पारा (24) फ़मन अज़लमु
इस पारे में तीन हिस्से है-
(2) सूरह अल मोमिन मुकम्मल
(3) सूरह फ़ुससिलत (हाम मीम अस सज्दा)
(1) सूरह (039) अज़ ज़ुमर बाक़ी हिस्सा
(i) सबसे बड़ा ज़ालिम
उससे बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ (बुहतान) बाँधे और जब उसके पास सच्ची बात आए तो उसको झुठला दे। जहन्नम ही काफ़िरों का ठिकाना है। (आयत 32)
(ii) अल्लाह के रब होने का बयान
आसमान और ज़मीन का ख़ालिक़ सिर्फ़ अल्लाह ही है (इस को तमाम इंसान तस्लीम करते हैं)। अल्लाह जिसे हिदायत देना चाहे उसे कोई भटका नहीं सकता और जिसे गुमराह कर दे उसे कोई हिदायत नहीं दे सकता। उसने सबकी ज़िंदगी का एक वक़्त मुक़र्रर कर रखा है। (37)
(iii) काफ़िरों के दिल
जब एक अल्लाह का ज़िक्र होता है तो काफ़िरों के दिल डूबने लगते हैं और जब अल्लाह के इलावा किसी बनाए हुए माबूदों का ज़िक्र होने लगे तो फिर वही चेहरे खिल उठते हैं जो लोग ऐसा करेंगे तो वह कितना भी तावान (जुर्माना) देने की कोशिश कर लें अज़ाब से बच नहीं सकेंगे। (45)
(iv) अल्लाह की अपार रहमत का बयान
لا تَقْنَطُوا مِنْ رَحْمَةِ اللَّه
अल्लाह की रहमत से कभी मायूस नहीं होना चाहिए अपनी निजी ज़िन्दगी में भी और सामाजिक जीवन में भी, ख़ास तौर पर जो लोग अल्लाह के दीन की दावत लोगों तक पहुंचा रहे हों। (53)
(v) जहन्नमियों के जहन्नम में दाख़िल होने की कैफ़ियत का बयान
काफ़िरों के ग़ोल के ग़ोल जहन्नम की तरफ़ हॅकाए जाएँगे यहाँ तक की जब वह जहन्नम के पास पहुँचेगें तो उसके दरवाज़े खोल दिए जाएगें और उसका दरोग़ा उनसे पूछेगा कि क्या तुम्हारे पास ख़ुद तुम्हीं में से कोई रसूल नहीं आया था जो तुमको तुम्हारे रब की आयतें पढ़कर सुनाता और तुमको इस बुरे दिन के पेश आने से डराता वह लोग जवाब देगें क्यों नहीं! रसूल तो आए थे मगर हमने न माना, और अज़ाब का हुक्म काफ़िरों पर पूरा हो कर रहेगा। तब उनसे कहा जाएगा कि जहन्नम के दरवाज़ों में दाख़िल हो जाओ और हमेशा इसी में रहो। जान लो कि तकब्बुर (घमंड) करने वालों के लिये कितना बुरा ठिकाना है। (आयत 71, 72)
(vi) जन्नतियों के जन्नत में दाख़िल होने की कैफ़ियत का बयान
जो लोग अपने रब से डरते थे वह गिरोह दर गिरोह जन्नत की तरफ़ ले जाये जाएगें यहाँ तक कि जब वह उसके पास पहुँचेगें तो जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाएँगें और उसका दारोग़ा उन से कहेगा सलामती हो तुम पर ख़ुश रहो। हमेशा के लिए जन्नत में दाख़िल हो जाओ। मोमिन कहेंगें अल्लाह का शुक्र है जिसने अपना वायदा सच्चा कर दिखाया और हमें जन्नत का वारिस बनाया कि हम जन्नत में जहाँ चाहें रहें। क्या ख़ूब बदला है अमल करने वालों के लिए। (आयत 73,74)
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(2) सूरह (040) अल मोमिन मुकम्मल
(i) अल्लाह के सिफ़ाती नाम
अल अज़ीज़, अल अलीम, ग़ाफ़िरिज़ ज़न्ब, क़ाबिलित तौब, शदीदुल इक़ाब, ज़ित तौल, रफ़ीउद दरजात, ज़ुल अर्श, अल हकीम, अल अली, अल कबीर, अल क़ह्हार, अस समीअ, अल बसीर, अल ग़फ़्फ़ार, (2, 3, 15, 16, 20)
(ii) दो मौत और दो ज़िंदगी
इंसान बेजान था, अल्लाह ने उसे ज़िंदगी दी,फिर मौत देगा और फिर दोबारा ज़िंदा करेगा। काफ़िर इनमें से पहली तीन हालतों का इंकार नहीं करते क्योंकि observation में आती हैं मगर आख़िरी हालत यानी दोबारा ज़िंदगी का इंकार करते हैं। क्योंकि वह उनके observation में नहीं आई है इसकी ख़बर सिर्फ़ अंबिया अलैहिमुस्सलाम ने दी है। क़यामत के दिन यह चौथी हालत भी मुशाहिदे में आ जायेगी तब यह काफ़िर उसकी तस्दीक़ करेंगे। (11)
(iii) आज के दिन किसका राज पाट है?
