Kya aulad azmaish hai?

Kya aulad azmaish hai?


क्या औलाद आज़माइश है?

औलाद का होना इंसान के लिए नेमत और आजमाइश (test) दोनों है। 

और औलाद का न होना इंसान के लिए आजमाइश है। 

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त अपने बंदों के तक़वा और सब्र से आज़मा रहा होता है, ये अल्लाह की हिकमत है हम इंसान इसे नहीं समझ सकते इसलिय जिनको औलाद न हो रही उसे बेऔलादी या मनहूस नहीं कहा जा सकता। 

इसी तरह कुछ जाहिल लोग किसी शख्स की सिर्फ़ बेटियां हों तो उसे भी बेऔलादी की संज्ञा देते हैं याद रखें ये सख़्त गुनाह है।

इरशादे बारी त'आला है:

"आसमानों और ज़मीन की बादशाही अल्लाह ही के लिए है, वो जो चाहता है पैदा करता है, जिसे को चाहता है बेटियाँ देता है और जिसे चाहता है बेटे देता है, या दोनो मिलाकर देता है बेटे भी और बेटियाँ भी और जिसे चाहे बांझ कर देता है' वो बड़े इल्म वाला और कमाल कूदरत वाला है।" [क़ुरान (सुराह शूरा 42/49-50]

मालूम हुआ के बेटे और बेटियाँ देना अल्लाह के ही इख़्तियार में है, अंबिया ए किराम के वाक़्यात हमारे सामने हैं जैसे,

  1. हज़रत लुत अलैहिस्सलाम
  2. हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम
  3. हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम
  4. हज़रत याह्या अलैहिस्सलाम
  5. हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम

यही वजह है की अंबिया अलैहिस्सलाम ने भी अल्लाह से ही औलाद तलब की हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने दुआ की,

"ऐ मेरे रब! मुझे नेक औलाद अता कर।" [क़ुरान (सुराह सफ्फात 37/100]

और हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम ने दुआ फरमाई, "ऐ मेरे रब मुझे अपने पास से पाकीज़ा औलाद अता फरमा' बेशक तू दुआ का सुनने वाला है।" [क़ुरान (सुराह इमरान 03/38]


आपकी दीनी बहन 
फ़िरोज़ा 

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