सीरत-ए सय्यदना अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु
[तहरीर नंबर 15]
17. सुन्नत व इज्माअ़ से साबित: नबी ﷺ ने किसी को वारिस नहीं बनाया
इमाम इब्ने तैमिया रहमतुल्लाह अलैह फ़र्माते हैं: नबी ﷺ का किसी को वारिस न बनाना सही तय व क़त़ई सुन्नत और इज्माओ़ सहाबा से साबित है और ये दोनों क़ज़ई दलील हैं, लिहाज़ा अपने ज़न्न (गुमान) पर मब्नी उ़मूमी मफ़्हूम से उन्हें टकराना और दोनों में तआरुज़ पैदा करना जाइज़ नहीं है और अगर उ़मूमी मफ़्हूम को दुरुस्त मान लिया जाए तो इसमें तख़्सीस से कोई चीज़ मानेअ़ नहीं है, बहरस़ूरत ये दलील ज़न्नी होगी जो कि क़त़ई के मुआ़रिज़ नहीं हो सकती, क्योंकि ज़न्नी क़त़ई की मुआरिज़ नहीं होती।
इसी तरह हमारी दलील के क़त़ई होने की दूसरी वजह ये है कि "हम अम्बिया का कोई वारिस नहीं होता" वाली रिवायत को मुख्तलिफ़ औक़ात में और मुख्तलिफ़ मजालिस में कई सहाबा ने रिवायत किया है और किसी ने इस पर कोई ऐतिराज़ नहीं किया, बल्कि उसे क़ुबूल किया और सच जाना और यही वजह थी कि आप ﷺ की अज़्वाजे मुत़ाहरात में से किसी ने मीरासे नबवी ﷺ के मुतालबे पर इसरार नहीं किया, न ही आप ﷺ के चचा (अ़ब्बास) ने इस मुत़ालबे पर इसरार किया, बल्कि अगर किसी ने मुत़ालबा किया और उसे नबी करीम ﷺ का फ़र्मान सुनाया गया तो वोह अपने मुत़ालबे से फ़ौरन बाज़ आ गया। अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु की दौरे ख़िलाफ़त तक तमाम खुलफ़ाए राशिदीन के अ़हद में यही हालत बरक़रार रही, किसी ने न कोई तब्दीली की और न ही आप ﷺ का तर्का तक़्सीम किया। [मिन्हाजुस्सुन्ना/ इब्ने तैमिया: 4/220]
इमाम इब्ने तैमिया रहमतुल्लाह अलैह फ़र्माते हैं : उ़स्मान ज़ुन्नूरैन रज़ियल्लाहु अन्हु के बाद अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु ने मंस़बे ख़िलाफ़त सम्भाला, फ़िदक वग़ैरह की ज़मीनें आपकी हुकूमत की ज़ेरे निगरानी हो गईं, लेकिन आपने उसमें से कुछ भी न औलाद फ़ातिमा को दिया, न अज़्वाजे मुत़ाहरात को दिया और न ही अ़ब्बास की आल औलाद को। पस अगर गुज़िश्ता तीन खुलफ़ा के दौर में ये चीज़ जुल्म थी और अब अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु उसे मिटाने की ताक़त रखते थे तो आपके लिये मुआ़विया रज़ियल्लाहु अन्हु और उनकी फ़ौज से लड़ने के बिल्मुक़ाबिल ये काम आसान और मुक़द्दम था कि गुज़िश्ता तीन अदवार से चले आ रहे जुल्म का ख़ात्मा करें, क्या आप सोच सकते हैं कि वोह मुआ़विया रज़ियल्लाहु अन्हु और उनकी फ़ौज से जंग तो छेड़ें कि शर्रो फ़साद को भड़कने का मौका मिले। और ह़क़ हक़दार रसीद के तह़त नबी करीम ﷺ के महरूम वरसा को उनका थोड़ा सा माल न दिलाएँ? जबकि ये बहुत मामूली बात थी। [मिन्हाजुस्सुन्ना /इब्ने तैमिया : 6/347]
अ़ब्बासी ख़लीफ़ए अबुल अ़ब्बास अस्सफ़्फ़ाह़ ने इसी मसले में अपने कुछ मुनाज़िरीन के ख़िलाफ़ खुलफ़ाए राशिदीन के इज्माअ़ से दलील क़ायम की थी। अ़ल्लामा इब्नुल जौजी रहमतुल्लाह अलैह ने अपनी किताब 'तल्बीसे इब्लीस' में इस वाकिया को नक़्ल किया है कि 'सफ़्फ़ाह़' के बारे में हमें मालूम हुआ कि,
एक दिन उन्होंने ख़ुत्बा दिया। दौराने ख़ुत्बा एक आदमी उठकर खड़ा हुआ और कहने लगा, औलादे अ़ली में से हूँ, ऐ अमीरुल मोमिनीन! मेरे ज़ालिम के ख़िलाफ़ मेरी मदद कीजिए, ख़लीफ़ा ने पूछा तुम पर किसने जुल्म किया है?
उसने कहा: मैं आले अ़ली में से हूँ और अबूबक्र ने फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा को फ़िदक की ज़मीन विरासत में न देकर मुझ पर ज़ुल्म किया।
ख़लीफ़ा ने पूछा और ये ज़ुल्म तुम पर ऐसे होता रहा है?
उसने कहा, हाँ,
ख़लीफ़ा ने पूछा: उनके बाद कौन हुआ?
उसने कहा, उ़मर रज़ियल्लाहु अन्हु, ख़लीफ़ा ने पूछा, और उन्होंने भी ये ज़ुल्म रवा रखा?
