ग़ैर-मुसलमानों के इस्लाम पर एतराज़ात के जवाब
सवाल नंबर - 1
मुस्लिम लड़के का ही खतना क्यों किया जाता है?
लड़कियों का क्यों नहीं किया जाता?
इसका जवाब तीन पहलुओं से दिया जा सकता है:
1. लॉजिकल जवाब: लड़कों के लिए खतना (Circumcision) एक साफ़-सफ़ाई (hygiene) और बीमारियों से बचाव के लिए ज़रूरी माना गया है।
पुरुष के गुप्तांग (penis) के ऊपरी हिस्से (foreskin) के नीचे गंदगी, बैक्टीरिया, फंगल infection जमा हो सकते हैं। इससे Urinary Tract Infection (UTI), penile cancer और कई sexual infections का खतरा बढ़ जाता है। खतना होने से ये खतरे बहुत कम हो जाते हैं।
WHO (World Health Organization) भी कहता है कि खतना करने से HIV/AIDS का ख़तरा 60% तक कम हो जाता है। इसलिए दुनिया के कई गैर-मुस्लिम देश (जैसे अमेरिका, अफ्रीका के कुछ हिस्से) भी मेडिकल वजह से खतना करते हैं।
महिलाओं की शारीरिक रचना अलग होती है। उनके प्रजनन अंग (reproductive organs) में अंग की चमड़ी या शिश्न की त्वचा (foreskin) जैसा कोई हिस्सा नहीं होता जो ऐसी गंदगी या संक्रमण (infection) का बड़ा कारण बने।इसलिए महिलाओं के लिए चिकित्सकीय रूप से (medically) खतना की ज़रूरत या लाभ साबित नहीं हुआ।
बल्कि WHO ने female genital mutilation (FGM) यानी महिलाओं का खतना को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक और बेमतलब बताया है और इस पर रोक भी लगाई है।
- पुरुषों के खतना से स्वच्छता / साफ-सफाई (hygiene, infection) से बचाव और यौन स्वास्थ्य (sexual health) में फ़ायदा है।
- महिलाओं में ऐसा कोई वैज्ञानिक या मेडिकल कारण नहीं है, इसीलिए इस्लाम में महिलाओं का खतना फर्ज़ नहीं किया गया।
साइंटिफिक (वैज्ञानिक) जवाब:
रिसर्च बताती है कि खतना (circumcision) करने से पुरुषों को कई यौन संचारित संक्रमण (sexually transmitted infections) जैसे HIV, herpes का खतरा कम हो जाता है। मूत्र मार्ग संक्रमण (Urinary Tract Infections) बच्चों में बहुत कम होते हैं अगर वो खतना किया हुआ (circumcised) हों।
पुरुष के गुप्तांग (penis) के ऊपरी हिस्से (Foreskin) के नीचे स्मेग्मा (smegma) या शिश्न/योनि के आसपास बनने वाला सफेद चिकना पदार्थ जमा होता है जिससे इन्फेक्शन्स हो सकते हैं।
महिलाओं के लिए ऐसी कोई जैविक समस्या (biological problem) नहीं है जिससे खतने से बचाव मिले। इसलिए महिलाओं के लिए चिकित्सकीय रूप से खतना (medically circumcision) करना आवश्यक नहीं है, बल्कि नुकसानदायक साबित हुआ है।
क़ुरआन और हदीस से जवाब:
क़ुरआन में साफ़ तौर पर पुरुष खतने का हुक्म नहीं आया, लेकिन यह सुन्नत-ए-इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) है, जिसे हर नबी ने अपनाया।
नबी ﷺ ने फर्माया: "पाँच चीज़ें फ़ित्रत (स्वाभाविक प्रकृति) से हैं: खतना, ज़रूरत के बाल हटाना, नाखून काटना, बगल के बाल साफ़ करना, मूंछे छोटा करना।" [सहीह बुखारी, हदीस 5889 / सहीह मुस्लिम 257]
कुछ अरब क़बीलों में महिलाओं के "खफ्ज़" (minor circumcision) की रस्म थी, लेकिन इस्लाम ने इसे न फर्ज़ किया न सुन्नत बनाया।
नबी ﷺ ने बस इतना फ़रमाया कि अगर कभी कोई करता है तो "तकलीफ न देना" (अबू दाऊद 5271) यानी इससे दूर रहने की इजाज़त दी, लेकिन मर्दों का खतना बाकायदा फ़र्ज़/सुन्नत है।
इल्ज़ामी जवाब (Counter Question):
आपके हिंदू धर्म में तो शरीर की इस तरह की सफाई (खासकर गुप्तांग की सफाई) के लिए कोई धार्मिक नियम या प्रक्रिया नहीं है तो क्या आप लोग अपने शरीर को नेचुरल बैक्टीरिया और गंदगी से भरने दोगे?
क्या आपने WHO की वो रिसर्च देखी है जो मुसलमानों की इस सुन्नत (खतना) को मेडिकल तौर पर फायदेमंद बताती है?
क्या हिंदू वेद या गीता में कहीं भी ये कहा गया है कि शरीर के इस हिस्से (foreskin) की सफाई करनी चाहिए या उसका जिक्र है?
अगर नहीं तो क्या आप मेडिकल साइंस और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की बात को भी नज़रअंदाज करोगे?
- पुरुष खतना (Male Circumcision) सिर्फ धार्मिक कारणों से ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और चिकित्सकीय दृष्टि से भी बहुत फ़ायदेमंद माना गया है।
- महिलाओं के लिए ये नुकसानदायक है, इसलिए इस्लाम ने उन्हें इससे बख्शा है।
- क़ुरआन-हदीस में मर्दों का खतना "फ़ित्रत" (natural cleanliness) बताया गया है।
- महिलाओं का खतना ना फ़र्ज़ है, ना सुन्नत।
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