Qurabni ke ahkam o masail : Janwar Khassi Karne Ki Sharai Haisiyat

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क़ुर्बानी के अहकाम व मसाइल

6. जानवर ख़सी करने की शरई हैसियत

अल्लाह तआला ने शैतान लईन का क़ौल नक़ल फ़रमाया है:

وَلَا مُرَنَّهُمْ فَلَيُغَيِّرُنَّ خَلْقَ اللَّهِ﴾ (النساء : ١١٩)

"मैं उन्हें हुक्म दूँगा और वे अल्लाह की तख़लीक़ को ज़रूर बदल देंगे।"

सैय्यदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु [तफ़्सीर तबरी: 10470] सनद सही फ़रमाते हैं कि इस आयते-करीमा से जानवर ख़सी करने की कराहत साबित होती है, क्योंकि यह फ़ेल अल्लाह की तख़लीक़ में बिगाड़ का बाइस है। शहर बिन हौशब [तफ़्सीर तबरी: 10475] सनद सही) और सुफ़्यान [तफ़्सीर तबरी: 10475] सनद सही फ़रमाते हैं कि इस आयते-करीमा से जानवर ख़सी करना मुराद है।

إِنَّهُ كَرِهَ خِصَاءِ الدَّوَابٌ 

"वे जानवरों को ख़सी करना मकरूह समझते थे।"

[मुसन्निफ़ इब्न अबी शैबा: 12/226] और इसकी सनद सही है।


यज़ीद बिन अबी हबीब रहमतुल्लाहि अलैहि बयान करते हैं:

كَتَبَ عُمَرُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ إِلَى أَهْلِ مِصْرَ يَنْهَاهُمْ عَنْ خِصَاءِ الْخَيْلِ، وَأَنْ يُجْرِى الصِّبْيَانُ الْخَيْلَ

"इमाम उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ रहमतुल्लाहि अलैहि ने अहल-ए-मिस्र की तरफ़ ख़त लिखा ख़सी करने और बच्चों की घुड़सवारी से मना फ़रमाया।" [मुसन्निफ़ इब्न अबी शैबा: 12/225] और इसकी सनद सही है।


इमाम अब्दुल रज्ज़ाक़ रहमतुल्लाहि अलैहि फ़रमाते हैं, मैंने इमाम औज़ाई रहमतुल्लाहि अलैहि से जानवर को ख़सी करने के बारे में सवाल किया तो उन्होंने फ़रमाया: 

كَانُوا يَكْرَهُونَ خِصَاءَ كُلِّ شَيْءٍ لَّهُ نَسْلٌ 

"असलाफ़ उन जानवरों को ख़सी करना मकरूह समझते थे, जिनकी नस्ल चल सकती है।" [मुसन्निफ़ अब्दुल रज्ज़ाक़: 8447]


नाफ़े रहमतुल्लाहि अलैहि सैय्यदना अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा के बारे में बयान करते हैं:

إِنَّهُ كَانَ يَكْرَهُ الْإِخْصَاءَ ، وَيَقُولُ : فِيهِ تَمَامُ الْخَلْقِ 

"आप रहमतुल्लाहि अलैहि ख़सी करने को मकरूह जानते थे और फ़रमाते थे कि (ख़सी न करना) तख़लीक़ की तकमील है।" [मुवत्ता इमाम मालिक: 2729] और इसकी सनद सही है।


इसहाक़ बिन मन्सूर मरूज़ी रहमतुल्लाहि अलैहि कहते हैं:

قُلْتُ : يُكْرَهُ إِخْصَاءُ الدَّوَابِ، قَالَ : إِي لَعَمْرِي، هِيَ نَمَاءُ الْخَلْقِ ، قَالَ إِسْحَاقُ : كَمَا قَالَ

"मैंने कहा: क्या जानवरों को ख़सी करना मकरूह है? आपने इमाम अहमद रहमतुल्लाहि अलैहि फ़रमाया: हाँ, अल्लाह की क़सम! ये तख़लीक़-ए-इलाही की तकमील हैं। इमाम इसहाक़ रहमतुल्लाहि अलैहि फ़रमाते हैं कि मेरा भी यही मौक़िफ़ है।" [मसाईल अल-इमाम अहमद बिन हंबल व इसहाक़ बिन राहविया: 2786]


सैय्यदना इब्न उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा से ही मरवी है: 

نَهَى النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ إِخْصَاءِ الْإِبِلِ وَالْبَقَرِ وَالْغَنَمِ وَالْخَيْلِ، وَقَالَ : إِنَّمَا النَّمَاءُ فِي الْحَبَلِ

