Allah se dhokha aur bagawat (part-3) | 4. kalimah shahadat

Allah se dhokha aur bagawat (part-3) | 4. kalimah shahadat


अल्लाह से धोका और बगावत (मुसलमान ज़िम्मेदार)

3. बिदअत का आगाज़ और बचाव (पार्ट 03)

3.2. कलिमाह शहदात में सय्यदना का इज़ाफ़ा


यानि मुअज़्ज़ीन यें कहे "अशहदू अन्ना सय्यदना मुहम्मदन रसूलुल्लाह"

ये सूफियों और गुमराह सिलसिले वाले लोगो की बिदअत है। बहाना यह करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मोहब्बत, ताज़ीम और सरदारी मानना वाजिब है।

इसमें कोई शक नहीं के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मोहब्बत और ताज़ीम वाजिब है, लेकिन यह मोहब्बत और ताज़ीम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत की इत्तेबा में ही होगी, ना के मुख़ालिफ़त से, लिहाजा ईमान का तकाज़ा यही है कि आपकी सुन्नत पर ना ज़्यादती की जाए और ना मुख़ालिफ़त और ना आगे बढ़ने की कोशिश की जाए।

अब्दुल्लाह बिन शखीर रज़ि अल्लाहु अन्हु से रिवायत है की में बनी आमिर के वफ़द (ग़ुलाम) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास गया, 

हमने कहा: अंता सय्यदना? (आप हमारे सय्यद हैं?) 

तो नबी अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया: "सय्यद तो अल्लाह तआला है।"

हमने कहा: आप हम में सबसे अफ़ज़ल और बुलंद मर्तबे वाले हैं?

आप ने फरमाया: "वही कहो जो पहले कहते थे (यानी रसूलुल्लाह, नबी अल्लाह वगैरह) या उसके मुशाबे कहो, और याद रखो कहीं तुम्ह शैतान फुसला ना दे और अपना नुमाइंदा ना बना ले।

[अबू दाऊद 5806]

इससे मालूम हुआ कि किसी को मुंह पर सैयद कहना या नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को नबी की बजाय सिर्फ सैयद यानी दुनिया का आम सरदार समझना गलत है, रहा नबी अलैहिसालाम का सय्यद वलद ए आदम होना तो ये अज़हर मिनस-शम्स (सूरज की तरह रोशन बात) है जब आप सय्यद उन नास में, आप का नवासा हसन भी सय्यद है रज़ि अन्हु, तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को सय्यद समझना और कहना बिलकुल सहीह है। अलबत्ता दुरूद या कलिमा शहादत में यें इज़ाफ़ा सय्यदना साबित नहीं।


अल्लाह हमें सहीह दीन की तौफ़ीक़ से नवाज़े।

आमीन 

जुड़े रहें उम्मत में फैले बिदअत को सामने लाते रहेंगे।


आपका दीनी भाई
मुहम्मद रज़ा

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