Seerat Ali bin Abi Talib RaziAllahu Anhu (Tahreer No. 14)

Seerat Ali bin Abi Talib RaziAllahu Anhu

सीरत-ए सय्यदना अली बिन अबी तालिब रज़ियल्लाहु अन्हु

[तहरीर नंबर 14]


16. मीरासे नबवी ﷺ और सय्यदा फ़ातिमा व अबूबक्र सिद्दीक़ का मामला

मीरासे नबवी ﷺ के मुताल्लिक़ अबूबक्र स़िद्दीक़ और सय्यदा फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा का मामला

हम नबियों का कोई वारिस नहीं होता, जो कुछ छोड़ जाते हैं वो सदका होता है। [बुख़ारी: 6725]

उम्मुल मोमिनीन आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा फ़र्माती हैं: फ़ातिमा और अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु के पास आए और आपसे रसूलुल्लाह ﷺ की मीरास, फ़िदक की ज़मीन और ख़ैबर का हिस्सा तलब करने लगे। अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़र्माया: मैंने रसूलुल्लाह ﷺ को फ़र्माते हुए सुना, हमारा कोई वारिस नहीं होता, जो कुछ हम छोड़ जाते हैं वो सदक़ा हुआ करता है। यक़ीनन आले मुहम्मद ﷺ उस माल से खाते रहेंगे। [बुख़ारी: 6726]

और एक रिवायत में है कि अबूबक्र (रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़र्माया: रसूलुल्लाह ﷺ जो काम किया करते थे मैं उसको छोड़ नहीं सकता, उसको ज़रूर करूँगा, अगर मैंने उसमें से किसी चीज़ को छोड़ दिया तो गुमराह हो जाऊँगा। [मुस्लिम: 1759]

उम्मुल मोमिनीन आइशा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी करीम ﷺ की वफ़ात के बाद आपकी अज़्वाजे मुत़ह्हरात ने उ़स्मान बिन अफ़्फ़ान रज़ियल्लाहु अन्हु को अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु की ख़िदमत में भेजना ताकि मीरास का मुत़ालबि करें, तो उम्मुल मोमिनीन आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने फ़र्माया: क्या रसूलुल्लाह ﷺ का ये इर्शाद नहीं है कि ला नूरिसु मा तरक्ना सदक़ा हमारा कोई वारिस नहीं होता जो कुछ हम छोड़ते हैं सदका होता है। [बुखारी: 6730, मुस्लिम: 1758]

और अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़र्माया: मेरी मीरास का एक दीनार भी तक़्सीम न होगा, जो कुछ मैंने अपनी बीवियों के नफ़्क़ा और आ़मिल के ख़र्च के सिवा छोड़ा वो सदका है। [बुखारी: 6729]

रसूलुल्लाह ﷺ के इर्शाद की पाबन्दी करते हुए यही कुछ अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा के साथ किया और इसीलिए फ़र्माया: रसूलुल्लाह ﷺ जो काम किया करते थे मैं उसको छोड़ नहीं सकता, उसको ज़रूर करूंगा। [मुस्लिम: 1758] 

और फ़र्माया, अल्लाह की क़सम मैं कोई काम जिसे रसूलुल्लाह ﷺ को करते हुए देखा है उसको नहीं छोड़ूगा, वही करूंगा जो रसूलुल्लाह ﷺ करते थे। [बुखारी: 2726]

हदीस से इस्तिदलाल के बाद फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा ने आपसे कोई हुज्जत और बहस नहीं की, ये इस बात की दलील है कि उन्होंने हक़ को कुबूल किया और नबी करीम ﷺ के फ़र्मान की पाबन्दी की।

इमाम इब्ने कुतैबा रहमतुल्लाह अलैह‌ फ़मति हैं: फातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा का अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु से नबी करीम ﷺ की मीरास का मुतालबा करना नापसंदीदा अमल न था, इसलिए कि इनको इस सिलसिले में नबी करीम ﷺ के इर्शाद का इल्म न था लेकिन जब इनको अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने ख़बर दी तो वो अपने मुतालबा से बाज़ आ गईं। [वावील मुख़्तलिफ़ुल हदीस: 189]