क़यामत के दिन जबकि सब लोग बेपर्दा होंगे, अल्लाह से उनकी कोई बात भी छुपी हुई न होगी। पूछा जाएगा “बताओ आज के दिन का मालिक कौन है?” (सारा जहाँ पुकार उठेगा) “अकेला अल्लाह जो सबपर हावी है।” (16)
(iv) मोमिन ज़ालिम के दरमियान रहते हुए भी मोमिन ही रहता है
जब फ़िरऔन के दरबार में मूसा अलैहिस्सलाम के क़त्ल की साज़िश हो रही थी तो एक मोमिन जो अपने ईमान को छुपाए हुए था उस ने कहा أَتَقْتُلُونَ رَجُلًا أَن يَقُولَ رَبِّىَ ٱللَّهُ क्या तुम ऐसे इंसान को क़त्ल करोगे जो कहता है मेरा रब अल्लाह है। उसने फ़िरऔन और उसके दरबारियों को डराया कि अगर तुम लोगों ने मूसा को क़त्ल किया तो अंजाम बहुत भयानक होगा। (28)
(v) फ़िरऔन का घमंड
फ़िरऔन ने अल्लाह तआला को देखने की नापाक जसारत करते हुए अपने वज़ीर हामान को एक महल तामीर कराने का हुक्म दिया। (37)
(vi) फ़िरऔन का अंजाम और क़ब्र के अज़ाब का सुबूत
फ़िरऔन को रोज़ाना सुबह और शाम आग के सामने पेश किया जाता है और आख़िरत के दिन इन्तेहाई सख़्त अज़ाब में दाख़िल किया जाएगा। (46)
(vii) अल्लाह के हुक्म की नाफ़रमानी का अंजाम जहन्नम है
जो लोग घमंड में आकर मेरी इबादत से मुंह मोड़ते हैं वह ज़रूर ज़लील व ख़्वार हो कर जल्द ही जहन्नम में जाएंगे। (आयत 60)
(viii) इंसान की तख़लीक़ का बयान
इंसान कभी मिट्टी था फिर नुत्फ़ा बना फिर अल्क़ा बना फिर जवान हुआ फिर बूढ़ा हुआ फिर मौत उसका मुक़द्दर है। (67)
(ix) अल्लाह की निशानियां
रात को सुकून, दिन को रौशन, ज़मीन को बिछौना और आसमान की छत बनाई, इंसान की बेहतरीन तस्वीर गरी की और उम्दा रिज़्क़ दिया। (64)
(x) कुछ अहम बातें
◆ अल्लाह की आयत के मुक़ाबले में बग़ैर दलील के गुफ़्तगू करना अल्लाह की नाराज़गी का सबब बनता है। (35)
◆ दुनिया की ज़िंदगी तो गिनती की है हमेशा रहने की जगह तो आख़िरत ही है। (39)
◆ मोमिन के तीन काम सब्र, इस्तेग़फ़ार, और सुबह शाम तस्बीह (55))
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(3) सूरह (041) फ़ुससिलत (हाम मीम अस सज्दा)
(i) क़ुरआन का इंकार अल्लाह का इंकार है
कुफ़्फ़ारे मक्का अक्सर यह रट लगाए रहते थे कि यह क़ुरआन मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ख़ुद घड़ कर लाते हैं तो उन्हें जान लेना चाहिए कि यह कलाम अल्लाह की तरफ़ से नाज़िल हो रहा है, अगर किसी को यह कलाम सुन कर ग़ुस्सा आता है तो मालूम होना चाहिए यह ग़ुस्सा नबी के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि अल्लाह के ख़िलाफ़ है अगर इस का इंकार करते हो तो अल्लाह की बात का इंकार करते हो, अगर इस से बेरूख़ी दिखाते हो तो अल्लाह के ख़िलाफ़ मुंह मोड़ते हो। (2 से 4)
(ii) नबी भी इंसान है
