सीरत-ए सय्यदना अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु
[तहरीर नंबर 38]
32. क़ातिलीने उ़स्मान रज़ियल्लाहु अन्हु के मुताल्लिक़ आपका मौक़िफ़
सय्यदना उ़स्मान रज़ियल्लाहु अन्हु की शहादत पर अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु ने सख़्त ग़मो ग़ुस़्से का इज़्हार किया, उनके खून से अपनी बरा'त ज़ाहिर की, अपने ख़ुत्बों और दीगर मज्लिसों में क़समें खा खाकर कहा कि मैंने उ़स्मान रज़ियल्लाहु अन्हु को क़त्ल नहीं किया, न किसी को इसका हुक्म दिया, न किसी को शह दी और न ही उस वाक़िया से राज़ी हूँ, ये बात इतनी सनदों से साबित है जो क़त़्इ़यत का फ़ायदा देती हैं। [अल् बिदाया वन् निहाया: 7/202]
ये हक़ीक़त उन राफ़्ज़ी मफ़्रूज़ों के ख़िलाफ़ है जिनमें अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु को क़त्ले उ़स्मान रज़ियल्लाहु अन्हु पर मुत्मइन दिखाया गया हैं। शहादते उ़स्मान के मुताल्लिक़ रिवायात को नक़्ल करने के बाद इमामे हाकिम रहमतुल्लाह अलैह लिखते हैं कि बिदअ़तियों का ये दावा कि अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु ने क़ातिलीने उ़स्मान रज़ियल्लाहु अन्हु की मदद की थी, यक्सर झूठ और बोहतान है, मुतवातिर रिवायात इसके बिलकुल ख़िलाफ़ हैं। [अल्मुस्तदरक: 3/103]
इमाम इब्ने तैमिया रहमतुल्लाह अलैह फ़र्माते हैं : ये सब अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु पर झूठ और इफ़्तिरा परदाज़ी है, आप हर्गिज़ हर्गिज़ दमे उ़स्मान रज़ियल्लाहु अन्हु में शरीक न हुए, न उसका हुक्म दिया और न उससे ख़ुश हुए, आप जो कि एक सच्चे और नेक इन्सान हैं, ख़ुद ही उसकी स़राह़़त करते हैं। [मिन्हाजुस्सुन्ना: 4/406] फ़र्माते हैं (अल्लाहुम्म इन्नी अब्रउ इलैक मिन दमि उ़स्मान) [अल् बिदाया वन निहाया: 7/202] इसकी सनद हसन है।) ऐ अल्लाह! मैं तेरे पास दमे उ़स्मान से अपनी बरा'त का इज़्हार करता हूँ।"
इमामे हाकिम ने अपनी सनद से कैस बिन उ़बादा से रिवायत किया है कि जंगे जमल के मौके पर मैंने अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु को फ़र्माते हुए सुना : ऐ अल्लाह! मैं तेरे नज़दीक उ़स्मान के खून से अपनी बरा'त ज़ाहिर करता हूँ, जिस दिन मैंने उ़स्मान रज़ियल्लाहु अन्हु की शहादत की ख़बर सुनी, हवास बाख़्ता हो गया और मेरा दिल यक़ीन नहीं कर रहा था। लोग मेरे पास बैअ़त करने आए तो मैंने कहा: अल्लाह की क़सम ! मुझे अल्लाह से शर्म आती है कि ऐसे लोगों से बैअ़त करूँ जिन्होंने एक ऐसे आदमी को क़त्ल किया है जिसके बारे में रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़र्माया था : क्या मैं ऐ आदमी से ह़या न करूँ जिससे फ़रिश्ते ह़या करते हैं।
ये कैसे हो सकता है कि उ़स्मान ज़मीन पर मक्कूल पड़े हों और अभी उनकी तदफ़ीन भी नहीं हुई और मैं बैअ़त कर लूँ, ये सुनकर लोग वापस चले गए और जब आपकी तदफ़ीन हो गई तो लौटकर वापस आए और मुझे बैअ़त लेने के लिये कहने लगे, मैंने कहा : ऐ अल्लाह! मैं इस पर इक़्दाम करते हुए डर रहा हूँ।
लेकिन फिर भी मेरी हिम्मत बँधी और अज़ीमत से सहारा दिया, मैंने बैअ़त ले ली। लोगों ने उस वक्त जब मुझे 'अमीरुल मोमिनीन' कहा तो मुझे ऐसा लगा कि एहसासे ज़िम्मेदारी से मेरा दिल फट जाएगा और मैंने अल्लाह से दुआ की : (अल्लाहुम्म ख़ुज़ु मिन्नी लि उ़स्मान ह़त्त तरज़ा)
ऐ अल्लाह! तू मुझसे उ़स्मान रज़ियल्लाहु अन्हु के लिये वो काम ले जिससे तू ख़ुश हो जाए। [अल्मुस्तदरक: 3/9] ये हदीस सहीह है और शैखै़न की शर्त पर है।
इमाम अहमद अपनी सनद से मुहम्मद बिन अल्ह़नफ़िया से रिवायत करते हैं कि अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु को ख़बर मिली कि मक़ामे मर्बद (बस़रा के क़रीब एक जगह है। बस़रा और मर्बद के दरम्यान तीन मील का फ़ासला है।) में आ़इशा रज़ियल्लाहु अन्हा क़ातिलीने उ़स्मान पर लअ़नत भेज रहे हैं, तो आपने भी दुआ के लिये अपने दोनों हाथ उठा लिये और कहा : मैं भी क़ातिलीने उ़स्मान पर लअ़नत भेजता हूँ, उन पर अल्लाह की लअ़नत नाज़िल हो वो ज़मीन में हों या पहाड़ पर। आपने दो या तीन मर्तबा यही बात दोहराई। [फ़ज़ाइले सहाबा: 733] इसकी सनद सही है।
इब्ने सअ़द ने अपनी सनद से इब्ने अ़ब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत किया है कि अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़र्माया : अल्लाह शाहिद है कि मैंने उ़स्मान को क़त्ल नही किया और न ही इसका हुक्म दिया, बल्कि मैंने इससे मना किया। अल्लाह की क़सम ! मैंने उ़स्मान को क़त्ल नहीं किया और न ही इसका हुक्म दिया बल्क मैं बेबस कर दिया गया, आपने तीन मर्तबा यही बात दोहराई। [तब्क़ात: 3/82, अल् बिदाया वन् निहाया: 7/202] इस की सनद ज़ईफ़ है।
हाफ़िज़ इब्ने अ़साकिर रहमतुल्लाह अलैह ने उन तमाम रिवायात की सनदों को जमा किया है जिनमें अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु का अपना बयान है कि वो उ़स्मान रज़ियल्लाहु अन्हु के खून से बरी हैं और ये कि आप अपने ख़ुत्बों वग़ैरह में क़सम खाया करते थे कि उन्होंने उ़स्मान रज़ियल्लाहु अन्हु को क़त्ल नहीं किया और न उससे राज़ी हुए। ये बात आपसे इतनी कसीर सनदों से साबित है कि जो बहुत सारे अइम्मा के नज़दीक क़त़्इ़यत का फ़ायदा देती हैं। [अल् बिदाया वन् निहाया: 7/193]
सीरीज सीरते सय्यदना अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु तहरीर नंबर 38 आगे जारी है इंशाअल्लाह गुजारिश है इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
जज़ाकुमुल्लाहु ख़ैरन
Team Islamic Theology

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