क़ाज़ी अ़याज़ रहमतुल्लाह अलैह‌ फ़मति हैं: हदीस से इस्तिदलाल के बाद फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा का अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु से ह़ुज्जत न करना इज्माज़ को तस्लीम करने की दलील है। और जब आपको हदीस पहुँच गई और उसकी वज़ाहत कर दी गई तो आपने अपनी राय को तर्क कर दिया और उसके बाद न तो आपने और न आपकी ज़ुर्रियत ने मीरास का म़ुतालबा किया और जब अली रज़ियल्लाहु अन्हु ख़लीफ़ा बनाए गए तो अबूबक्र व उमर रज़ियल्लाहु अन्हु के फ़ेअ़ल से ज़र्रा बराबर इन्हिराफ़ न किया। [शरह सहीह मुस्लिम लिन्नवनी: 12/318]

ह़म्माद बिन इस्हाक़ रहमतुल्लाह अलैह‌ फ़मति हैं: अ़ब्बास, फ़ात़िमा, अली और अज़्वाजे मुत़ह्हरात का अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु से मुतालबे के बारे में जो सही रिवायात आई हैं वो मीरास के बारे में हैं और जब अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु और अकाबिर स़ह़ाबा ने उनको नबी करीम ﷺ के इस इर्शाद की ख़बर दी ला नूरिसु मा तरक्ना स़दक़ा हमारा कोई वारिस नहीं होता, हम जो कुछ छोड़ते हैं सदक़ा होता है। तो उन सबने उसको कुबूल किया और जान लिया कि यही हक़ है। अगर रसूलुल्लाह ﷺ ने ये इर्शाद न फ़र्माया होता तो अबूबक़ व उमर  को भी आइशा व हफ़्सा  की मीरास के ज़रिये से वाफ़िर मिक़्दार में हिस्सा मिलता। लेकिन उन्होंने अल्लाह व रसूल ﷺ के फ़र्मान को तर्जीह़ दी और आइशा व हफ्सा और दीगर लोगों को मीरास से रोक दिया। अगर रसूलुल्लाह ﷺ का कोई वारिस होता तो अबूबक्र व उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा के लिए ये इन्तिहाई फ़ख्ऱ  की बात थी कि उनकी बेटियाँ रसूलुल्लाह ﷺ के वारेसीन में होतीं। [अल्बिदाया बन्निहाया: 5/252, 253]

फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा के नाराज़ होने और अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु से क़त़अ़ तअ़ललुक़ कर लेने के सिलसिले में जो रिवायात बयान की जाती हैं वो मुतअ़द्दिद दलाइल की बिना पर बई़द अज़्क़यास और बेबुनियाद है। उन दलील में से चंद ये हैं:

इमाम बैहक़ी ने इमाम शज़बी के तरीक़ से रिवायत की है कि अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा की ए़यादत के लिए हाज़िर हुए। अली रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा से कहा: ये अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु तशरीफ़ लाए हैं, तुम्हारे पास आने की इजाज़त चाहते हैं।

फ़ातिमा (रज़ि.) ने कहा: क्या आप इजाज़त देना पसंद करते हैं? 

फ़र्माया: हाँ।

फिर फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा ने इजाज़त दी, आपके पास अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु हाज़िर हुए आपको खुश करने लगे और आप खुश हो गईं। 

[अबात़ील युजिबु अन तमही मिनत्तारीख़: 109]

इससे अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु से फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा के क़त़अ़ तअ़ल्लुक़ का इश्काल ज़ाइल हो जाता है। और ये कैसे हो सकता है जबकि आप ख़ुद फ़र्माते हैं: रसूलुल्लाह ﷺ के क़राबतदार मेरे नज़दीक अपने क़राबतदारों के साथ सिलारहमी से ज़्यादा महबूब हैं। [बुखारी: 4036]

अबूवक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने जो कुछ किया वो रसूलुल्लाह ﷺ के हुक्म की इत्तिबाअ़ में किया। 

