Seerat Ali bin Abi Talib RaziAllahu Anhu (Tahreer No. 07)

Seerat Ali bin Abi Talib RaziAllahu Anhu (Tahreer No. 07)


सीरत-ए सय्यदना अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु

[तहरीर नंबर 07]


6. सय्यदा फ़ात़िमा से रसूलुल्लाह ﷺ की मुह़ब्बत:

सय्यदना सौबान रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत हे कि जब रसूलुल्लाह ﷺ किसी सफ़र का आग़ाज़ करते तो मदीना में सबसे आख़िर में फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हु से मिलकर जाते और जब वापस आते तो सबसे पहले फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हु ही के घर आते। [मुस्नद अहमद: 22721, सनद साबित नही, सनद में हामिद अलशामी और सुलेमान अलमुनबाही दोनों मजहूल है]

अबू सअल्बा अल् ख़ुशनी रज़ियल्लाहु अन्हु की एक रिवायत में है कि अल्लाह के रसूल ﷺ जब किसी ग़ज़्वे या सफ़र से वापस आते तो सबसे पहले मस्जिद में जाते, वहाँ दो रकअ़त नमाज़ पढ़ते, फिर फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा के घर आते, फिर अपनी अज़्वाजे मुनाहरात के पास जाते। [अल्इस्तीआब: 4/376, इसकी सनद में अबू फ़र्दा अरुंहादी नामी ज़ईफ़ रावी हैं]

सय्यदा आ़इशा रज़ियल्लाहु अन्हा रिवायत करती हैं कि मैंने रसूलुल्लाह ﷺ की नशिस्त व बरख़्वास्त की सिफ़त फ़ातिमा से अच्छी बताते हुए किसी को नहीं देखा, वोह जब आप ﷺ के पास आतीं, आप उनकी तरफ़ लपककर उठते, बौसा देते और अपने पास बिठाते और जब अल्लाह के रसूल ﷺ उनके पास जाते तो वोह आपकी तरफ़ लपककर उठतीं, फिर आपको बोसा देतीं और आपको अपने पास बैठातीं। [सहीह मुस्लिम: 2450, सुनन अबी दाऊद : 5217] और दूसरी रिवायत में है कि आपके हाथों को बौसा देतीं। [सुनन अबी दाऊद: 5217]

जब सय्यदना अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़ातिमा के होते हुए अबू जहल की बेटी से शादी का इरादा किया तो अल्लाह के रसूल ﷺ ने इससे मुताल्लिक़ लोगों में ख़ुत्बा दिया। वाज़ेह रहे कि सय्यदा आ़इशा रज़ियल्लाहु अन्हा का सय्यदा फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा के मुताल्लिक़ मज़्कूरा रिवायत नक़्ल करना दोनों के बीच हक़ीक़ी मुहब्बत होने की दलील है, ऐसा कोई मामला नहीं कि दोनों में नाचाकी रहती थी, जैसाकि तोहमत लगाने वाले कहते हैं, बहरहाल आप ﷺ ने फ़र्माया: फ़ातिमा मेरे दिल का टुकड़ा है, जिसने इसे नाराज़ किया उसने मुझे नाराज़ किया। [सहीह बुख़ारी: 41733]

सय्यदना मिस्वर बिन मख़्रमा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि मैंने रसूलुल्लाह ﷺ को मिम्बर पर फ़र्माते हुए सुना: बनू हिशाम बिन मुग़ीरा मुझसे इजाज़त माँग रहे हैं कि अपनी लड़की का निकाह अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु से कर दें, हालाँकि मैं उन्हें इसकी इजाज़त नहीं दूँगा, कभी नहीं दूँगा, कभी नहीं दूँगा, अल्बत्ता इब्ने अबी त़ालिब को इख़्तियार है कि वोह मेरी बेटी को तलाक़ दे दें और उनकी बेटी से निकाह कर लें, मेरी बेटी मेरे दिल का टुकड़ा है, जो उसे बुरा लगेगा, वोह मुझे भी बुरा लगेगा और जिससे उसे तक्लीफ़ होगी मुझे भी उससे तक्लीफ़ होगी। [सहीह बुख़ारी: 5230; व मुस्लिम: 2449]

