Seerat Ali bin Abi Talib RaziAllahu Anhu (Tahreer No. 28)

Seerat Ali bin Abi Talib RaziAllahu Anhu


सीरत-ए सय्यदना अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु

[तहरीर नंबर 28]


अमीरुल मोमिनीन अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु की फ़क़ाहत - 3


IV. मय्यित को ग़ुस्ल देने और उसकी तक्फ़ीन के अहकाम


i. शौहर का अपनी बीवी को ग़ुस्ल दिलाना: सय्यदना अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु के नज़दीक शौहर अपनी फ़ौतशुदा बीवी को ग़ुस्ल दे सकता है, आपने खुद अपनी बीवी फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा को ग़ुस्ल दिया। [अस्सैलुल जर्रार: 1/344, अल्मब्सूत़: 2/71] अस्मा बिन्ते उ़मैस रज़ियल्लाहु अन्हा का बयान है कि फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा ने वस़िय्यत की थी कि उन्हें मेरे और अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु के अलावा कोई दूसरा ग़ुस्ल न देगा, इसलिए उनकी वफ़ात पर मैंने और अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु ने उन्हें ग़ुस्ल दिया। [मुसन्नफ़ अब्दुर्रज़्ज़ाक़: 3/410; अल्मुह़ला: 5/175] इस अमल पर सहाबा का इज्माअ़ है क्योंकि इस वाक़िया को तमाम सहाबा ने जाना लेकिन किसी ने इंकार नहीं किया। [अल्मुग़्नी: 2/252; नैलुल अवत़ार : 4/58] और यही जम्हूर उ़लमा का मस्लक है। 

इस अमल की दलील रसूलुल्लाह ﷺ का आ़इशा रज़ियल्लाहु अन्हा के लिये ये फ़र्मान है : अगर मुझसे पहले तुम्हारी वफ़ात हो जाती है तो तुम्हारे लिये कोई तकलीफ़ की बात नहीं, मैं तुम्हें गुऊस्ल दिलाऊँगा, कफ़न दूँगा, फिर तुम्हारी नमाज़े जनाज़ा पढ़ाऊँगा और तुम्हें दफ़न करूँगा।" [सुनन इब्ने माजा: 1464] , इसकी सनद सही है।


ii. मय्यित के माल से तक्फ़ीन: सय्यदना अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु के नज़दीक अगर मय्यित अपना ज़ाती माल छोड़कर वफ़ात पाती है तो उसके माल से उसके कफ़न का इंतिज़ाम किया जाएगा। अब्दुल्लाह बिन ज़मीरा रिवायत करते हैं कि अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़र्माया : कफ़न का इंतिज़ाम मय्यित के असल माल से होगा। [अल्मुअ़ज्जमुल औसत़ / तब्रानी: 4/67] इसकी सनद ज़ईफ़ है। इसकी दलील ये है कि ग़ज़्वए उह़ुद के मौक़े पर मुस़्अ़ब बिन उ़मैर शहीद कर दिये गए और उन्हें कफ़न देने के लिये एक छोटी चादर थी अगर उससे सर ढाँपते तो पैर खुल जाते और पैर ढाँपते तो सिर खुल जाता, इसके अलावा जब हमें कोई चीज़ मिली तो आप ﷺ ने फ़र्माया: सर की तरफ़ ढाँप दो और दोनों पैर पर अज़्ख़र डाल दो। [सहीह मुस्लिम: 940]

इस हदीस से मालूम हुआ कि अगर मय्यित के कफ़न की ज़िम्मेदारी मुसलमानों पर आ़इद होती है तो आप ﷺ बरवक़्त मौजूद मुसलमानों का तआ़वुन लेकर उनके कफ़न का इंतिज़ाम करवा देते। 


iii. मर्द और औ़रत के कफ़न में मुबालग़ा आमेज़ से परहेज़ करना: सय्यदना अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु के नज़दीक मर्द के लिये कफ़न के तीन और औरत के लिये पाँच कपड़े इस्तेमाल करने चाहिए। अ़ल्लामा कासानी वग़ैरह ने आपका यही क़ौल नक़्ल किया है। [अल् बदायिउ़: 2/766, अल्मब्सूत़: 2/72] आपके नज़दीक कफ़न के कपड़ों में मुबालग़ा आमेज़ी करना यानी मर्द के लिये तीन और औ़रतों के लिये पाँच से ज़्यादा कपड़ों का इस्तेमाल मकरूह है। आप फ़र्माते हैं: औरत का कफ़न पाँच कपड़ों में और मर्द का कफ़न तीन कपड़ों में होगा और ह़द से तजावुज़ न करो अल्लाह तआ़ला ह़द से तजावुज़ करने वालों को पसन्द नहीं करता। [अल्बदायेअ़: 2/766, अल्मब्सूत़ 52/72]


iv. शहीद को ग़ुस्ल देना और उसकी तक्फ़ीन: इमाम कासानी वग़ैरह ने अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु का ये मस्लक नक़्ल किया है कि शहीद को न ग़ुस्ल दिया जाएगा और न ही उसकी तक्फ़ीन होगी। यानी अलग से उसको कफ़न नहीं दिया जाएगा उसी के कपड़ों में उसको दफ़न कर दिया जाएगा। चुनाँचे रिवायात में है कि जिन लोगों ने आपके साथ मुखालिफ़ीन से जंग लड़ी थी और क़त्ल कर दिये गए थे, आपने उनको ग़ुस्ल दिया और न ही उनकी तक्फ़ीन का हुक्म दिया, बल्कि अ़म्मार रज़ियल्लाहु अन्हु को बग़ैर ग़ुस्ल दिये दफ़न कर दिया। [अल्मुग़्नी: 2/534, फ़िक़्हुल इमाम: 1/306] ह़सन बस़री और सई़द बिन मुसय्यिब रहमतुल्लाह अलैह‌ के अलावा जम्हूर अहले इल्म का यही मस्लक है। अल्बत्ता ये दोनों ग़ुस्ल देने के क़ाइल हैं इस शुब्हा की बिना पर कि मय्यित जुनबी हो सकता है। [अल्बदायेअ़: 2/806, अल्मुग़्नी: 2/529]


सीरीज सीरते सय्यदना अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु तहरीर नंबर 28 आगे जारी है इंशाअल्लाह गुजारिश है इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। 

जज़ाकुमुल्लाहु ख़ैरन


Team Islamic Theology

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