Seerat Ali bin Abi Talib RaziAllahu Anhu (Tahreer No. 26)

Seerat Ali bin Abi Talib RaziAllahu Anhu


सीरत-ए सय्यदना अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु

[तहरीर नंबर 26]


27. अमीरुल मोमिनीन अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु की फ़क़ाहत - 1


I. इबादात

सय्यदना अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु दीनी इ़ल्मो बस़ीरत का समुन्द्र थे, आपने इबादात के अह़काम बताने में कोई कसर न छोड़ी, अगर उन अहकामात को यक्जा किया जाए तो कई ज़ख़ीम जिल्दें दरकार होंगी। इस ज़िम्न में दो किताबें क़ाबिले ज़िक्र हैं:

1. मौसूअ़तु फ़िक़्हे अ़ली बिन अबी त़ालिब/मुहम्मद क़ल्अ़जी, 

2. फ़िक़्हुल इमाम अली/अह़मद त़ाहा

मैं इस किताब में बतौर मिसाल चंद अह़काम का मज्मूआ़ ज़िक्र करूँगा।


II. त़हारत के अह़काम

i. शीरख़्वार बच्ची का पेशाब धोया जाए और बच्चे के पेशाब पर छींटे मारे जाएँगे : अमीरुल मोमिनीन अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु फ़र्माते हैं : बच्ची का पेशाब धोया जाएगा और बच्चे के पेशाब पर छींटे मारे जाएँगे, जब तक कि वो अनाज न खाएँ। [सहीह सुनन अबी दाऊद : अल्बानी: 1/75] ये हदीस मौकूफ़न सही है। इसकी दलील ये है कि जब ह़ुसैन बिन अली रज़ियल्लाहु अन्हु ने नबी करीम ﷺ की गोद में पेशाब किया तो लुबाबा बिन्ते ह़ारिस रज़ियल्लाहु अन्हु ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल ﷺ! आप मुझे अपना कपड़ा दे दें और दूसरा कपड़ा पहन लें, आप ﷺ ने फ़र्माया : बच्चे के पेशाब पर छींटे मारे जाएँगे और बच्ची के पेशाब को धोया जाएगा। [सहीह सुनन इब्ने माजा: 663 ये हदीस हसन सहीह है]


ii. बैठने वाले की नींद और उसके नाक़िज़ वुज़ू होने का हुक्म : इमाम अ़ब्दुर्रज़्ज़ाक़ ने अपनी मुसन्नफ़ में अपनी सनद से लिखा है कि अ़ली और इब्ने मसऊ़द रज़ियल्लाहु अन्हु और इमाम शअ़बी ने बैठकर सोने वाले आदमी के बारे में फ़त्वा दिया कि उस पर वुज़ू लाज़िम नहीं है। [मुसन्नफ़ अ़ब्दुर्रज़्ज़ाक़: 1/131] इसकी दलील रसूलुल्लाह ﷺ की ये हदीस है: आँख शर्मगाह का बंधन है, पस जो सो गया वो वुज़ू कर ले।" [सहीह सुनन अबीदाऊद: 203] इस हूदीस में बैठकर सोने और लेटकर सोने के दरम्यान तफ्नीक़ नहीं की गई है मुत्लक़ नींद को नाक़िज़ कहा गया है लिहाज़ा इसको बतौर दलील ज़िक्र करना मुनासिब नहीं है। इस सिलसिले में राजेह बात ये है कि गहरी नींद नाक़िज़ है हल्की नींद जिससे होशो ह़वास ख़त्म न हों नाक़िज़ नहीं है ख़्वाह किसी हालत में हो इस तरह तमाम रिवायात में तत्बीक़ हो जाती है। वल्लाहु आ़लम; मुतर्जिम


iii. मज़ी नाक़िज़ वुज़ू है : अमीरुल मोमिनीन अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु फ़र्माते हैं कि मुझे बहुत मज़ी आती थी, मैंने (आप ﷺ की बेटी का लिहाज़ करते हुए) एक आदमी (इससे मुराद मिक़्दाद बिन अस्वद हैं, जैसाकि सही बुखारी में वज़ाहत है। को हुक्म दिया कि इस सिलसिले में रसूलुल्लाह ﷺ से पूछें, उन्होंने आप ﷺ से पूछा तो आपने फ़र्माया : वुज़ू करो और अपनी शर्मगाह धो लो। [सहीह मुस्लिम/अल्हेज़:303]


iv. जनाबत के अ़लावा तमाम ह़ालात में मुस़्ह़फ़ को हाथ में लिये बग़ैर क़ुरआन की तिलावत करना : अली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु फ़र्माते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ जनाबत के अ़लावा बक़िया तमाम ह़ालात में हमें कुरआन पढ़ाते थे। [मुस्नद अहमद: 1125, सुनन तिरमिज़ी 146] 