सहीह मुस्लिम में यह वाक़िया इस तरह बयान हुआ है कि मिस्वर बिन मख़्रमा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु ने जब फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा के होते हुए अबू जहल की बेटी को निकाह का पैग़ाम दिया तो मैंने रसूलुल्लाह ﷺ को इस सिलसिले मे मिम्बर पर ख़ुत्बा देते हुए सुना, उस वक्त में बालिग था, 

आप फ़र्मा रहे थे: फ़ातिमा मेरे जिगर का टुकड़ा है, मुझे ख़ौफ़ है कि कहीं वोह अपने दीन में आज़ माई न जाए।

फिर आपने बनू अ़बदे शम्स से ताल्लुक़ रखने वाले अपने दामाद इससे ज़ैनब बिन्ते रसूलुल्लाह ﷺ के शौहर अबुल आ़स़ बिन रबीअ़ रज़ियल्लाहु अन्हु मुराद हैं जब ग़ज़्वए बद्र मे क़ैदी बनाएं गए तो उन्हें आज़ाद कराने के लिये ज़ैनब रज़ियल्लाहु अन्हा ने अपना हार फ़िदये के तौर पर भेजा, मुसलमानों ने हार ज़ैनब रज़ियल्लाहु अन्हा को वापस कर दिया और अबुल आ़स़ रज़ियल्लाहु अन्हु से आपने यह अहद लिया कि वोह ज़ैनब को मदीना आने देंगे चुनाँचे उन्होंने वादा किया और उसे पूरा भी किया। 

ज़िक्र किया, उनकी तारीफ़ किया और कहा : उसने मुझसे बात की तो सच कहा, वादा किया तो पूरा किया। मैं किसी ह़राम चीज़ को हलाल और हलाल चीज़ को ह़राम नहीं करता, लेकिन अल्लाह की क़सम ! अल्लाह के रसूल ﷺ की बेटी और अल्लाह के दुश्मन की बेटी एक जगह कभी नहीं रह सकतीं। [सहीह मुस्लिम: 1903]

सुनन तिर्मिज़ी में अ़ब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु ने अबू जहल की बेटी से निकाह का चर्चा किया, रसूलुल्लाह ﷺ को ये ख़बर पहुँच गई, तो 

आप ﷺ ने फ़र्माया: "फ़ातिमा मेरे दिल का टुकड़ा है जो चीज़ इसे तकलीफ़ पहुँचाएगी और इसके लिये गिराँ होगी, वोह चीज़ मुझे भी तकलीफ़ पहुँचाएगी और मेरे लिये गिराँ होगी।" [फ़ज़ाइले सहाबा: 1327, इसकी सनद सही है]

इन अ़हादीस में फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हु के मुताल्लिक़ रसूलुल्लाह ﷺ का इज़्हारे मुहब्बत और सबके सामने इसका ऐलान, फिर यह कहना कि फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा को तकलीफ़ देना, दरहूक़ीक़त फ़ातिमा के ह़ुकूक़ो एहतिराम को नुमायाँ करना मक़्सूद है। नीज़ यह कि नबी करीम ﷺ को तकलीफ़ देना किसी भी हाल में जाइज़ नहीं है, अगरचे आप ﷺ की ज़िन्दगी में आपकी ईज़ारसानी का असल सबब जाइज़ ही क्यों न हो। चुनाँचे उलेमा का ख़्याल है कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने 'लस्तु अह़र्रिमु ह़लालल' कहकर यह बताना चाहा था कि अबू जहल की बेटी से अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु का निकाह करना शरअ़न जाइज़ है, हराम नहीं है, फिर भी आपने दोनों को ज़ौजियत में इकट्ठा करने से दो मंसूस अस्बाब की वजह से मना किया।