एक त़रफ़ फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा रसूलुल्लाह ﷺ की जुदाई के ग़म में निढाल थीं, जिसके सामने तमाम मुसीबतें हेच थीं और ख़ुद भी बीमार पड़कर साहिबे फ़राश हो गईं और दूसरी त़रफ़ अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु उमरे ख़िलाफ़त और मूर्तद्दीन से क़िताल में इस कद्र मशग़ूल हुए कि मामूली फ़ुर्सत भी न रही और फिर फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा को मालूम था कि वो जल्द वफ़ात पाकर अपने वालिद से मिलने वाली हैं जैसा कि रसूलुल्लाह ﷺ ने उनको खबर दी थी पस ज़िसकी ये स़ूरते हाल हो वो दुनियावी उमूर में कहा दिलचस्पी ले सकता है। यही वो अस्बाब थे जिसकी वजह से फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा और ख़लीफ़-ए-रसूल अबूबक रज़ियल्लाहु अन्हु के बीच ज़्यादा इत्तिस़ाल न रह सका, जिसको क़त़अ़ ताल्लुक़ पर महमूल कर लिया गया। मुहल्लब रहमतुल्लाह अलैह‌ ने कितनी अच्छी बात कही है, जिसे अ़ल्लामा ऐ़नी रहमतुल्लाह अलैह‌ ने नक्ल किया है: अबूबक्र और फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा के बीच मीरास के मसले में मुलाक़ात हुई और उसके बाद फातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा ने अपने घर को लाज़िम पकड़ा जिसे रावी ने क़त़अ़ ताल्लुक़ से ताबीर कर दिया। [अबात़ील युजिबु अन तमह़ी मिनत्तारीख़: 108]

तारीख़ी हैसियत से ये बात साबितशुदा है कि अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु अपने दौरे ख़िलाफ़त में मदीना के माले फै़, फ़िदक के अ़म्वाल और ख़ैबर के ख़ुम्स में से अ़हले बैत के ह़ुक़ूक़ बराबर अदा करते रहे लेकिन नबी करीम ﷺ के इर्शाद पर अ़मल पैरा होते हुए इसमें मीरास का हुक्म जारी नहीं किया।

मुहम्मद बिन अ़ली बिन हुसैन अल बाक़िर और जै़द बिन अ़ली बिन हुसैन रहमतुल्लाह अलैह‌ से रिवायत है कि इन दोनों ने फर्माया: अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने हमारे बाप दादा के साथ कोई जुल्मो ज्यादती नहीं की। [अल्मुर्तज़ा लिन्नदवी: 90, 91: नक़्लन अ़न नहजिल बलाग़त शरह इब्ने अबी अल्हदीद]

फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा का इंतिक़ाल 3 रमजानुल मुबारक 11 हिजरी शंबा की रात, रसूलुल्लाह ﷺ के इंतिक़ाल से छः माह बाद हुआ और रसूलुल्लाह ﷺ आपको पहले से बता चुके थे कि आपके अहल में सबसे पहले आप ही उनसे मिलेंगी और उसके साथ ये भी फ़र्माया था। 

क्या तुम इससे खुश नहीं हो कि तुम जन्नती औरतों की सरदार होगी। [अल्मुर्तज़ा लिन्तदवी: 94] ये रिवायत सहीह बुखारी की है। देखिए सहीह बुखारी: 3624 

अ़ली बिन हुसैन रहमतुल्लाह अलैह‌ की रिवायत है: फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा का इंतिक़ाल मग़्रिब व इशा के बीच हुआ। अबूबक्र उमर, उस्मान, ज़ुबैर और अ़ब्दुर्रहमान बिन औफ़  हाज़िर हुए और जब नमाज़े जनाजा के लिये आपको रखा गया तो अली रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़र्माया, अबूबक्र आगे आइए। अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने कहा: अबुल हस़न आप मौजूद हैं?