"नबी अकरम ﷺ ने ऊँट, बैल, बकरे, दुम्बे और घोड़े को ख़सी करने से मना किया और फ़रमाया: अफ़ज़ाइश-ए-नस्ल तो रूह ही में होती है।" [अल-कामिल लि-इब्न अदी: 2/181] सनद सख़्त ज़ईफ़ है।

  • मुहम्मद बिन हसन बिन हर्ब के हालात-ए-ज़िन्दगी नहीं मिल सके।
  • सुलेमान बिन उमर अकता 'मजहूलुल हाल' है। इसे सिर्फ़ इमाम इब्न हिब्बान रहमतुल्लाहि अलैहि ने 'अत-तिका़त' (8/280) में ज़िक्र किया है।
  • अब्दुल्ला बिन नाफ़े मदनी 'ज़ईफ़' है।


सैय्यदना इब्न उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा से मरवी है:

نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ إِخْصَاءِ الْبَهَائِمِ،

لَا تَقْطَعُوا نَمَاءَ اللَّهِ

"रसूल अल्लाह ﷺ ने मवेशी ख़सी करने से मना किया, नीज़ फ़रमाया: अल्लाह की तख़लीक़ मुनक़़ति न करो।" [अल-कामिल लि-इब्न अदी: 2/181] सनद ज़ईफ़ है।

  • ह़ई बिन हातिम जुरजानी के हालात नहीं मिल सके।
  • अबू मुआविया ज़रीर 'मुदल्लिस' हैं और 'अन' से बयान कर रहे हैं।


सैय्यदना इब्न उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा से मरवी है:

إِنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنِ الْإِخْصَاءِ، وَقَالَ : فِيهِ نَمَاءُ الْخَلْقِ 

"नबी अकरम ﷺ ने ख़सी करने से मना किया और फ़रमाया: इस में तख़लीक़ की अफ़ज़ाइश होती है।" [कामिल लि-इब्न अदी: 7/171, तारीख़ इब्न असाकिर: 1/378]

  • सनद सख़्त 'ज़ईफ़' है। 


यूसुफ़ बिन यूनुस अबू यअ़क़ूब अफ़तस के बारे में इमाम इब्न अदी रहमतुल्लाहि अलैहि फ़रमाते हैं:

كُلُّ مَا رَوَى عَمَّنْ رَوَى مِنَ الثَّقَاتِ مُنْكَرُ 

"उसने सिक़ा रावियों से जितनी भी रिवायतें बयान की हैं, वे सब मुनकर हैं।"


इमाम इब्न हिब्बान रहमतुल्लाहि अलैहि इसकी एक रिवायत को बे-असल करार देकर लिखते हैं:

الْأَفْطَسُ لَا يَجُوزُ الْاِحْتِجَاجُ بِمَا انْفَرَدَ بِهِ 

"जिस रिवायत को बयान करने में मुनफ़रिद (अकेला) हो, उससे दलील लेना जायज़ नहीं।" [किताबुल मजरूहीन: 3/137]

  • अलबत्ता इमाम दारकु़तनी रहमतुल्लाहि अलैहि ने इसे सिक़ा क़रार दिया है। [तारीख़ बग़दाद लिल-ख़तीब: 14/298]
  • हाफ़िज़ ज़हबी रहमतुल्लाहि अलैहि इसकी दो रिवायतें ज़िक्र करने के बाद लिखते हैं: "इनको बयान करने वाला सिक़ा नहीं हो सकता।" [मीज़ान-उल-एतिदाल: 4/476]
  • "इसे इमाम इब्न अदी रहमतुल्लाहि अलैहि [अल-कामिल: 7/171] और इमाम नसाई  रहमतुल्लाहि अलैहि [लसानुल मीज़ान लिल-इब्न हजर: 3/331] ने 'मुनकर' कहा है।


सैय्यदना हारिस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है:"

نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ إِخْصَاءِ الْخَيْلِ

"रसूल अल्लाह ﷺ ने घोड़ों को ख़सी करने से मना फ़रमाया है।" [तारीख़ इब्न असाकिर: 13/34] सनद 'ज़ईफ़' है।

इसके कई रावियों के हालात नहीं मिल सके। हाफ़िज़ इब्न हजर रहमतुल्लाहि अलैहि हाफ़िज़ अलाई रहमतुल्लाहि अलैहि से नक़ल करते हैं:

رِجَالُ هَذَا السَّنَدِ لَا يُعْرَفُونَ 

"इस सनद के कई रावी गैर-मारूफ हैं।" [लसानुल मीज़ान: 1/89]


