Khulasa e Qur'an - Para 20 (ammann khalaq)

Khulasa e Qur'an - Para 20 (ammann khalaq) | Surah namal, qasas, ankabut


क़ुरआन सारांश [खुलासा क़ुरआन]
बीसवां पारा - अम्मन ख़लक़
[सूरह अन नमल-अल क़सस-अल अंकबूत]


بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
(अल्लाह के नाम से जो बड़ा कृपाशील, अत्यन्त दयावान है)


पारा (20) अम्मन ख़लक़


इस पारे में तीन हिस्से है

(1) सूरह अन नमल (बाक़ी हिस्सा)
(2) सूरह अल क़सस मुकम्मल
(3) सूरह अल अंकबूत का इब्तेदाई हिस्सा 


(1) सूरह (027) अन नमल बाक़ी हिस्सा 


(i) तौहीद की दावत और मुशरेकीन से कुछ ऐसे सवाल जो उनको लाजवाब कर दे

● कौन है जिसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया, आसमान से पानी बरसाया फिर उसके ज़रिए से लुभावने बाग़ उगाए जो तुम्हारे बस में न था? 

● कौन है जिसने ज़मीन को ठहरने की जगह बनाया, उसके अन्दर नदियाँ बहाईं, पहाड़ों की खूँटियाँ गाड़ दीं, पानी के दो ज़ख़ीरों के बीच परदे डाल दिये?  

● कौन है जो बेक़रार की पुकार सुनता है जबकि वह उसे पुकारे और कौन उसकी तकलीफ़ दूर करता है? और (कौन है जो तुम्हें ज़मीन का ख़लीफ़ा बनाता है?  

● कौन है जो जल और थल के अंधियारों में तुमको रास्ता दिखाता है और कौन अपनी रहमत के आगे हवाओं को ख़ुशख़बरी देकर भेजता है?  

● कौन है जो पैदाइश की शुरूआत करता है और फिर उसे दोहराता है? कौन है जो तुमको आसमान और ज़मीन से रोज़ी देता है? (60 से 64)


(ii) ज़मीन का जानवर (الدَّابَّةِ)

● क़यामत के क़रीब एक जानवर ज़मीन से निकलेगा (जैसे सालेह अलैहिस्सलाम की ऊंटनी पहाड़ से निकली थी) और इंसानी ज़ुबान में बात करेगा। 

● यह क़यामत की दस निशानियों में से एक है (मुस्लिम 7285) 

● क़यामत की पहली निशानी सूरज का पूरब के बजाय पश्चिम से निकलना है फिर एक दिन यह जानवर दिन दहाड़े लोगों के सामने निकल आएगा (मुस्लिम 7383) 

● जब ज़मीन पर भलाई का हुक्म देने वाला और बुराई से रोकने वाला कोई बाक़ी नहीं रहेगा तो यह जानवर आख़िरी हुज्जत के तौर पर आएगा। 

● यह मक्का से बल्कि मस्जिदे हराम से निकलेगा ( मुस्तदरक हाकिम 8490)। 


(iii) क़यामत

जिस दिन सूर (शंख) में फूंक मारी जाएगी तो आसमान और जमीन के तमाम लोग कान दबाए रब के सामने मौजूद होंगे उस दिन पहाड़ जो आज जमे हुए दिखाई देते हैं बादलों की तरह उड़ते हुए नज़र आएंगे। (87, 88) 

तमाम उम्मत में से उन लोगों को घेर कर लाया जाएगा जो अल्लाह की आयात को झुठलाते थे, फिर उनका वर्गीकरण (classification) किया जाएगा। और पूछा जाएगा कि तुमने हमारी आयात को ज्ञान न होने के बावजूद झुठलाया तो उनके पास जवाब न होगा। (83 से 85)

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(2) सूरह (028) अल क़सस मुकम्मल 


(i) मूसा अलैहिस्सलाम का वाक़िआ (तफ़सील से)

आयत 3 से 48 तक मुसलसल मूसा अलैहिस्सलाम का ज़िक्र है। बनी इस्राईल के लड़कों को फ़िरऔन चुन चुन कर क़त्ल करा दिया करता था, ऐसे हालात में मूसा का पैदा होना, मां के ज़रिए दरया में डाला जाना, फ़िरऔन के दरबारियों का ताबूत को निकालना, क़त्ल की कोशिश लेकिन फ़िरऔन की बीवी का बीच मे पड़ कर बचाना और उनकी परवरिश करना, मां का बेटे से मिलना और उजरत पर दूध पिलाना, बालिग़ होना, बनी इस्राईल के एक शख्स की मदद के चक्कर में अनजाने में एक क़िबती का हिलाक हो जाना, अल्लाह से माफ़ी तलब करना, क़त्ल का राज़ खुलने पर मिस्र से भागना, मदयन पहुंचना, वहां एक बुजुर्ग और नेक शख़्स शुऐब की पनाह में आना, वहां एक लड़की से शादी, दस साल शुऐब की ख़िदमत, बीवी के साथ घर वापसी, रास्ते में आग की तलाश में निकलना, और रसूल बनाया जाना, सिफ़ारिश पर बड़े भाई हारून का भी नबी बनाया जाना, मोअजिज़ा अता होना, फ़िरऔन के पास जाना, इस्लाम की दावत, जादूगरों से मुक़ाबला और उनका ईमान लाना, फ़िरऔन का घमंड और सरकशी और उसका दरिया में डुबोया जाना, बनी इस्राईल की ख़लासी वग़ैरह।


