औरतों का ख़ुशबू लगा कर मस्जिद जाना
1: अबु मूसा अश अरी रजिअल्लाहु अन्हु बयान करते हैं के रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
"जो औरत भी ख़ुशबू लगा कर लोगों के पास से गुज़रे के लोग उसकी ख़ुशबू पाएं तो वो औरत ज़ानियाह (Adulteress) है। [इमाम अहमद-19212; नसाई-5126; ग्रेड हसन]
2: जैनब सकफिया रजि अल्लाहु अन्हा बयान करती है के रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
"जब तुम में से कोई औरत मस्जिद की तरफ़ जाएं तो वो ख़ुशबू के क़रीब भी न जाएं।" [सहीह मुस्लिम-443]
3: अबु हुरैरा रजि अल्लाहु अन्हु बयान करते हैं के रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:-
"जिस औरत ने भी बख़ूर (ख़ुशबू की धूनी) ली हो वो हमारे साथ इशा की नमाज़ में मत आएं।" [सुन्नान नसाई-5263]
4: मूसा बिन यसद बयान करते हैं के अबु हुरैरा रजि अल्लाहु अन्हु के पास से एक औरत गुज़री जिससे ख़ुशबू आ रही थी तो अबु हुरैरा रजि अल्लाहु अन्हु कहने लगे:-
"ऐ अल्लाह ओ जब्बार की बन्दी क्या तुम मस्जिद जाना चाहती हो?
वो अर्ज़ करने लगी, "जी हां"
तो अबु हुरैरा रजि अल्लाहु अन्हु कहने लगे के जाओ जा कर गुस्ल करो, क्योंकि मैंने रसूल अल्लाह ﷺ को ये फरमाते हुए सुना है:
"जो औरत भी मस्जिद की जानिब जाएं और उससे ख़ुशबू आ रही हो तो अल्लाह त'आला उसकी नमाज़ उस वक्त तक क़ुबूल नहीं करता जब तक के वो अपने घर वापिस आकर गुस्ल न कर लें।" [मुसनद अहमद-12/311 हदीस नं०-9938; 13/339 हदीस नं०-7959; 16/29 हदीस नं०-9938]
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