Nikah se pehle (Part 2) | Kamiyab Azdawaji Zindagi Ki Kunji

Nikah: Kamiyab Azdawaji Zindagi Ki Kunji

निकाह से मुतअल्लिक अहम मालूमात

A. निकाह से पहले (Before Nikah) (पार्ट - 2)

iii. महरम ओ ग़ैर-महरम रिश्तों की तफ़सील

अबदी महरमात (सूरह अन-निसा: 23):

  1. नसब़ी महरमात (7 हैं): माँएँ, बेटियाँ, बहनें, फूफियाँ, खालाएँ, भतीजियाँ, भांजियाँ
  2. रज़ाई महरमात (7 हैं): रज़ाई माँएँ, रज़ाई बेटियाँ, रज़ाई बहनें, रज़ाई फूफियाँ, रज़ाई खालाएँ, रज़ाई भतीजियाँ, रज़ाई भांजियाँ
  3. सुराली महरमात (4 हैं): सास, बहू, बाप की बीवी, रबीबा (बीवी की पहले शोहर से बेटी जो पलने में आई हो)
  4. लि़आन: जिस मर्द या औरत के साथ एक मर्तबा लि़आन हो जाए, उससे हमेशा के लिए निकाह हराम हो जाता है। (अबू दाऊद: 2250)

iv. मौक्क़ती महरमात

  1. दो बहनों को एक वक़्त में निकाह में रखना (सूरह अन-निसा: 23)
  2. बीवी के साथ उसकी फूफी या खाला को एक वक़्त में निकाह में रखना (बुख़ारी: 5108)
  3. मनकूहा (जो किसी और के निकाह में हो) (सूरह अन-निसा: 24)
  4. तीन मर्तबा तलाक़शुदा बीवी जब तक शरअ़न हलाल न हो जाए (सूरह अल-बक़रह: 230)
  5. ग़ैर-मुस्लिम मर्द या ग़ैर-किताबी औरत से निकाह (सूरह अल-बक़रह: 221)
  6. एक वक़्त में चार से ज़्यादा बीवियाँ (उम्मत-ए-मुहम्मद ﷺ के लिए) (सूरह अन-निसा: 3)
  7. एहराम की हालत में निकाह करना (मुस्लिम: 1409)
  8. बदकार (फ़ासिक़) जब तक तौबा न कर ले (सूरह अन-नूर: 3)
नोट: एक मजलिस में एक साथ तीन तलाक़ देना इस्लामी तरीक़े से हराम है, हराम है, हराम है।

    v. निकाह की ममनूअ़ा क़िस्में

    1. निकाह मुतअ़ह: जाइज़ नहीं है (बुख़ारी: 5115)
    2. निकाह तहल़ील / हलाला: सिर्फ़ किसी को हलाल करने के लिए निकाह करना हराम है (तिर्मिज़ी: 1120)
    3. निकाह शिघ़ार की नाजायज़ शक्ल: दो लड़कियों का आपस में बदला लेना (मुस्लिम: 1415)
    4. मुअत्तद्दा का निकाह: औरत जब तक इद्दत में हो, निकाह हराम है (बक़रह: 235)
    5. मुक्रह का निकाह: ज़ोर-ज़बरदस्ती का निकाह जाइज़ नहीं (बक़रह: 256)

    vi. निकाह से पहले कुछ नसीहतें और ज़रूरी तालीमात:

    1. किसी के पैग़ाम-ए-निकाह पर अपना भेजना मना है (बुख़ारी: 5142)
    2. निकाह में बेवजह ताख़ीर मना है।
    3. मंगनी सिर्फ़ एक ज़बानी वादा होता है, रस्मों और इसराफ़ से बचना चाहिए
    4. बग़ैर वजह मंगनी तोड़ देना गुनाह और निफ़ाक़ का सबब बन सकता है।
    5. दींदार लड़की/लड़का चुनें (बुख़ारी: 5090) (मतलब: औरत से निकाह 4 चीज़ों की वजह से होता है: माल, नसब, हुस्न और दीन। तू दीन वाली से निकाह कर, वरना नुक़सान उठाएगा।)
    6. दीन के बजाए किसी और चीज़ को तरजीह देंगे तो नुक़सान उठाना पड़ेगा (तिर्मिज़ी: 1084)
    7. लड़का लड़की को देख सकता है लेकिन लड़के के रिश्तेदार नहीं।
    8. अगर लड़का मेहर व वलीमे की इस्तिताअत नहीं रखता तो उसकी मदद सदक़ा से की जा सकती है। (इब्न बाज़)
    9. अंगूठी या छल्ला अगर रिश्ते की हिफ़ाज़त की नीयत से हो तो जाइज़ नहीं।
    10. हैज़ की हालत में निकाह जाइज़ है लेकिन तअल्लुक़ात नहीं।

    vii. निकाह के मनाहियात (मनक़रात) – जिनसे बचना ज़रूरी है:

    1. रस्मो रिवाज
    2. सांचक
    3. जहेज़
    4. मंगनी की दावत और इसराफ़ वाले ख़र्चे
    5. मेहंदी और हल्दी की रस्में (as a ritual) — दुल्हन का मेहंदी लगाना जाइज़ है लेकिन इज्तेमाई रस्म के तौर पर करना ग़लत है
    6. सलामियाँ देने की रस्म
    7. मंगेतर को बीवी की तरह समझकर आज़ादाना मेलजोल रखना और हिजाब की पाबंदी न करना
    8. सूदी क़र्ज़े
    9. झूठ (लड़का और लड़की की सलाहियतों से मुतअल्लिक बोला जाता है)
    10. तसवीरें (जिसमें चेहरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाए)
    11. फ़ज़ूल खर्च़ी
    12. शिर्क, बिदअ़त और हराम काम से हर हाल में बचें।
    13. हर एक का हक़ अदा करें, हक़ तअल्फ़ी से परहेज़ करें।
    14. म्यूज़िक, नाच-गाना
    15. पड़ोसियों को तकलीफ़ देना
    16. रियाकारी, तकब्बुर, इसराफ़

    जमा व तरतीब: शेख अरशद बशीर उमरी मदनी हाफिजहुल्लाह
    हिंदी तर्जुमा : टीम इस्लामिक थिओलॉजी 


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