पारा (17) इक़तरबा लिन नास
इस पारे में दो हिस्से हैं)
(2) सूरह अल हज्ज मुकम्मल
(1) सूरह (021) अल अंबिया मुकम्मल
(i) नबी के विषय में सभी क़ौमों के एतेराज़ एक जैसे थे
● जादूगर है। ● इसकी बातें तो उलझे हुए सपने हैं।
● उसने ख़ुद यह बातें घड़ ली हैं।
● कोई निशानी ले आए।
(3 से 5)
(ii) बिग बैंग थ्योरी और क़ुरआन
‘‘क्या वह लोग जिन्होंने (नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पुष्टि से) इंकार कर दिया है ध्यान नहीं करते कि यह सब आकाश और धरती परस्पर मिले हुए थे फिर हम ने उन्हें अलग किया‘‘। (आयत 30 )
(इस क़ुरआनी आयत और ‘‘बिग बैंग‘‘ के बीच आश्चर्यजनक समानता से इंकार संभव ही नहीं! यह कैसे संभव है कि एक किताब जो आज से 1440 वर्ष पहले अरब के रेगिस्तानों में नाज़िल हुई अपने अन्दर ऐसे असाधारण वैज्ञानिक यथार्थ समाए हुए है।
(iii) तौहीद
तौहीद पर छह दलाएल का ज़िक्र किया गया है-
◆ तमाम जीव पानी से बनाये।
◆ ज़मीन में पहाड़ जमा दिए ताकि लोगोँ के बोझ से ज़मीन हिलने न लगे।
◆ ज़मीन में चौड़े रास्ते बनाये ताकि लोग उनपर चलें।
◆ आसमान को महफ़ूज़ छत बनाया।
◆ रात और दिन, सूरज और चांद का निज़ाम बनाया, हर एक अपने अपने मदार (axis) पर बहुत तेज़ गति से घूम रहे हैं। न इनमें टकराव होता है और न गडमड ही होते हैं।
(30 से 33)
(iv) क़यामत
● सूरह का आरम्भ ही हुआ है कि हिसाब व किताब का वक़्त क़रीब आ गया है लेकिन लोग हैं कि इस दिल दहला देने वाले दिन से ग़ाफ़िल हो रहे हैं (आयत 01)
● जैसे किसी रजिस्टर के पन्ने को खोला जाता है और फिर लपेट कर रोल कर दिया जाता है ऐसे ही क़यामत के दिन अल्लाह आसमान को लपेट कर अपनी मुट्ठी में ले लेगा। और इंसान दोबारा उठाये जाएंगे। (आयत 104)
● याजूज माजूज का निकलना क़यामत की दस बड़ी निशानियों में से एक है। यह ज़ुल क़रनैनन की दीवार के पीछे बंद हैं जिसका बयान सूरह अल कहफ़ आयत 94 और 95 में हो चुका है। क़यामत के क़रीब याजूज माजूज खोल दिये जायेंगे,और वह बुलंदी से उतर रहे होंगे। वह दुनिया पर इस तरह टूट पड़ेंगे जैसे कोई शिकारी दरिंदा अचानक पिंजरे या बन्धन से आज़ाद कर दिया गया हो। (आयत 96)
● मुशरेकीन और उनके बनाये हुए बुत जहन्नम का ईंधन बनेंगे। (आयत 98)
(v) रिसालत
रिसालत के संदर्भ में सत्तरह अंबिया अलैहिमुस्सलाम का ज़िक्र आया है।
(2) हारून अलैहिस्सलाम
(3) इब्राहीम अलैहिस्सलाम
(4) लूत अलैहिस्सलाम
(5) इस्हाक़ अलैहिस्सलाम
(6) याक़ूब अलैहिस्सलाम
(7) नूह अलैहिस्सलाम
(8) दाऊद अलैहिस्सलाम
(9) सुलैमान अलैहिस्सलाम
(10) अय्यूब अलैहिस्सलाम
(11) इस्माईल अलैहिस्सलाम
(12) इदरीस अलैहिस्सलाम
(13) ज़ुल किफ़ल अलैहिस्सलाम
(14) यूनुस अलैहिस्सलाम
(15) ज़करिया अलैहिस्सलाम
(16) यहया अलैहिस्सलाम
(17) ईसा अलैहिस्सलाम
