Eid ul Azha (Eid ul adha) part-5

Eid ul Azha (part-5) Introduction, history,  matters & compulsory  works


ईदुल अज़हा (किस्त 05)- परिचय, इतिहास और अहकाम व मसाएल


तकबीरात और अय्यामे तशरीक़:

 तकबीर, (अल्लाहु अकबर) तहलील (ला इलाहा इलल्लाह) और तहमीद (व लिल्लाहिल हम्द) 

अशरह ज़िलहिज़्जा में

اللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ لَا إلَهَ إلَّا اللَّهُ وَاَللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ وَلِلَّهِ الْحَمْدُ

"अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर लाइलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर वलिल्लाहिल हम्द"

[दार क़ुतनी, मुसन्नफ़ इब्ने अबी शैबा]


और यह दुआ 

اللَّهُ أَكْبَرُ كَبِيرًا وَالْحَمْدُ لِلَّهِ كَثِيرًا وَسُبْحَانَ اللَّهِ بُكْرَةً وَأَصِيلًا 

اللَّهُ أَكْبَرُ وَلَا نَعْبُدُ إلَّا اللَّهَ مُخْلِصِينَ له الدَّيْنَ وَلَوْ كَرِهَ الْكَافِرُونَ 

لَا إلَهَ إلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ صَدَقَ وَعْدَهُ وَنَصَرَ عَبْدَهُ وَهَزَمَ الْأَحْزَابَ وَحْدَهُ 

لَا إلَهَ إلَّا اللَّهُ وَاَللَّهُ أَكْبَرُ

 अल्लाहु अकबर कबीरा वल हमदुलिल्लाहि कसीरा व सुबहनल्लाहि बुकरतन व असीला

 अल्लाहु अकबर व ला नअबुदु इल्लल्लाह मुख़लिसीना लहुददीना व लौ करेहल काफ़िरून 

 लाइलाहा इल्लल्लाहु वहदहु सदक़ा वअदह व नसरा अबदहु व हज़मल अहज़ाबा वहदह लाइलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहुअकबर।

पढने की ख़ास ताकीद की गई है। [मुसनद अहमद]


इन तकबीरों को कब से कब तक पढ़ा जाय इस सिलसिले में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से कोई अमल मंक़ूल नहीं। अलबत्ता आसार सहाबा से पता चलता है कि 09 ज़िलहिज़्जा की फ़ज्र के बाद से 13 ज़िलहिज़्जा के अस्र तक चलते-फ़िरते, उठते-बैठते और नमाज़ों के बाद पढ़ते रहना चाहिए।

قال الحافظ : ولم يثبت في شيء من ذلك عن النبي صلى الله عليه و سلم حديث وأصح ما ورد فيه عن الصحابة قول على وبن مسعود إنه من صبح يوم عرفة إلى آخر أيام منى أخرجه بن المنذر وغيره والله أعلم . فتح الباري - ابن حجر (2 /462)

हाफ़िज़ इब्ने हजर कहते हैं, "इस सिलसिले में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से हदीस से कुछ भी साबित नहीं है।" अलबत्ता अब्दुल्लाह बिन मसऊद के हवाले से यह मिलता है कि "वह अरफ़ा के दिन (09 ज़िलहिज्जा) की सुबह मिना के आख़िरी दिन तक। इबनुल मुन्ज़िर वगैरह ने नक़ल किया है।" अल्लाह ही बेहतर जनता है।

[फ़तहुल बारी हाफ़िज़ इब्ने हजर असक़लानी 462/2]


عن أبي عبد الرحمن عن علي أنه کان یکبر بعد صلاة الفجر یوم عرفة إلی صلاة العصر من آخر أیام التشریق ویکبر بعد العصر 

( مصنف ابن أبي شیبة:2؍72) واللفظ له (المستدرک: 1؍299، السنن الکبریٰ للبیهقي: 3؍314)

अली रज़ी अल्लाहु अन्हु अरफ़ा के दिन 09 ज़िलहिज्जा) सुबह फ़ज्र के बाद से तशरीक़ के आख़िरी दिन (13 ज़िलहिज्जा) की अस्र की नमाज़ तक तकबीर कहते थे।

عن ابن عباس أنه کان یکبر عن غداة عرفة إلی صلوة العصر من آخر أیام التشریق 

(المستدرک للحاكم 1؍299)

इब्ने अब्बास रज़ी अल्लाहु अन्हुमा अरफ़ा के दिन (09 ज़िलहिज्जा) सुबह फ़ज्र के बाद से तशरीक़ के आख़िरी दिन (13 ज़िलहिज्जा) अस्र की नमाज़ तक तकबीर कहते थे।


इन शा अल्लाह आगे की बातों का ज़िक्र हम "पार्ट-6" में करेंगे।  


आसिम अकरम अबु अदीम फ़लाही  

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