सैय्यदना जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हुमा से मरवी है:

ذَبَحَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَبْشَيْنِ أَقْرَنَيْنِ أَمْلَحَيْنِ مُوجَأَيْنِ 

"नबी अकरम ﷺ ने सींगों वाले, चितकबरे और ख़सी दो मेंढे ज़िबह किए।" [मुसनद इमाम अहमद: 3/375, सुनन अबू दाऊद: 2795, सुनन इब्न माजह: 3121]

सनद ज़ईफ़ है। मुहम्मद बिन इसहाक़ 'मुदल्लिस' हैं और 'अन' से यह रिवायत बयान कर रहे हैं, 'ख़सी' के अल्फ़ाज़ के साथ कहीं भी समाअ की तसरीह नहीं मिल सकी।


सैय्यदना अबू सईद खुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है:

كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُضَحِّي بِكَبْسٍ أَقْرَنَ فَحِيلٍ

"रसूल अल्लाह ﷺ ने सींगों वाले मेंढे की क़ुरबानी की, जो ख़सी नहीं था।" [सुनन अबू दाऊद: 2796, सुनन नसाई: 4380, सुनन तिरमिज़ी: 1496]

  • सनद ज़ईफ़ है।
  • हफ़्स बिन ग़ियास मुदल्लिस हैं, समाअ की तस़रीह नहीं की।
  • अबू जाफ़र मुहम्मद बिन अली बाक़िर का सैय्यदना अबू सईद खुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से समाअ नहीं है।


हाफ़िज़ इब्न हजर रहमतुल्लाहि अलैहि फ़रमाते हैं:

أَبُو جَعْفَرٍ لَمْ يَسْمَعْ مِنْ أَبِي سَعِيدٍ 

"अबू जाफर मुहम्मद बिन अली बाकिर ने सैय्यदना अबू सईद खुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से नहीं सुना।" [इतहाफुल महरा: 5/402]


यह रिवायत सैय्यदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से भी मरवी है। [अल-मुअजम अल-कबीर लित-तबरानी: 11577] सनद ज़ईफ़ है।

   1. अहमद बिन रशदीन जमहूर अइम्मा के नज़दीक 'ज़ईफ़' है।

   2. रूह बिन सलाह मुतकल्लम-फ़ीह रावी है, इसकी मुनकर रिवायतें हैं।

   3. दाऊद बिन हसीन की रिवायत इक्रमा से ज़ईफ़ होती है। [मुसन्निफ़ अब्दुल रज्ज़ाक़ 8132] वाली सनद भी ज़ईफ़ है।

   4. अब्दुल रज्ज़ाक़ बिन हम्माम मुदल्लिस हैं।

  • इब्राहिम बिन मुहम्मद बिन अबी यह्या असलमी "मतरूक" है।
  • दाऊद बिन हसीन की रिवायत इक्रमा से मुनकर होती है।


इब्राहिम नख़ई रहमतुल्लाहि अलैहि से मरवी है:

نَهُى عُمَرُ عَنْ إِخْصَاءِ الْخَيْلِ

"सैय्यदना उमर रज़ियल्लाहु अन्हु ने घोड़ों को ख़सी करने से मना फ़रमाया।"‌ [मुसनद अली बिन अल-जाद: 2129]

  • सनद ज़ईफ़ है।
  • शरीक बिन अब्दुल्लाह क़ाज़ी मुदल्लिस हैं।
  • इब्राहिम नख़ई का सैय्यदना उमर रज़ियल्लाहु अन्हु से समाअ और मुलाक़ात नहीं है, लिहाज़ा यह क़ौल मुन्क़़ति है।

[सुनन कुब्रा बैहक़ी 10/24)] की सनद भी ज़ईफ़ है। आसिम बिन उबैदुल्लाह को जमहूर ने "ज़ईफ़" कहा है। [मज्मउज़-ज़वाइद: 8/150, अन-नुकत लिल-इब्न हजर: 1/75, उम्दतुल क़ारी लिल-ऐनी: 11/13]


इमाम बैहक़ी रहमतुल्लाहि अलैहि फ़रमाते हैं:

 رِوَايَاتُ عَاصِمٍ فِيهَا ضَعْفٌ 

"आसिम रिवायतों में कमज़ोरी है।" [अल्-सुनन अल्-कुब्रा: 10/24]

