब सब लोग जश्न के लिए निकलने लगे तो इब्राहिम अलैहिस्सलाम बीमारी का बहाना बनाकर वही रुक गए।
आप उनके बुतखाने में दाखिल हुए और तमाम बुतों को तोड़ डाला और एक बड़े बुत के हाथ कुल्हाड़ी दे दी,इसका जिक्र सूरह अम्बिया में तफ़्सील से मिलता है।
चुनाचे आप की कौम जब वापस आई तो सब इब्राहिम अलैहिस्सलाम को इल्ज़ाम देने लगे उस वक़्त इब्राहिम ने बेहतरीन हिकमत से अपने लोगो को दावत ए हक़ देते हुए कहने लगे "भला इस बड़ी बुत से पूछ लो, अगर ये बोलते हैं?
उन की इस बात को सुन कर सब अपने नफ़्सो की तरफ पलटे आखिर ये कैसे कर सकता है?
लेकिन हाय बदबख्ती उन पत्थर तराश ने वालो के दिल पत्थर हो चुके थे ,सिवाय आपकी बीबी सारा अलैहिस्सलाम के और लूत अलैहिस्सलाम के जो आपके भतीजे थे आप पर कोई ईमान ना लाया।
दावत ए ईमान देने वालो के साथ हमेशा यही होता है या तो ज़िन्दान (जेल) के नज़र कर दिया जाता है या आग के घड़ो की ग़िज़ा बना दिया जाता है।
चुनाचे आपको आतिश दान की नज़र करने का फैसला कर दिया गया।
आग का अलाव तैयार किया जाने लगा लेकिन इब्राहिम अलैहिस्सलाम का ईमान ज़रा भी ना डगमगाया।
इस दौरान नमरूद ने इब्राहिम अलैहिस्सलाम से पूछा "ऐ इब्राहिम तेरा रब कौन है?"
इब्राहिम अलैहिस्सलाम जबाब दिया "वही है जो मुर्दों को ज़िंदा करता है और सूरज को मशरिक़ से निकलता है बस अगर तू खुदा है तो सूरज को मग़रिब से निकाल।"
नमरूद हैरान रह गया लेकिन अल्लाह जालिमो को हिदायत नही देता (अल क़ुरआन)
उधर आग को जलाने का सामान हो चुका था आप को आग में फेंकने के लिए मन्जनीख (सुतून) तैयार की जा चुकी थी हैज़न नामी एक शख्स ने तैयार की थी जो इससे पहले कभी नही बनाई गई (सूरह अम्बिया 68)
लोगो ने हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को पकड़ कर बांध दिया मस्के कस दी। लेकिन हाय इब्राहीम तेरा ईमान तो बे मिसाल था इस वक़्त भी अपने रब से उम्मीद बांधे अपने रब को पुकार रहा था।
(ऐ अल्लाह)तेरी सिवा कोई माबूद ए बर हक़ नही तू पाक है, ज़हांनों के मालिक,तेरी ही तारीफ है,तेरी ही बादशाही है ,और तेरा कोई शरीक नही।
आसमान और जमीन लरज़ उठे थे फरिश्तों को इब्राहीम अलैहिस्सलाम के ईमान पर रश्क़ आ रहा था मंजीनिख आग के करीब ले जाने जा रही थी
आग भी ऐसी जिसके शोले आसमान को जा पहुँचते
ऐसे में बारिश का फरिश्ता नमूदार हुआ "ऐ इब्राहीम अलैहिस्सलाम आप कहे तो मैं पानी बरसाऊ ?"
इब्राहीम ने पूछा "क्या तुम्हें अल्लाह ने भेजा है?" कहा "नही।"
फिर जिब्राइल अलैहिस्सलाम नमूदार हुए "ए इब्राहीम आपकी कोई हाज़त है?" कहा "क्या आपको अल्लाह ने भेजा है?" कहा "नही।"
इब्राहीम ने कहा जिसने मुझे पैदा क्या है जिसके सब मौहताज़ हैं में उस रब्बुल आलमीन का मौहताज़ हूं वो अलीम भी है और खबीर भी (अल अम्बिया 68 इब्ने कसीर)
बस फिर होना क्या था।
बे खतर कूद पड़ा आतिश ऐ नमरूद में इब्राहिम।
हुक्म होता है
یا نارکونی بردوسلام علی ابراہیم
ऐ आग !इब्राहीम अलैहिस्सलाम पर ठण्डी हो जा और सलामती वाली बन जा।
इब्राहीम अलैहिस्सलाम तेरे रब ने तुझ से दोस्ती कर ली तुझे खलीलुल्लाह का लक़ब दे दिया गया तेरे आग में कुदने से क़ब्ल ही तुझ पर आग को ठंडा कर दिया गया। सलाम हो इब्राहीम अलैहिस्सलाम पर।
लेकिन आजमाइश का सिलसिला भी कहा खत्म होने वाला था आप आग से तो सही सलामत निकल आये लेकिन पत्थर दिल लोग फिर भी ईमान नही लाये।
फिर आप वहाँ से अल्लाह के हुक्म से हिज़रत कर गए आप को खुदा ने 86 बर्ष तक कोई औलाद नही दी थी बूड़ापे से हड्डियां गलती जा रहीं थी आप ने हाज़रा अलैहिस्सलाम से निकाह किया था और अल्लाह से दुआ करते जाते।
رب ھب لی من الصالحی
ऐ मेरे रब मुझे सालेह लड़का अता कर
इस दुआ को 86 साल कि उम्र में शरफे कबूलियत अता हुई।
आप के यहाँ इस्माईल अलैहिस्सलाम पैदा हुए।
इब्राहीम अलैहिस्सलाम की खुशी का ठिकाना न था आप शुक्र गुज़ारी में सज्दा रेज़ हो गए।
लेकिन हाय आज़माईश!!