इससे फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा को तकलीफ़ पहुँचेगी और फिर बिल्वास्ता नबी करीम ﷺ को भी तक्लीफ़ लाहिक़ होगी, नतीजा यह होगा कि जो तकलीफ़ देने वाला होगा वोह ह़लाक होगा। चुनाँचे अ़ली और फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हु पर कमाल शफ़्क़त की वजह से आप ﷺ ने अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु को उस शादी से मना कर दिया।

गैरत की वजह से फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा को फ़ित़्ने में वाक़ेअ हो जाने का अन्देशा था।

कुछ लोगों ने हदीस की तशरीह यूँ की है कि मुमानिअ़त आप ﷺ का मक़सद न था, बल्कि आप बताना चाहते थे कि अल्लाह के फ़ज़्ल से मुझे मालूम है कि दोनों एक साथ एक शौहर की ज़ौजियत में नहीं रहेंगी और इस बात का भी एह़तिमाल है कि आप ﷺ अपनी बेटी और अल्लाह के दुश्मन की बेटी के एक साथ एक फ़र्द की ज़ौजियत में होने की ह़ुर्मत का ऐलान करना चाह रहे हैं यानी 'ला उह़र्रिमु हलालन' का मतलब है कि मैं अल्लाह ने जिस चीज़ को हलाल कर दिया है उसे हराम नहीं कर सकता और जिस चीज़ को हराम कर दिया है मैं उसे हुलाल नहीं कर सकता और न उसकी ह़ुर्मत बयान करने से ख़ामोश रह सकता हूँ, क्योंकि ऐसी चीज़ पर मेरा ख़ामोश रहना उसे हलाल कहने के मुतरादिफ़ है। पस उन्हीं हराम निकाहों में से यह भी है कि अल्लाह के दुश्मन की बेटी और मेरी बेटी एक साथ एक शौहर की ज़ौजियत में रहें। [शरह सहीह मुस्लिम: 16/236, 237]

सय्यदा फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा के मनाक़िब पर सय्यदना बुरैदा रज़ियल्लाहु अन्हु का बयान है कि रसूलुल्लाह ﷺ के नज़दीक औरतों में फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हु और मर्दों में अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु सबसे ज़्यादा महबूब थे। [अल्मुस्तदरक हाकिम 3528/मारिफ़तुस्सहाबा: 3/155] यह रिवायत बातिल हे इससे इस्तिदलाल सही नहीं इसकी सनद में एक रावी अ़ब्दुल्लाह बिन अ़त़ा है जिसको इमाम ज़हबी ने अज़्ज़ोअफ़ा में ज़िक्र किया है और कहा इमाम नसाई ने इसके बारे में कहा है कि कि क़वी नहीं है और हाफ़िज़ इब्ने हूजर ने अत्तक़रीब में सुदूक़ क़रार देते हुए कहा है यह मुदल्लस है और गल्तियाँ करता है। मज़ीद कि इस रिवायत को इसने अ़नअ़ना से बयान किया हे और इसी तरह एक दूसरा रावी जाफ़र बिन ज़ियाद अल्अ़हमर जिसको ज़हबी ने ख़ुद अज़्ज़ोअफ़ा में ज़िक्र किया है और हाफ़िज़ ने अत्तक़रीब में 'स़ुदूक़ यतशय्यिउ' क़रार दिया है और जब तशय्युअ़ से मुत्तहम है तो भी इस सिलसिले में रिवायत कैसे हुज्जत हो सकती है। 

तफ़्सील के लिये देखिए [अज़्ज़ईफ़तु लिल्अल्बानी: 1124]

वाज़ेह रहे कि इस हदीस और फ़ज़ीलते आइ़शा वाली हूदीस से जिसे अ़म्र बिन आ़स़ रज़ियल्लाहु अन्हु ने रिवायत किया है कि अल्लाह के रसूल  ﷺ से पूछा गया: आपके नज़दीक सबसे ज़्यादा कौन महबूब है? 

