Seerat Ali bin Abi Talib RaziAllahu Anhu (Tahreer No. 05)

Seerat Ali bin Abi Talib RaziAllahu Anhu (Tahreer No. 05)


सीरत-ए सय्यदना अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु

[तहरीर नंबर 05]


5. सय्यदना अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु की सय्यदा फ़ात़िमा रज़ियल्लाहु अन्हा से शादी

यह फ़ातिमा बिन्ते इमामुल मुत्तक़ीन सय्यदे वुल्दे आदम रसूलुल्लाह ﷺ हैं। माँ का नाम ख़दीजा बिन्ते ख़ुवैलिद रज़ियल्लाहु अन्हा हैं। [असदुल् ग़ाबा: 5/520] 

नबी करीम ﷺ को नुबुव्वत मिलने से पहले जबकि आपकी उ़म्र पेतीस (35) साल थी, फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा की विलादत हुई। [तब्क़ात इब्ने सअद: 8/26] 

दो हिज्री मे ग़ज़्वए बद्र के बाद अल्लाह के रसूल ﷺ ने अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु से फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा की शादी कर दी। आपके बत़न से ह़सन, ह़ुसैन रज़ियल्लाहु अन्हुमा और उम्मे कुलसुम रज़ियल्लाहु अन्हा की विलादत हुई, वफ़ाते नबवी के छः महीने बाद आपकी भी वफ़ात हो गई। [अल्इस़ाबा: 4/365]


i. मुहर और शादी का सामान: सय्यदना अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु का बयान है कि जब रसूलुल्लाह ﷺ के पास फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा के लिये निकाह का पैग़ाम आने लगा तो मेरी लौण्डी ने मुझसे कहा: क्या आपको मालूम है कि फ़ातिमा बिन्ते रसूलुल्लाह ﷺ के लिये आपके पास निकाह का पैग़ाम आने लगा है, 

मैंने कहा नहीं, मैं नहीं जानता। 

उसने कहा: यक़ीनन उनके लिये शादी का पैग़ाम आने लगा है, आप क्यों नहीं रसूलुल्लाह ﷺ के पास इस इरादे से जाते कि वोह आपसे उनका निकाह कर दें। 

मैंने कहा: मेरे पास है ही क्या कि जिससे निकाह करूँ। 

उसने कहा अगर आप रसूलुल्लाह ﷺ के पास जाएँगे तो मुझे यक़ीन है कि वोह रिश्ता आपसे कर देंगे। वोह मुसलसल मुझे उम्मीद दिलाती रही यहाँ तक कि मैं रसूलुल्लाह ﷺ की ख़िदमत में हाज़िर हुआ लेकिन आपकी हैबतो जलाल की वजह से बात न कर सका, लेकिन आप ﷺ ख़ुद गोया हुए और पूछा: कैसे आना हुआ? क्या कोई ज़रूरत है? 

मैं ख़ामोश रहा। 

आपने फ़र्माया, शायद तुम फ़ातिमा के मुताल्लिक़ पैग़ाम देने आए हो? 

मैंने अ़र्ज़ किया, हाँ। 

फिर आपने पूछा: क्या तुम्हारे पास अदायगी महर के लिये कुछ है? 

मैंने कहा, कुछ नहीं है ऐ अल्लाह के रसूल! 

आपने पूछा: मैंने तुम्हें जो ज़िरह दी थी उसका क्या किया? क़सम है उस ज़ात की जिसके हाथ में अ़ली की जान है वोह ह़ुत़्मी (कुशादा) ज़िरह थी, और उसकी क़ीमत चार सौ दिरहम थी। 

मैंने कहा: वोह मेरे पास है। 

आप ﷺ ने फ़र्माया: मैंने फ़ातिमा की शादी तुमसे कर दी, उसे बतौर महर फ़ातिमा के पास भेजो, पस यही फ़ातिमा बिन्ते रसूल ﷺ का हक़े महर था। [दलाइलुन् नुबुव्वत/अल्बैहक़ी: 3/160; इसकी सनद हसन है] 

फिर अल्लाह के रसूल ﷺ ने एक चादर एक मश्कीज़ा एक चमड़े का तकिया जिसमें इज़ख़िर भरी हुई थी देकर फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा को रुख़्सत किया। [सहीह अस्सीरतुन् नब्वियतु: पेज 667, मुस्नदे फ़ातिमा जौहरा/अस्सुयूती]