उसने कहा: हाँ,
ख़लीफ़ा ने कहा: उनके बाद कौन हुआ?
उसने कहा, उ़स्मान, ख़लीफ़ा ने कहा, और उन्हों ने भी ये ज़ुल्म रवा रखा?
उसने कहा, हाँ,
ख़लीफ़ा ने पूछा, उनके बाद कौन हुआ?
अब वो इधर उधर देखने लगा और भागने की ताक में लग गया।
[तल्बीसे इब्लीस, पेज 135]
मीरासे नबवी ﷺ के मसले में अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु के इज्तिहाद की दुरुस्तगी और सच्चाई का ऐतिराफ़ ख़ुद फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हु के बत़न से पैदा होने वाली औलादे अ़ली की नस्लों ने भी किया। इमाम बैहक़ी रहमतुल्लाह अलैह अपनी सनद से फुजै़ल बिन मरज़ूक़ से रिवायत करते हैं कि उन्होंने कहा, ज़ैद बिन अ़ली बिन ह़ुसैन बिन अ़ली बिन अ़बी त़ालिब ने कहा : सुनो! अगर अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु की जगह पर में होता तो फ़िदक की ज़मीन के मुताल्लिक़ में भी वही फ़ैसला देता जो अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने दिया था। [तारीख़ुल मदीना / इब्ने शैबा: 1/200; अल् बिदाया वन् निहाया: 5/253]
इसी तरह अबुल अ़ब्बास क़ुर्तुबी ने जुम्लए अहले बैत का इत्तिफ़ाक़ नक़्ल किया है कि वोह लोग फ़िदक की ज़मीन की मिल्कियत के कभी ख़्वाहाँ न हुए, बल्कि वोह हमेशा उसकी आमदनी को अल्लाह के रास्ते में ख़र्च करते रहे, आपने अहले बैत के ज़िक्र में सबसे पहले अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु फिर आपकी औलाद और फिर अ़ब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु की औलाद का ज़िक्र किया है, जिनके हाथो में अल्लाह के रसूल ﷺ के सदक़े की निगरानी थी, आप फ़र्माते हैं: "जब अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु ने मंसबे ख़िलाफ़त सम्भाला तो अबूबक्र, उ़मर, और उ़स़्मान रज़ियल्लाहु अन्हुमा की अ़हदे ख़िलाफ़त में जारी किसी निज़ाम में तब्दीली नहीं किया, उसकी मिल्कियत से छेड़छाड़ नहीं की, और न ही उसकी कोई जायदाद तक़्सीम की, बल्कि ख़िलाफ़त के इम्लाक के जो मसारिफ़ पहले से चले आ रहे थे उन्हीं में ख़र्च किया, उसके बाद ख़िलाफ़त ह़सन बिन अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु के हाथों में मुंतक़िल हुई, फिर सिलसिलेवार ह़ुसैन बिन अ़ली, फिर अ़ली बिन ह़ुसैन फिर ह़ुसैन बिन हुसैन, फिर ज़ैद बिन हुसैन फिर अब्दुल्लाह बिन हुसैन फिर आले अ़ब्बास के हाथों में मुंतक़िल होती रही, जैसाकि अबूबक्र अल्बुकर्का़नी ने अपनी सही में ज़िक्र किया हे। बहरह़ाल ये सब अहले बैत के बुज़ुर्ग शुरफ़ा हैं और ये लोग शिया और उनके अइम्मए हज़रात के नज़दीक सबसे ज़्यादा मुअ़तमद और क़ाबिले क़द्र हैं, लेकिन उनमें से किसी से कोई एक भी रिवायत नहीं मिलती कि उसने नबी करीम ﷺ के तरका को अपनी विरासत और मिल्कियत समझा हो, लिहाज़ा अगर शिया हज़रात का दावा सच है तो अ़ली रज़ियल्लाहु अन्हु या आपके अहले बैत में से किसी को अपना ह़क़ ज़रूर ले लेना चाहिए था, क्योंकि अब हुक़ूमत उन्हीं के हाथों में थी वरना ये तस्लीम करना होगा कि ये दावा सही नहीं। [अल्मुफ़्हम/अल्क़ुत़ुबी : 3/564]
हाफ़िज़ इब्ने कसीर रहमतुल्लाह अलैह फ़र्माते हैं: रवाफ़िज़ ने इस मक़ाम पर बड़ी जिहालत व नादानी का सुबूत दिया है और ऐसी किज़्ब बयानी की है जिसकी हक़ीक़त से वोह ख़ुद ही नावाक़िफ़ हैं, उन्होंने ग़ैर ज़रूरी बातों में खुद को उलझा रखा है, अगर ये लोग मामलात की ह़क़ीक़त समझने की कोशिश करते तो सिद्दीक़ की फ़ज़ीलत का ज़रूर ऐतिराफ़ करते और आपकी दलीलो माज़िरत को ज़रूर क़बूल करते, लेकिन क्या किया जाए, ये अजीब क़ौम है, मुत्शाबेह और लोच लचर दलाइल से इस्तिदलाल करती है और सहाबा व ताबेईन और हर दौर और हर जगह के मुअ़तबर उलमाए इस्लाम के यहाँ जो बातें मुसल्लम उन्हें छोड़ देती है। [अल् बिदाया वन् निहाया: 5/251, 253]
सीरीज सीरते सय्यदना अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु तहरीर नंबर 15 आगे जारी है इंशाअल्लाह गुजारिश है इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
जज़ाकुमुल्लाहु ख़ैरन
Team Islamic Theology

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