इन सत्तरह में कुछ अंबिया अलैहिमुस्सलाम के वाक़िआत थोड़े विस्तार से बयान हुए हैं और बाक़ी का संक्षिप्त (मुख़्तसर) ज़िक्र है।
(vi) मोअजिज़ात (miracle)
● इब्राहीम अलैहिस्सलाम के लिए आग ठंडी और सलामती बन गयी। (69)
● पहाड़ और परिंदे दाऊद अलैहिस्सलाम के साथ तस्बीह बयान करते थे, उनके हाथ में आते ही लोहा नरम हो जाता था। (79)
● तेज़ हवा सुलैमान अलैहिस्सलाम के हुक्म से चलती थी, जिन्नात पर उनका कंट्रोल था। (81)
(vii) मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सबके लिए
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तमाम दुनिया के लिए रहमत हैं (وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا رَحْمَةً لِّلْعَالَمِينَ) यह प्रमाण है कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पूरे संसार के लिए नबी बना कर भेजे गए थे। (107)
(viii) कुछ अहम बातें
● आसमान, ज़मीन और उनके दरमियान की चीज़ो को खिलवाड़ के लिए नहीं बनाया गया है। (16)
● जो ख़ुदाई का दावा करेगा उसका ठिकाना जहन्नम है। (29)
● मौत सभी को आनी है। (36)
● इंसान बहुत जल्दबाज़ी मचाता है। (37)
● ज़मीन प्रत्येक दिशा से घटती चली जा रही है। (44)
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सूरह (022) अल हज्ज मुकम्मल
(i) क़यामत
क़यामत की हौलनकियों का दिल दहलाने वाला तज़किरा है, imaginary इतनी ज़बरदस्त है कि ऐसा महसूस होता कि हम अपनी आंखों के सामने देख रहे हों। दूसरी ही आयत है:
"जिस दिन तुम उसे (क़यामत के ज़लज़ले को) देखोगे तो हर दूध पिलाने वाली अपने दूध पीते बच्चे को भूल जायेगी और सभी गर्भवती (pregnant) महिलाएं अपने अपने गर्भ गिरा देंगी और लोग तुझे नशे में धुत लगेंगे हालाँकि वह नशे में नहीं होंगे बल्कि अल्लाह का अज़ाब ही इतना सख़्त होगा (2)
(ii) इंसान की तख़लीक़ (creation) के सात मराहिल (step)
يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِن كُنتُمْ فِي رَيْبٍ مِّنَ الْبَعْثِ فَإِنَّا خَلَقْنَاكُم مِّن تُرَابٍ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍ ثُمَّ مِنْ عَلَقَةٍ ثُمَّ مِن مُّضْغَةٍ مُّخَلَّقَةٍ وَغَيْرِ مُخَلَّقَةٍ لِّنُبَيِّنَ لَكُمْ ۚ وَنُقِرُّ فِي الْأَرْحَامِ مَا نَشَاءُ إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى ثُمَّ نُخْرِجُكُمْ طِفْلًا ثُمَّ لِتَبْلُغُوا أَشُدَّكُمْ ۖ وَمِنكُم مَّن يُتَوَفَّىٰ وَمِنكُم مَّن يُرَدُّ إِلَىٰ أَرْذَلِ الْعُمُرِ لِكَيْلَا يَعْلَمَ مِن بَعْدِ عِلْمٍ شَيْئًا ۚ
