Seerat Ali bin Abi Talib RaziAllahu Anhu (Tahreer No. 36)

Seerat Ali bin Abi Talib RaziAllahu Anhu


सीरत-ए सय्यदना अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु

[तहरीर नंबर 36]


30. फ़ित्ना से किनाराकश रहने वालों का मौक़िफ़

फ़ित्ना क़त्ले उ़स्मान रज़ियल्लाहु अन्हु से किनाराकश रहने वाले बेशतर सहाबा रज़ियल्लाहु अन्हु के सामने नबी ﷺ की ये हदीस थी: अन्क़रीब ऐसे फ़ित्ने बरपा होंगे जिनमें बैठने वाला खड़े होने वाले से बेहतर होगा और खड़ा होने वाला उनमें चलने वाले से बेहतर होगा और चलने वाला उनमें दौड़ने वाले से बेहतर होगा, जो दूर से उनकी तरफ़ झाँक कर भी देखेगा तो वो उनको भी समेट लेंगे, उस वक्त जब किसी को कोई पनाह की जगह मिल जाए या बचाव का मक़ाम मिल सके वो उसमें चला जाए। [सहीह बुखारी: 7081] अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु व [सहीह मुस्लिम: 2886]

हाफ़िज़ इब्ने ह़जर रहमतुल्लाह अलैह‌ फ़र्माते हैं: इस हदीस में फ़ित्ने से डराया गया है और इसमें हिस्सा लेने से दूर रहने पर उभारा गया है और ये बताया गया है कि जिस क़द्र उसमें हिस्सा लिया जाएगा उसी मिक्दार में उसकी बुराई 'असरअन्दाज़' होगी। [फ़त्हुल बारी: 13/31]

और दूसरी हदीस में आप ﷺ ने फ़र्माया: अन्क़रीब ऐसे फ़ित्ने होंगे जिनमें लेटने वाला खड़े रहने वाले से बेहतर होगा और बैठने वाला खड़ा होने वाले से बेहतर होगा और खड़ा होने वाला चलने वाले से बेहतर होगा और चलने वाला दौड़ने वाले से बेहतर होगा।

सहाबए किराम ने पूछा: ऐ अल्लाह के रसूल! ऐसे वक्त के लिये आप हमें क्या हुक्म देते हैं?

आपने फ़र्माया: जिसके पास ऊँट हों वो अपने ऊँटों के पास चला जाए और जिसके पास बकरियाँ हों वो अपनी बकरियों के पास चला जाए और जिसके पास ज़मीन हो वो अपनी ज़मीन में चला जाए।

सहाबा ने पूछा: अगर किसी के पास मज़्कूरा चीज़ों में से कुछ न हो तो वो क्या करे? आपने

फ़र्माया: वो अपनी तलवार ले ले और उसकी धार को किसी पथरीली ज़मीन पर तोड़ दे, फिर अपनी ताक़तभर नजात का तालिब बने। [सहीह मुस्लिम: 2887] बरिवायत अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु 

और एक हदीस में आप ﷺ ने फ़र्माया: वो वक्त क़रीब है कि मुसलमान का बेहतरीन माल वो बकरियाँ होंगी जिन्हें वो लेकर पहाड़ी की चोटियों और बारिश बरसने की जगहों पर चला जाएगा। वो फ़ित्नों से अपने दीन की

हिफ़ाज़त के लिये वहाँ भागकर आ जाएगा। [सहीह बुख़ारी: 7088] बरिवायत अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु

इनके अलावा मुतअ़द्दद अहादीस हैं जो सराह़तन क़िताल में हिस्सा लेने से रोकती हैं। इमाम जुवैनी रहमतुल्लाह अलैह‌ फ़र्माते हैं : अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु के पुरफ़ितन दौर में अस्हाबे रसूलुल्लाह ﷺ की मुतअ़द्दद जमाअ़तें लड़ाई में शिर्कत करने से किनाराकश रहीं, सुकून व सलामती को तर्जीह दी, और फ़ित्ना व फ़साद के थपेड़ों से खुद को दूर रखा, उन ही में से सअ़द बिन अबी वक़्क़ास रज़ियल्लाहु अन्हु और सई़द बिन ज़ैद बिन अ़म्र बिन नुफैल रज़ियल्लाहु अन्हु भी थे। [तहज़ीबुत्तहज़ीब: 4/30] ये दोनों जन्नत के बशारत याफ़्ता थे, उस फ़िल्ना से किनाराकशी इख़्तियार करने में सबसे पहले अबू मूसा अशअ़री, अब्दुल्लाह बिन उ़मर, ओसामा बिन ज़ैद और अबू अय्यूब अंसारी रज़ियल्लाहु अन्हु ने पेशरफ़्त किया और उनके पीछे सहाबा की एक जमाअ़त रही, लेकिन अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु ने उन लोगों की अ़दम शिर्कत पर कभी कोई ऐतिराज़ नहीं किया। [ग़ियासुल उमम फ़ी तियासुज़्ज़ुलम: पेज 85/86]

हाफ़िज़ इब्ने ह़जर रहमतुल्लाह अलैह‌ का ख़्याल है कि किनाराकशी इख़्तियार करने वाले सहाबा की तादाद मुख़्तसर थी आप लिखते हैं: जंगे जमल और जंगे सिफ़्फ़ीन में क़िताल से किनाराकशी करने वालों की तादाद उन लोगों के मुक़ाबिल कम थी जिन्होंने उनमें शिर्कत की थी, ताहम सब्न्नके पेशेनज़र उनका इज्तिहाद था, जिन पर वो इंशाअल्लाह अज्र के मुस्तहिक़ होंगे। इसके बरख़िलाफ़ जो लोग उनके बाद आए और दुनिया तलबी के लिये आपस में क़त्लो ख़ैरेज़ी की वो इस हुक्म में शामिल नहीं हैं। [फ़त्हुल बारी: 13/34]

इमाम इब्ने तैमिया रहमतुल्लाह अलैह‌ फ़र्माते हैं : बेशतर सहाबा सिरे से जंग में शरीक ही न हुए, न इस तरफ़ से न उस तरफ़ से, उनके पास ऐसी नुसूसू थीं जो उन्होंने नबी ﷺ से सुनी थीं और वो इस बात की तरफ़ रहनुमाई करती थीं कि जंगो जिदाल से इज्तिनाब करना उसमें शरीक होने से बेहतर है, वो लोग उस जंग को फ़ित्ने से तअ़बीर करते थे। [मज्मूउ़ल् फ़तावा: 35/55]

इमाम क़ुर्तुबी रहमतुल्लाह अलैह‌ के ख़्याल में उन सहाबए किराम ने उस जंग में अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु का साथ इसलिए नहीं दिया कि मुसलमानो गिरोह से क़िताल करना दुरस्त नहीं, यही वजह थी कि सअ़द बिन अबी वक़्क़ास, अब्दुल्लाह बिन उ़मर और मुहम्मद बिन मस्लमा रज़ियल्लाहु अन्हु जैसे सहाबा उससे किनाराकश रहे। [तफ़्सीरे क़ुर्तुबी: 16/319]


सीरीज सीरते सय्यदना अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु तहरीर नंबर 36 आगे जारी है इंशाअल्लाह गुजारिश है इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। 

जज़ाकुमुल्लाहु ख़ैरन


Team Islamic Theology

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