ख़सी जानवर की क़ुरबानी बिल-इजमा जायज़ है, जानवर को ख़सी करना शरअन ममनू नहीं है, लिहाज़ा ख़सी होना ऐब न हुआ, खुसूसन ऐसे जानवर के हवाले से जिसे क़ुरबानी के लिए खास किया गया हो। ख़सी जानवर मोटा-ताज़ा होता है, इसका गोश्त इंतिहाई उम्दा और नफ़ीस होता है, लिहाज़ा क़ुरबानी के जानवर को ख़सी करना खूबी है, न कि ऐब। इसीलिए ख़सी होना क़ुरबानी के लिए माने नहीं। 


हाफ़िज़ इब्न-ए-हजर रहमतुल्लाहि अलैहि (852 हिजरी) फ़रमाते हैं:"

لَيْسَ هَذَا عَيْبًا 

"ख़सी होना ऐब नहीं है।" [फ़तह-उल-बारी: 10/10]


इमाम अहमद बिन हंबल रहमतुल्लाहि अलैहि ख़सी जानवर की क़ुरबानी के बारे में फ़रमाते हैं:

أَرْجُو أَن لَّا يَكُونَ بِهِ بَأْسٌ

"इसमें कोई हर्ज नहीं।" [मसाईल अल-इमाम अहमद व इसहाक़ बिन राहविया, बरवायत अल-कौसज: 2/368]


अल्लामा इब्न कुदामा मदसी रहमतुल्लाहि अलैहि (620 हिजरी) बयान करते हैं:

لَا نَعْلَمُ فِي هَذَا خِلَافًا 

"इसमें कोई हर्ज नहीं।" [मसाईल अल-इमाम अहमद व इसहाक़ बिन राहविया, बरवायत अल-कौसज: 2/368]


अल्लामा इब्न कुदामा मदसी रहमतुल्लाहि अलैहि (620 हिजरी) बयान करते हैं:

أَجْمَعَ الْجُمْهُورُ عَلَى أَنْ لَا بَأْسَ أَنْ يُضَحَى بِالْخَصِيِّ الْأَجَمِّ إِذَا كَانَ سَمِينًا 

"जमहूर अहल-ए-इल्म का इजमा है कि ख़सी और जिस जानवर के पैदाइशी तौर पर सींग न हों, अगर तो वह मोटा-ताज़ा है, तो उसकी क़ुरबानी में कोई हर्ज नहीं।" [अल-इस्तिज़कार: 5/218]


मुहम्मद बिन हसन शैबानी (189 हिजरी) कहते हैं:

بِذلِكَ جَاءَتِ الْآثَارُ : الْخَصِيُّ مِنَ الْأُضْحِيَةِ يُجْزِئُ مِمَّا يُجْزِئُ مِنْهُ الْفَحْلُ

"इस बारे में आसार आए हैं कि ख़सी की क़ुरबानी जायज़ है, जिस तरह ग़ैर-ख़सी की जायज़ है।" [मुवत्ता इमाम मालिक बरवायत शैबानी,:  280]


अल्लामा अब्दुल हक़ देहलवी रहमतुल्लाहि अलैहि (1052 हिजरी) फ़रमाते हैं:

قَوْلُ مَنْ كَرِهَ الْخَصِيَّ فِي الْأُضْحِيَةِ غَيْرُ صَحِيحٍ 

"ख़सी जानवर की क़ुरबानी को मकरूह कहने वालों का क़ौल दुरुस्त नहीं है।" [लम्आतुल तनक़ीह: 3/578]

फ़तावा बज़ाज़िया में ख़सी जानवर की क़ुरबानी को अफ़ज़ल क़रार दिया गया है। [अल-फ़तावा अल-बज़ाज़िया: 6/289]


तन्बीह: 

अल्लामा क़ुर्तुबी रहमतुल्लाहि अलैहि (671 हिजरी) फ़रमाते हैं:

لَمْ يَخْتَلِفُوا أَنَّ خِصَاءَ بَنِي آدَمَ لَا يَحِلُّ وَلَا يَجُوزُ، لِأَنَّهُ مُثْلَةٌ وَتَغْيِيرٌ لِخَلْقِ اللَّهِ تَعَالَى، وَكَذَلِكَ قَطْعُ سَائِرِ أَعْضَائِهِمْ فِي غَيْرِ حَدٍ وَّلَا قَوَدٍ

"मुसलमानों का इजमा-ओ-इत्तेफाक है कि इंसानों को ख़सी करना हलाल और जायज़ नहीं, क्योंकि यह मुसला और तख़लीक़-ए-इलाही में तब्दीली है। इसी तरह हुदूद-ओ-क़िसास के अलावा इंसानों के बाक़ी अंगों को काटना भी हराम है।" [तफ़्सीर अल-क़ुर्तुबी : 5/391]


Team Islamic Theology

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