अली रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़र्माया: हाँ। मैं मौजद हू लेकिन आप आगे बढ़ें, अल्लाह की क़सम आप ही जनाज़ा पढ़ाएँगे। फिर अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा की नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई और रात ही में तदफ़ीन अ़मल में आई। और एक रिवायत में है कि : अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा की नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई और चार तक्बीरें कहीं। [अल्मुर्तज़ा लिन्नदवी: 94, त़ब्क़ातुल कुब्रा : 7/29]

और स़हीह मुस्लिम की रिवायत में है कि अली रज़ियल्लाहु अन्हु ने उनकी नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई, और यही रिवायत राजेह है। [मुस्लिम: 1759]

अबूबकक्र रज़ियल्लाहु अन्हु का अ़हले बैत के साथ ताल्लुक़ मुहब्बत व तअ़ज़ीम से पुर था, जो आप और अ़हले बैत के शायाने शान था और ये मुह़ब्बत ब ऐतिमाद अबूबक्र व अली के बीच त़रफ़ैन से पाया जाता था। अली रज़ियल्लाहु अन्हु ने अपने एक बेटे का नाम अबूबक्र रखा। और अबूबक्र रज़ियल्लाहु अन्हु की वफ़ात के बाद अली रज़ियल्लाहु अन्हु ने आपके बेटे मुहम्मद को गोद लिया और पूरी रिआ़यत व तवज्जह के साथ उनकी किफ़ालत की और अपनी ख़िलाफ़त में उनको वाली बनाया जिसकी वजह से आपके ख़िलाफ़ लोगों की जुबानें खुलीं और आप पर ऐतिराज़ किया गया

हाफ़िज़ इब्ने कसीर रहमतुल्लाह अलैह‌ फ़र्माते हैं: रवाफ़िज़ ने इस मक़ाम पर बड़ी जिहालत व नादानी का सुबूत दिया है और ऐसी किज़्ब बयानी की है जिसकी हक़ीक़त से वोह ख़ुद ही नावाक़िफ़ हैं, उन्होंने गैर ज़रूरी बातों में ख़ुद को उलझा रखा है, अगर ये लोग मामलात की हक़ीक़त समझने की कोशिश करते तो सिद्दीक़ की फ़ज़ीलत का ज़रूर ऐतिराफ़ करते और आपकी दलीलो माज़िरत को ज़रूर क़बूल करते, लेकिन क्या किया जाए, ये अजीब क़ौम है, मुत्शाबेह और लोच लचर दलाइल से इस्तिदलाल करती है और सहाबा व ताबेईन और हर दौर और हर जगह के मुअ़तबर उ़लमाए इस्लाम के यहाँ जो बातें मुसल्लम उन्हें छोड़ देती है। [अल् बिदाया वन् निहाया: 5/251, 253]

रसूलुल्लाह ﷺ या दीगर अम्बिया-ए-साबिक़ीन अलैहि. ने इल्म व किताब के अलावा अपनी कोई विरासत नहीं छोड़ी और न किसी को अपना वारिस बनाया। अबूबक्र ने बक़ौल उन लोगों के अगर फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हा को माल की विरासत नहीं भी दी तो रसूलुल्लाह ﷺ के चचा अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु भी महरूम रहे हैं। ख़ुद उनकी अपनी साहबज़ादियाँ आइशा और सय्यदा हफ़्सा  जो कि अल्लाह के नबी करीम ﷺ के हरम में थीं उन्हें भी महरूम किया गया।

अगर ये मसल-ए-विरासत ऐसे ही था जैसे कि ये राफ़ज़ी बावर कराते हैं, तो क्यों न हुआ कि हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु अपने दौरे ख़िलाफ़त में जब कि वह कुल्ली तौर पर बाइख़्तियार थे रसूलुल्लाह ﷺ की तहवील में जो अमवाल रहे थे उन्हें विरासत के तौर पर तक़सीम करके तमाम अहले हुकूक़ को उनके हुकूक़ दे देते? लेकिन हक़ ये है कि उन्होंने भी अबूबक्र और उमर रज़ियल्लाहु अन्हु के फ़ैसले को जो कि रसूलुल्लाह ﷺ के फ़रमान के मुताबिक़ था बरक़रार रहने दिया जैसा कि शुरू में था। अल्लाह उनसे राज़ी हुआ और वह अल्लाह से राज़ी हुए।


सीरीज सीरते सय्यदना अ़ली बिन अबी त़ालिब रज़ियल्लाहु अन्हु तहरीर नंबर 14 आगे जारी है इंशाअल्लाह गुजारिश है इसको ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। 

जज़ाकुमुल्लाहु ख़ैरन


Team Islamic Theology

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Subscribe

Follow Us

WhatsApp
Chat With Us
WhatsApp
WhatsApp Chat ×

Assalamu Alaikum 👋
How can we help you?

Start Chat