अहमद शाकिर फ़र्माते हैं : इसकी सनद सही है।  सहाबा किराम और  ताबेईन  में से कई अहल आलिमों का यही क़ौल है कि आदमी वुज़ू के बग़ैर क़ुरआन पढ़ सकता है।  लेकिन मुसहफ़  में देख कर उसी वक़्त पढ़े जब वो बा-वुज़ू हो। सुफ़ियान सौरी  शाफ़ई  अहमद और  इसहाक़-बिन-राह्वीय का भी यही क़ौल है।

आमिर शअ़बी कहते हैं कि मैंने अबुल अ़रीफ़ हिम्दानी को फ़र्माते हुए सुना कि अली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु के पास था, उन्होंने पेशाब किया और फिर कहा : क़ुरआन को पढ़ो, जब तक जनाबत न हो और जब जनाबत लाहिक़ हो तो हर्गिज़ न पढ़ो, ह्त्ताकि एक हर्फ़ भी न पढ़ो। [मुसन्नफ़ अब्दुर्रज़्ज़ाक़: 1/336]


v. हाइज़ा औ़रत से वत़ी करना : सय्यदना उ़मर रज़ियल्लाहु अन्हु ने अली रज़ियल्लाहु अन्हु से पूछा कि अगर एक आदमी अपनी बीवी से ह़ालते है़ज़ में वत़ी कर ले तो उसका क्या हुक्म है? आपने फ़र्माया : उस पर कफ़्फ़ारा नहीं है, सिवाय इसके कि वो तौबा कर ले। [मुसन्नफ़ इब्ने अबी शैबा: 1/59] इस सिलसिले में इब्ने अ़ब्बास रज़ियल्लाहु अन्हा की रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़र्माया : यतस़द्दक़ु बि दीनारि औ निस़्फ़ दीनार" [सहीह सुनन अबीदाऊद: 264] (एक दीनार या निस़्फ़ दीनार सदक़ा करे।) इब्ने अ़ब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु फ़र्माते हैं कि है़ज़ के इब्तिदाई अय्याम में हो तो एक दीनार और आख़िरी अय्याम में हो तो आधा दीनार सदक़ा करे। देखिए [सहीह सुनन अबीदाऊद: 265]  वाज़ेह रहे कि पूरी उम्मते मुस्लिमा इस बात पर मुत्तफ़िक़ है कि हालते है़ज़ में औ़रत से जिमाअ़ करना हराम है। [बिदायतुल मुज्तहिद : 1/57, वल् मज्मूअ़: 2/359] इसलिए कि अल्लाह का फ़र्मान है :

وَيَسْتَلُوْنَكَ عَنِ الْمَحِيضِ قُلْ هُوَ أَذًى فَاعْتَزِلُوا النِّسَاءَ فِي الْمَحِيْضِ وَلَا تَقْرَبُوهُنَّ حَتَّى يَطْهُرْنَ فَإِذَا تَطَهَّرْنَ فَأْتُوهُنَّ مِنْ حَيْثُ أَمَرَكُمُ اللَّهُ

और वो तुझसे है़ज़ के बारे में सवाल करते हैं, कह दे वो एक तरह़ की गन्दगी है, सो है़ज़ में औ़रतों से अ़लैह़िदा रहो और उनके क़रीब न जाओ, यहाँ तक कि वो पाक हो जाएँ, फिर जब वो ग़ुस्ल कर लें तो उनके पास आओ जहाँ से तुम्हें अल्लाह ने ह़ुक्म दिया है। [सूरह बक़रह: 222]

हालते हैज़ में शर्मगाह में मुबाशिरत ह़राम है अल्बत्ता बीवी से बोसो किनार होना, उसके साथ लिपटना और लुत्फ़अन्दोज़ होना मना नहीं है। शर्मगाह के अलावा बीवी से जिस तरह चाहे लुत्फ़ अन्दोज़ हो सकता है। यहाँ मुबाशिरत से यही मुराद है।


सीरीज सीरते सय्यदना अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु तहरीर नंबर 26 आगे जारी है इंशाअल्लाह गुजारिश है इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। 

जज़ाकुमुल्लाहु ख़ैरन


Team Islamic Theology

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Subscribe

Follow Us

WhatsApp
Chat With Us
WhatsApp
WhatsApp Chat ×

Assalamu Alaikum 👋
How can we help you?

Start Chat