लोगो अगर तुमको मरने के बाद दोबारा जी उठने में किसी तरह का शक है तो जान लो कि हमने तुम्हें पहले मिट्टी से, फिर नुत्फ़े (मनी) से, फिर जमे हुए ख़ून से, फिर लोथड़े से जो पूरा (सूडौल हो) या अधूरा हो पैदा किया ताकि तुम पर (अपनी कुदरत) ज़ाहिर करें और हम औरतों के पेट में जिस (नुत्फ़े) को चाहते हैं एक मुद्दत मुअय्यन (specified term) तक ठहरा रखते हैं फिर तुमको बच्चा बनाकर निकालते हैं फिर तुम अपनी जवानी को पहुँचते हो और तुममें से कुछ लोग बुढ़ापे से पहले मर जाते हैं और कुछ उम्र के उस आख़िरी हिस्से में लौटा दिए जाते हैं जहां वह सब कुछ जानने के बावजूद कुछ भी जानने के लायक नहीं रहते। यानी, मिट्टी, मनी, लोथड़ा, बोटी, बच्चा, जवान, बूढ़ा, (5)
(iii) मिल्लत और धर्म के लिहाज़ से छह गिरोह
मुस्लिम, यहूदी, साबी (सितारों को पूजने वाले), ईसाई, मजूसी (सूरज, चांद और आग के पुजारी), मुशरिक, (17)
(iv) इब्राहीम अलैहिस्सलाम का ऐलाने हज्ज
पहले दिन से ही काबा की बुनियाद तौहीद पर रखी गई है। अल्लाह ने इब्राहीम अलैहिस्सलाम को ख़ाना ए काबा की जगह दिखा दी कि इस घर की तामीर करें और उपदेश दिया गया कि अल्लाह के साथ किसी को शरीक (साझी) न ठहराया जाय। और दूर दूर से आकर तवाफ़, क़याम, रुकूअ और सज्दा करने वालो के लिए साफ़ सुथरा रखें। और लोगों में हज्ज का ऐलान कर दें कि लोग तुम्हारे पास (जूक दर जूक) ज़्यादा और हर तरह की दुबली सवारियों पर (जो दूर दराज़ का रास्ता तय करके आयी होगी चढ़-चढ़ के) आ पहुँचेगें। फिर हज्ज के अरकान भी बताए गए हैं। (26 से 34)
(v) मोमिन (मुख़्बेतीन) की पांच निशानियां
● मुसीबत पर सब्र करते हैं।
● नमाज़ क़ायम करते हैं।
● अल्लाह के रास्ते में दिल खोल कर ख़र्च करते हैं।
● भलाई का हुक्म देते हैं और बुराई से रोकते हैं।
(35)
(vi) अल्लाह को तक़वा पसंद है दिखावा नहीं
हज्ज में या वैसे जो क़ुरबानी की जाती है उसका गोश्त और ख़ून अल्लाह को नहीं पहुंचता बल्कि तक़वा (सही नियत) पहुंचता है और यही मामला हर काम के सिलसिले में है अगर नीयत ठीक है तो तक़वा वरना दिखावा में गिनती होगी। (37)
(vii) मुशरेकीन और उनके माबूद कितने कमज़ोर हैं
मुशरेकीन अल्लाह को छोड़ कर जिनके आगे नतमस्तक होते हैं उनका हाल तो यह है कि वह सब मिलकर भी एक मक्खी नहीं बना सकते बल्कि मक्खी उनसे कुछ उड़ा ले जाए तो वह उसे छुड़ा भी नहीं सकते । हक़ीक़त तो यह है कि उन्होंने अल्लाह की कद्र ही न जानी जैसा जानने का हक़ था। (73)
(viii) मुस्लिम नाम रखा
अल्लाह तआला ने तमाम इंसानों में से कुछ को मुन्तख़ब किया कि वह अल्लाह की ज़मीन पर अल्लाह का क़ानून नाफ़िज़ करने के लिए हर मुमकिन कोशिश करें, अल्लाह ने उस गिरोह का नाम पहले से ही मुस्लिम रखा है इसलिए तमाम मुसलमानों को चाहिए कि कोई और title न लगाएं बल्कि ख़ुद को मुस्लिम का ही नाम दें। (78)
आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही
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