और शियी रिवायात में आया है कि अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हा कहते हैं, फिर मैंने अपनी ज़िरह ली और उसे लेकर बाज़ार में गया और उ़स्मान बिन अफ़्फ़ान रज़ियल्लाहु अन्हु के हाथ चार सौ दिरहम में बेच दिया, जब मैंने दराहिम अपने हाथ में ले लिये और उन्होंने ज़िरह मुझसे ले ली, तो कहने लगे: ऐ अबुल ह़सन ! क्या इस ख़रीदो फ़रोख़्त में ज़िरह और इन दराहिम का तुमसे ज़्यादा ह़क़दार कोई नहीं है? मैंने कहा: हाँ ज़रूर। फिर कहा : लो यह ज़िरह मेरी तरफ़ से तुम्हारे लिये हदिया है। चुनाँचे मैंने दराहिम और ज़िरह दोनों लेकर रसूलुल्लाह ﷺ की ख़िदमत में हाज़िर हुआ और आपके सामने रख दिये। उस़्मान रज़ियल्लाहु अन्हु ने जो कुछ कहा था वोह बता दिया, आप ﷺ ने उनके लिये खै़रो बरकत की दुआ़ फर्माई। [कश्फ़ुल ग़म्मा/अरैली: 1/359, बहारुल अनवार/अल्मज्लिसी: पेज 29]


ii. शादी : अस्मा बिन्ते उ़मैस रज़ियल्लाहु अन्हा का बयान है कि मैं फ़ातिमा बिन्ते रसूल ﷺ के रुख़्सती में मौजूद थी, सुबह हुई तो अल्लाह के रसूल ﷺ घर के दरवाज़े पर आए और कहा, "ऐ उम्मे ऐमन! मेरे भाई को आवाज़ दो" मैं कहने लगी वोह तुम्हारा भाई हैं और उनसे आप अपनी बच्ची का निकाह कर रहे हैं? आपने फ़र्माया : "हाँ, ऐ उम्मे ऐमन! वोह कहती हैं कि अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु बाहर निकले, आप ﷺ उनके जिस्म पर पानी का छींटे मारे, और उनके लिये दुआ़ए ख़ैर की। फिर फ़र्माया "फ़ातिमा को मेरे पास बुलाओ।" अस्मा रज़ियल्लाहु अन्हा का बयान है कि वोह आईं और शर्म से उनके क़दम आगे नहीं बढ़ रहे थे। अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़र्माया: "ध्यान से सुनो! मैंने तुम्हारा निकाह़ ऐसे शख़्स से कर दिया है जो मेरे अहले बैत मे मेरे नज़दीक सबसे ज़्यादा महबूब है।" फिर आपने फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा पर भी पानी के छीटे मारे और उनके लिये दुआ़ए ख़ैर फ़र्माई। फिर लौटकर जाने लगे कि इतने में आपकी नज़र सामने ही एक साये पर पड़ी। पूछने लगे : "यह कौन है?" मैं बोल पड़ी कि मैं हूँ, आपने कहा: कौन अस्मा? मैंने कहा, जी हाँ। आपने कहा: अस्मा बिन्ते उ़मैस हो? मैंने कहा: जी हाँ, आपने कहा "क्या तू रसूलुल्लाह ﷺ के ए़ज़ाज़ो इकराम में बिन्ते रसूल की रुख़्स़ती में आई थीं?" मैंने कहा, हाँ। फिर आपने मेरे लिये दुआ़ की। [फ़ज़ाइले सहाबा: 2/953, हदीस 342]

iii. वलीमा : सय्यदना बुरैदा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है, उन्होंने कहा कि जब जनाब अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हु को पैग़ामे निकाह दिया तो आप ﷺ ने फ़र्माया: "शादी के लिये वलीमा ज़रूरी है।" रावी का बयान है कि सअ़द ने कहा: मेरे पास एक दुम्बा है, फिर चंद सहाबा की जमाअ़त ने मिलकर कई स़ाअ़ मकई का आटा जमा किया और जब शबे ज़ुफ़ाफ़ आई तो आपने फ़र्माया: ऐ अली ! मुझसे मुलाक़ात करने से पहले कोई इक़्दाम मत करना, फिरं आपने पानी मँगवाया और उससे वुज़ू किया, फिर उसे अ़ली रज़ि.. पर उँडेल दिया, और यह दुआ़ दी:

"ऐ अल्लाह! इन दोनों में बरकत अ़ता फ़र्मा और इनसे जो बहादुर औलाद हो उसमे भी खै़रो बरकत दे दे।" अल्मुअ़जम अल्कबीर/त़ब्रानी हदीस: 1153 इस की सनद ज़ईफ़ हैं क्योंकि इसमें इंक़ित़ाअ़ हैं।


सीरीज सीरते सय्यदना अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु तहरीर नंबर 05 आगे जारी है इंशाअल्लाह गुजारिश है इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। 

जज़ाकुमुल्लाहु ख़ैरन


Team Islamic Theology

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