अल्लाह के रसूल भी तमाम इंसानों की तरह एक इंसान हैं फ़र्क़ यह है कि उनके पास अल्लाह की जानिब से वही आती है। उस वही का निचोड़ यह है कि अल्लाह एक और सिर्फ़ एक है। (06)
(iii) काएनात की तख़लीक़ के छः दिन
अल्लाह ने दो दिन में ज़मीन, दो दिन में पहाड़ जमाया और ज़मीन के अंदर तमाम चीजें और दो दिन में सात आसमान बनाया और सजाया। यह आयत 9 से 12 तक मुतशाबेहात (unspecific) में से है।
(iv) निहारिका (nebula)
फिर उस ने आकाश की ओर रुख़ किया, जबकि वह मात्र धुआँ था। (आयत 11)
"धुएं से मुराद माद्दे की वह इब्तेदाई सूरत है जिसमें वह काएनात के वजूद में आने से पहले एक बे शक्ल बिखरे हुए ग़ुबार की तरह फ़िज़ा में फैला हुआ था। इस युग के वैज्ञानिक इसी को Nebula का नाम देते हैं"
(v) इंसान के विरुद्ध गवाही
क़यामत के दिन इंसान के शरीर के अनेक भाग जैसे कान,आंख और खालेँ उसके ख़िलाफ़ गवाही देंगे, इंसान आश्चर्यचकित होकर खालों से पूछेगा तुमने हमारे ख़िलाफ़ कैसे गवाही दी तो उनका जवाब होगा हमें उसने बोलने की ताक़त दी है जिसने हर चीज़ को बोलना सिखाया है। (19 से 21)
(vi) कुफ़्फ़ार की शरारत
जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क़ुरआन मजीद की तिलावत करते तो काफ़िर लोगों को सुनने से मना करते और इतना शोर मचाते कि लोग तिलावत न सुन सकें। (26)
(vii) बेहतरीन बात
उस शख़्स से बेहतर किसकी बात हो सकती है जो लोगों को अल्लाह की तरफ़ बुलाए, नेक अमल करे और कहे कि मैं मुसलमान हूं। (33)
(viii) शैतान का वसवसा
जब शैतान वसवसा डाले (बहकाने की कोशिश करे) तो तत्काल अऊज़ुबिल्लाहि मिनस शैतानिर रजीम पढ़ना चाहिए। (36)
(ix) अल्लाह की निशानियां
रात और दिन, सूरज और चांद अल्लाह की बनाई हुई चीज़ें हैं इसलिए सूर्य, चन्द्रमा और अन्य वस्तुओं के बजाय अल्लाह की ही पूजा करनी चाहिए। वही मुर्दा पड़ी हुई ज़मीन को बारिश के ज़रिए नरम करता है। (37 से 39)
(x) ग़ैब का इल्म केवल अल्लाह के पास है
1, क़यामत का इल्म
2, ग़िलाफ़ों, (ख़ोल) में से फल का निकलना
3, मां के पेट में क्या होगा?
4, बच्चा कब और कैसे पैदा होगा? (47)
(xi) क़ुरआन रहती दुनिया तक मुअजिज़ा (चमत्कार) है
سَنُرِيهِمْ آيَاتِنَا فِي الْآفَاقِ وَفِي أَنفُسِهِمْ حَتَّىٰ يَتَبَيَّنَ لَهُمْ أَنَّهُ الْحَقُّ ۗ أَوَلَمْ يَكْفِ بِرَبِّكَ أَنَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
हम शीघ्र ही अपनी क़ुदरत की निशानियाँ अतराफ़ आलम में (दुनिया में हर तरफ़) और ख़़ुद उनके अंदर भी दिखाएंगे यहाँ तक कि उन पर ज़ाहिर हो जाएगा कि यक़ीनन यही हक़ है क्या तुम्हारा परवरदिगार हर चीज़ पर क़ाबू रखने के लिए काफ़ी है। (53)
आसिम अकरम (अबु अदीम) फ़लाही
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