तो आपने जवाब दिया: आइशा, 

फिर पूछा गया: मर्दों में से? 

आपने जवाब दिया : इनके बाप अबूबक्र।

[सहीह बुख़ारी: 4358] 

बाज़ लोग दोनों ह़दीसों में से नुक्ते निकालते हैं और इब्नुल अरबी की इस हदीस की तशरीहू पेश करते हैं अ़ली और फ़ातिमा  के सबसे ज़्यादा मह़बूस होने का मतलब है कि आपके अ़हले बैत में औरतों में फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा और मर्दों में अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु सबसे ज़्यादा मह़बूस हैं। 

इब्नुल अरबी इस हदीस की तशरीहू में लिखते हैं, "तमाम मर्दों में अबूबक्र बीवियों में आइशा और अपने अहले मे फ़ातिमा औरतों में से और अली मर्दों में से, अल्लाह के रसूल ﷺ के नज़दीक सबसे ज़्यादा महबूब थे, मुहब्बत की इसी तर्तीब व दर्जाबन्दी से तमाम रिवायतों का अश्काल ख़त्म हो जाता है। [आरिज़तुल अह़वज़ी: 13/247-248]

 इन सब-तावीलात की चॅदाँ ज़रूरत नहीं क्योंकि यह रिवायत ही नाक़ाबिले ऐतिबार है और फिर क्या सय्यदा आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा अ़हले बैत से ख़ारिज हैं? क्या बीवियाँ अहले बैत में दाखिल नहीं हैं? कि यह तफ़्रीक़ की जाए कि अहले बैत में सय्यदा फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा और बीवियों में सय्यदा आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा महबूब, जबकि बुख़ारी की रिवायत में मुत्लक़न सय्यदा आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा को मह़बूबतरीन और मर्दों में मुद्लक़न अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु को मह़बूबतरीन क़रार दिया गया है।


7. दुनिया व आख़िरत की सरदारी:

मुतअ़द्दद सही अहादीस में वारिद है कि दुनिया व आख़िरत दोनों जगह आपको सियादत नसीब होगी। चुनाँचे अ़नस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु की रिवायत है कि नबी करीम ﷺ ने फ़र्माया: "ख़्वातीन दुनिया में से मरियम बिन्ते इमरान, ख़दीजा बिन्ते ख़ुवैलिद, फ़ातिमा बिन्ते मुह़म्मद और फ़िरओन की बीवी आसिया की फ़ज़ीलत पर बस है।" [फ़ज़ाइले सहाबा: 1325] शैख अल्बानी रहमतुल्लाह अलैह‌ ने इसको सही कहा है, देखिए मिश्कातुल मसाबीहू: 745

सय्यदना अबू सई़द ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़र्माया: सय्यदा फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा ख़्वातीने जन्नत की सरदार हैं मगर मरियम बिन्ते इमरान को जो मक़ाम हासिल है वोह अपनी जगह पर। [फ़ज़ाइले: 1332, इसकी सनद 'हसन लिगै़रिही' है] 

इमाम बुखारी रहमतुल्लाह अलैह‌ ने 'मनाक़िबे फ़ातिमा' का बाब बाँधा है और यह हदीस लिखी कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़र्माया: फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा ख़वातीने जन्नत की सरदार हैं। [सहीह बुख़ारी किताब फ़ज़्लुस्सहाबा: 4/252]


सीरीज सीरते सय्यदना अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु तहरीर नंबर 07 आगे जारी है इंशाअल्लाह गुजारिश है इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। 

जज़ाकुमुल्लाहु ख़ैरन


Team Islamic Theology

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