खुदाबंद तआला को ये भी कहाँ मंज़ूर था कि इसके खलील के दिल में रब से ज्यादा बेटे की मुहब्बत बड़ जाए
"हुकुम होता है जा अपनी बीबी और बच्चे को मक्का की वादी में छोड़ आ।
खलीलुल्लाह ने एक लम्हा भी ना सोचा और खुदा के हुकुम पर राज़ी हो गए। बीबी ऐसी फरमाबरदार की उफ्फ ना कहा रब के हुकुम और शौहर की इतात में सर तस्लीम खम कर दिया।
आज़माईश फिर भी कहाँ थमने वाली थी इस्माईल अलैहिस्सलाम जवान हो चुके थे उन की वालिदा ने तन तन्हा उन की परवरिश की थी और तरबियत भी ऐसी इब्राहीम खलीलुल्लाह के लख्ते जिगर इस्माइल जबीउल्लाह बनने वाले थे।
इब्राहीम अपने बेटे को तलाश करते हुए मक्का आ गए और अपने बेटे से खूब मुहब्बत करने के बाद कहने लगे "ऐ मेरे बेटे मेने ख्वाब देखा है में तुझे ज़िब्ह कर रहा हूं।"
वजाय इस के अपने वालिद से लड़ते और ये कहते के आप ने तो बचपन ही में मुझे और मेरी वालिदा को आप ओ गया(बंजर)मैदान में छोड़ दिया था, इस्माईल का जबाब तो रोंगटे खड़े करने वाला था,
"ऐ अब्बा जान आप कर गुज़रिये जो आप को हुक्म दिया जाता है इंशाल्लाह आप मुझे साबिरो में से पाएंगे।"
हाय!!!!
सिखाये किस ने इस्माईल को आदाब ए फ़रज़न्द।"
इस्माइल ज़िब्ह होने के लिए तैयार खड़े है, बाप बेटे क़ुरबानी के लिए चलते जा रहे हैं। लेकिन ये क्या, आंसुओ से तर गमज़दा दिल लें बोझल आवाज़ से कोई रोये जा रहा है और कहता जा रहा है "नही इब्राहीम!! ये तेरा लाडला है और तेरे बुड़ापे का सहारा है ऐसा मत करो। नही इस्माईल!! तू इस शख्स की बात मत मान जो तुझे बचपन में ही छोड़ गया था। "
ये शैतान था जो वसवसे डालने आया था और इब्राहीम अलै की ज़िंदगी तो इस शैतान को मायूस करने में गुज़री थी।
इब्लीस शैतान मायूस हो कर चला गया।
फिर वो मंज़र, वो ख़ौफ़नाक मंज़र भी सामने आया जब इब्राहीम अपने बेटे को माथे के बल लेटा चुके थे।
और दोनों ने रब का हुक्म मान लिया और बेटे को माथे के बल लेटा दिया
छुरी गर्दन पर रखने जा रहे थे इब्राहीम अलैहिस्सलाम आंखे मूंदे गर्दन मुबारक पर छुरी चलाने वाले है। हाथ है, के हुक्म खुदावन्दी पर चलने को तैयार है गर्दन है, कि हुकुम खुदावन्दी पर कटने को तैयार है ,,,के आवाज़ आती है।
قد صدقت الرءیا
ऐ इब्राहीम तूने अपना ख्वाब सच कर दिखाया।
इब्राहीम खलीलुल्लाह तो इस्माईल जबीउल्लाह का लक़ब पा चुके थे
इब्राहीम तुझे तेरे रब ने खूब आज़माया और तू कामयाब हो गया।
अल्लाह ने इन की कुर्बानियां को जाया ना किया इस क़ुरबानी को रहते दुनिया तक इस्लामी शीआर (निशानी) बना दिया।
और ये दुनिया !!!!
असल क़ुरबानी पर गौर करने से क़ासिर दुनिया
फॉर्मलटी निभाने वाली दुनिया !!
आरज़ी चीज़ों में उलझी दुनिया !!!
अलगरज़ ये है कि असल क़ुरबानी तो बाप बेटे की गुफ्तगू थी।
आज दुनिया को जानवर का ज़िब्ह करना याद रहा और वो ईमान से लबरेज रब तआला के हुक्म पर सर झुका देने वाली गुफ्तगू भूल गए जिस से आगाही इंसान को जमीन से सुरैया पर पहुँचा दे।
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से दुआ है वो हमें इब्राहीम अलैहिस्सलाम इस्माईल अलैहिस्सलाम सा जज़्बा इताअत व क़ुरबानी अता करे-आमीन
(मेंबर_ जीआईओ_ अरधापुर)
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