(ii) दोहरा सवाब

जो अल्लाह और उसकी किताब पर ईमान लाए, सब्र करे, बुराई के मुक़ाबले में भलाई करे, अल्लाह के रास्ते में ख़र्च करे , फ़िज़ूल बातों से बचता रहे यह कहते हुए कि तुम्हारा अमल तुम्हारे साथ है और हमारा अमल हमारे साथ। (52 से 54)


(iii) क़ारून का वाक़िआ

क़ारून बनी इस्राईल का ही एक व्यक्ति था, जिसने बग़ावत की। उसे अल्लाह ने इतना ख़ज़ाना और दौलत दे रखा था कि ताक़तवर इंसानों का एक समूह मुश्किल से ही उठा सकता था। लेकिन वह अल्लाह का शुक्र अदा करने के बजाए घमंड में पड़ गया। मूसा अलैहिस्सलाम ने उसे समझाने की पूरी कोशिश की और उसे नसीहत की أَحۡسِن كَمَآ أَحۡسَنَ ٱللَّهُ إِلَيۡكَ "लोगों के साथ भलाई करो जैसा कि अल्लाह ने तेरे साथ किया है" लेकिन उसने घमंड में मूसा अलैहिस्सलाम की बात न मानी जिसकी वजह से उसे दौलत समेत ज़मीन में धंसा दिया गया। (76 से 81, मुस्तदरक हाकिम 3536)


(iv) कुफ़्फ़ार के सवाल का जवाब

अगर अल्लाह हमेशा के लिए दिन बना देता तो लोग रात का सुकून कैसे हासिल करते और अगर हमेशा के लिए रात बना देता तो यह रोज़ी कैसे तलाश करते? (71, 72)


(v) हिदायत अल्लाह के हाथ में है

नबी का काम सिर्फ़ अल्लाह के दिए हुए पैग़ाम को उसके दूसरे बन्दों तक पहुंचाना है अब जिसकी मर्ज़ी हो ईमान लाए या न लाए, नबी का काम हिदायत देना नहीं है। दरअसल यह आयत अबु तालिब के सिलसिले में नाज़िल हुई जैसा कि सही मुस्लिम हदीस नंबर 132 किताबुल ईमान के तहत हदीस मज़कूर है कि

 إِنَّكَ لَا تَهۡدِي مَنۡ أَحۡبَبۡتَ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ يَهۡدِي مَن يَشَآءُۚ وَهُوَ أَعۡلَمُ بِٱلۡمُهۡتَدِينَ

"बेशक तुम जिसे चाहो हिदायत नहीं दे सकते बल्कि अल्लाह जिसे चाहता है हिदायत देता है और वह हिदायत पाने वालों के बारे में ख़ूब जानता है" (56)


(vi) क़ुरआन को अल्लाह के बंदों तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी

क़ुरआन को अल्लाह के बंदों तक पहुंचाने, उसकी की तालीम देने और उसकी हिदायत के मुताबिक़ दुनिया की इस्लाह (सुधार) करने की ज़िम्मेदारी नबी पर और अब उनके उम्मतियों पर डाली गई है यह क़ुरआन लोगों को आख़िरत के अंजाम से डराता है। (85)

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(3) सूरह (029) अल अंकबूत का इब्तेदाई हिस्सा


(i) मोमिनों की आज़माइश

जो ईमान लाने का दावा करते हैं उन्हें ज़रूर आज़माया जाएगा ताकि पता चल सके कि कौन अपने दावे में सच्चा है और कौन झूठा। (03)


(ii) रिसालत 

नूह अलैहिस्सलाम की साढ़े नौ सौ वर्ष दावत फिर भी बहुत कम लोग ईमान लाए और अल्लाह के अज़ाब के शिकार हुए, इब्राहीम अलैहिस्सलाम की अपने क़बीले में दावत सिर्फ़ लूत अलैहिस्सलाम और उनकी पत्नी सारा रज़ियल्लाहु अन्हा ईमान लाए, ऐसे ही लूत, और शुऐब अलैहिमुस्सलाम की अपनी क़ौम को दावत और क़ौम का इंकार और अज़ाब में पड़ना, आद व समूद की हिलाकत। इन वाक़िआत के ज़रिए एक तरफ़ तो नबी को तसल्ली दी गई है तो दूसरी तरफ़ कुफ़्फ़ार व मुशरेकीन को डराया भी गया है कि उन्हीं क़ौमों जैसा तुम्हारा भी अंजाम हो सकता है। (14 से 38)


(iii) घमंड का अंजाम

फ़िरऔन, हामान, और क़ारून ने घमंड किया और अपना अंजाम चख लिया, आख़िरत में उनका अंजाम और भी बुरा होगा। (39)


(iv) शिर्क की मिसाल मकड़ी से

जिन लोगों ने अल्लाह को छोड़कर दूसरे को अपना सरपरस्त बना रखा उनकी मिसाल मकड़ी की सी जो अपना एक घर बनाती है और सबसे कमज़ोर घर मकड़ी का ही होता है काश यह लोग इल्म रखते। (41)

सभी जानते हैं कि मकड़ी का घर कितना कमज़ोर होता है लेकिन आधुनिक विज्ञान ने एक रिसर्च में यह साबित किया है कि मकड़ी sex के बाद मकड़े को जान से मार डालती है फिर जब बच्चे बड़े होते हैं तो वह मां को मार डालते हैं


आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही
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